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विश्व चैंपियन जैस्मिन लौटी घर:  हुआ भव्य स्वागत, कहा- ओलंपिक में पदक लाना मेरा लक्ष्य

Wed, 17 Sep 2025 06:08 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Published by: शाहिल शर्मा Updated Wed, 17 Sep 2025 06:08 PM IST
सार

विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता जैस्मिन लंबोरिया का बुधवार को इंग्लैंड से घर पहुंचने पर शहरवासियों और परिवार के सदस्यों ने भव्य स्वागत किया।

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World Boxing Championship gold medallist Jasmine returns home
मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया लौटी घर - फोटो : संवाद

विस्तार

विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता जैस्मिन लंबोरिया का बुधवार को इंग्लैंड से घर पहुंचने पर शहरवासियों और परिवार के सदस्यों ने भव्य स्वागत किया। जैस्मिन ने कहा कि उनका सपना वर्ष 2028 के ओलंपिक में देश के लिए पदक लाना है। इससे पहले, मंगलवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर भी हरियाणा बॉक्सिंग संघ, बॉक्सिंग फेडरेशन और आर्मी की ओर से जैस्मिन का अभिनंदन किया गया।

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मुक्केबाज जैस्मिन लंबोरिया सिद्धपीठ बाबा जहर गिरि और बाबा शंकर गिरि की समाधि पर धोक लगाकर आशीर्वाद लिया। उन्होंने अपनी इस ऐतिहासिक जीत को ईश्वर को समर्पित किया। आश्रम में पीठाधीश्वर महंत डॉ.अशोक गिरि ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न भेंट कर उनका सम्मान किया। डॉ. गिरि ने कहा कि ओलंपिक में जैस्मिन देश को स्वर्ण पदक दिलाएं यही सभी की शुभकामनाएं हैं। इस अवसर पर बाबा भगवान गिरि, बाबा कैलाश गिरि, बाबा दशरथ गिरि, बाबा कामाख्या गिरि, बाबा गणेश गिरि के साथ ही जैस्मिन के माता-पिता और परिजन भी मौजूद रहे।

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ये है आगे की योजना
जैस्मिन लंबोरिया ने बताया कि अब वह वर्ष 2026 में होने वाले एशियन खेलों और कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारियों पर ध्यान देंगी। इसके लिए अभ्यास जल्द शुरू करेंगी। अक्तूबर में भारत में ही वर्ल्ड कप फाइनल के मुकाबले होने हैं, जिसके लिए विशेष कैंप लगेगा। उनका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2028 के ओलंपिक में देश को पदक दिलाना है।

पांच मुकाबले खेलकर जीता स्वर्ण
जैस्मिन लंबोरिया ने कहा कि इस चैंपियनशिप में उनका मुकाबला ओलंपिक पदक विजेताओं से रहा। स्वर्ण पदक जीतने के लिए उन्हें कुल पांच मुकाबले खेलने पड़े। उन्होंने कहा कि खुशी है कि वह अपने खेल में शत-प्रतिशत देने में सफल रहीं और देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया। 

ये बोले जैस्मिन के परिजन
पिता जयबीर, मां जोगेंद्र कौर और चाचा महाबीर ने बताया कि जैस्मिन ने 10वीं कक्षा में मुक्केबाजी का अभ्यास शुरू किया। घर में चाचा संदीप और परविंदर पहले से ही मुक्केबाज थे, जिसके चलते जैस्मिन बचपन से खेल के माहौल में पली-बढ़ीं। वर्ष 2016 में 11वीं कक्षा में पढ़ाई के साथ उन्होंने मुक्केबाजी को पूरा समय देना शुरू कर दिया और आज इस मुकाम तक पहुंचीं। परिजनों ने कहा कि आज बदलते दौर में बेटियों को भी बेटों के बराबर महत्व दिया जाने लगा है।

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