{"_id":"eb05c11f3162be3dd54101751537ca77","slug":"sale-of-goods-shall-be-made-in-karnal-jail","type":"story","status":"publish","title_hn":"करनाल जेल में बने सामान की होगी खुली बिक्री ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
करनाल जेल में बने सामान की होगी खुली बिक्री
करनाल/ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jan 2014 12:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसी न किसी अपराध की कालिख से सने हाथ अब हुनरमंद हो रहे हैं। करनाल की जेल में बंद कैदी और हवालाती सलाखों के पीछे सुधार की पगडंडी पर चलते हुए कई तरह का सामान बनाने में जुटे हैं।
खिलौनों से लेकर फुट मैट तक कैदी तैयार कर रहे हैं। भले ही अब तक उनके इस काम को महज सजा और सुधार का एक जरिया समझा जाता रहा हो, लेकिन अब यह सामान बाहर बिकेगा।
इस सामान की बिक्री के लिए जिला न्यायिक परिसर में जल्दी ही एक सेल काउंटर लगाया जाएगा, जहां मार्केट रेट पर शहरवासी यह सामान खरीद सकेंगे। जेल अधीक्षक शेर सिंह की पहल पर बार काउंसिल ने इसकी स्वीकृति दे दी है।
विज्ञापन
काउंटर लगाने के लिए जल्दी ही अगली औपचारिकताएं निपटा ली जाएंगी। कैदियों द्वारा बनाए गए सामान की कई मौकों पर जेल में प्रदर्शनी तो लगती रही हैं, लेकिन सीखचों से बाहर अब भी इनकी बिक्री होगी। इस तरह का प्रोजेक्ट शुरू करने वाली करनाल की जेल संभवत: प्रदेश की पहली जेल होगी।
यह सामान बनाते हैं कैदी-हवालाती
जेल में कैदी और हवालाती जूट से लेकर लोहे तक का सामान बनाते हैं। इनमें मुख्य रूप से बच्चाें के विभिन्न प्रकार के आकर्षक खिलौने, घर का सजावटी सामान, मैट, लोहे की तारों के बने आइटम, लकड़ी की आइटम, पेंटिंग आदि शामिल हैं।
जेल में खोली बेकरी
जेल कैंपस में जेल अधीक्षक शेर सिंह के प्रयास से बेकरी खोली जा रही है। बेकरी की आठ लाख की मशीन जेल में इंस्टाल की जा चुकी है और जल्दी ही यहां ब्रैड, रस्क, बिस्किट और फैन बनने शुरू हो जाएंगे।
यह करीब दस लाख रुपये का प्रोजेक्ट है, जिसकी देखरेख उपाधीक्षक अशोक कांबोज कर रहे हैं। कैदियाें और हवालातियों को प्रतिदिन नाश्ते में 100 ग्राम ब्रैड, बिस्किट्स, रस्क या फैन दिए जाते हैं, जो बाहर से आता है।
अब कैदी खुद जेल के अंदर ही यह सामान बनाएंगे। उन्हें न सिर्फ अब ताजा ब्रैड, रस्क, बिस्किट और फैन नाश्ते में मिलेंगे, बल्कि सेल काउंटर पर भी इसकी बिक्री होगी।
शहर के मशहूर गोवर्धन पेठा मेकर्स की एक यूनिट भी इस बेकरी में लगाई जा रही है। कैदी यहां पेठा तैयार करेंगे, जिसकी लेबर उन्हें दी जाएगी और यह पेठा भी शहर में बिकेगा। इस बेकरी में 10 से 12 कैदियों को रोजगार भी मिलेगा।
मिलती है 40 रुपये लेबर
कैदियों और हवालातियों को काम करने के लिए 40 रुपए प्रतिदिन लेबर दी जाती है। मानना है कि यह राशि अपेक्षाकृत काफी कम है। उनके द्वारा बनाए गए सामान की खुली बिक्री के बाद उनकी लेबर में इजाफे की संभावना है।
विज्ञापन
खिलौनों से लेकर फुट मैट तक कैदी तैयार कर रहे हैं। भले ही अब तक उनके इस काम को महज सजा और सुधार का एक जरिया समझा जाता रहा हो, लेकिन अब यह सामान बाहर बिकेगा।
विज्ञापन
इस सामान की बिक्री के लिए जिला न्यायिक परिसर में जल्दी ही एक सेल काउंटर लगाया जाएगा, जहां मार्केट रेट पर शहरवासी यह सामान खरीद सकेंगे। जेल अधीक्षक शेर सिंह की पहल पर बार काउंसिल ने इसकी स्वीकृति दे दी है।
विज्ञापन
काउंटर लगाने के लिए जल्दी ही अगली औपचारिकताएं निपटा ली जाएंगी। कैदियों द्वारा बनाए गए सामान की कई मौकों पर जेल में प्रदर्शनी तो लगती रही हैं, लेकिन सीखचों से बाहर अब भी इनकी बिक्री होगी। इस तरह का प्रोजेक्ट शुरू करने वाली करनाल की जेल संभवत: प्रदेश की पहली जेल होगी।
यह सामान बनाते हैं कैदी-हवालाती
जेल में कैदी और हवालाती जूट से लेकर लोहे तक का सामान बनाते हैं। इनमें मुख्य रूप से बच्चाें के विभिन्न प्रकार के आकर्षक खिलौने, घर का सजावटी सामान, मैट, लोहे की तारों के बने आइटम, लकड़ी की आइटम, पेंटिंग आदि शामिल हैं।
जेल में खोली बेकरी
जेल कैंपस में जेल अधीक्षक शेर सिंह के प्रयास से बेकरी खोली जा रही है। बेकरी की आठ लाख की मशीन जेल में इंस्टाल की जा चुकी है और जल्दी ही यहां ब्रैड, रस्क, बिस्किट और फैन बनने शुरू हो जाएंगे।
यह करीब दस लाख रुपये का प्रोजेक्ट है, जिसकी देखरेख उपाधीक्षक अशोक कांबोज कर रहे हैं। कैदियाें और हवालातियों को प्रतिदिन नाश्ते में 100 ग्राम ब्रैड, बिस्किट्स, रस्क या फैन दिए जाते हैं, जो बाहर से आता है।
अब कैदी खुद जेल के अंदर ही यह सामान बनाएंगे। उन्हें न सिर्फ अब ताजा ब्रैड, रस्क, बिस्किट और फैन नाश्ते में मिलेंगे, बल्कि सेल काउंटर पर भी इसकी बिक्री होगी।
शहर के मशहूर गोवर्धन पेठा मेकर्स की एक यूनिट भी इस बेकरी में लगाई जा रही है। कैदी यहां पेठा तैयार करेंगे, जिसकी लेबर उन्हें दी जाएगी और यह पेठा भी शहर में बिकेगा। इस बेकरी में 10 से 12 कैदियों को रोजगार भी मिलेगा।
मिलती है 40 रुपये लेबर
कैदियों और हवालातियों को काम करने के लिए 40 रुपए प्रतिदिन लेबर दी जाती है। मानना है कि यह राशि अपेक्षाकृत काफी कम है। उनके द्वारा बनाए गए सामान की खुली बिक्री के बाद उनकी लेबर में इजाफे की संभावना है।