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विश्व एड्स टीकाकरण दिवस: जिले में 2350 मरीज करा रहे इलाज
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सोनीपत। एचआईवी वायरस सीधे व्यक्ति के इम्यून सिस्टम पर अटैक कर उसे कमजोर बना देता है। एड्स पीड़ित लोगों का इलाज आजीवन चलता है। विभाग की ओर से लोगों को एड्स से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
जिले अभी तक नवजात एड्स से मुक्त है। 18 माह तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से पैदा हुए बच्चों को अपनी निगरानी में रख जाता है। विभाग की ओर से हर साल 75 हजार लोगों की सैंपलिंग की जाती है। किसी मरीज को एचआईवी की पुष्टि होते ही सबसे पहले उन्हें टीबी की स्क्रीनिंग के लिए भेजा जाता है।
आईसीटीसी में मरीजों को टीबी जांच के लिए कैट वन का कोर्स कराया जाता है। इसके बाद जब मरीजों में सुधार आना शुरू हो जाता है तो उसके बाद उसे एआरटी सेंटर भेजा जाता है। जहां मरीजों की सीडी फाॅर और वायरल लोड की जांच की जाती है। यदि मरीज का सीडी फाॅर 350 से 250 के बीच मिलता है तो पीड़ित मरीज को टीबी और एआरटी की दवाई एक साथ खानी पड़ती है।
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2350 मरीज ले रहे दवा
सोनीपत में एआरटी सेंटर की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई। उस दौरान मात्र 500 मरीज दवाई ले रहे थे। अब मरीजों संख्या 2350 तक पहुंच गई है। समय-समय पर एचआईवी पीड़ित मरीजों की कांउसिलिंग की जाती है। इन सेंटरों पर गर्भवती, टीबी के मरीज, हाई रिस्क ग्रुप व स्वैच्छिक जांच कराने वाले लोगों की जानकारी गोपनीय रखी जाती है।
वर्जन
एड्स से बचाव के लिए वैक्सीन अब तक विकसित नहीं हुई है। एचआईवी संक्रमित की लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है। एचआईवी के संक्रमण को जीवनभर दवा खानी पड़ती है। लोगों को एड्स से बचाव के लिए समय-समय पर जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. तरुण यादव, उप सिविल सर्जन
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जिले अभी तक नवजात एड्स से मुक्त है। 18 माह तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से पैदा हुए बच्चों को अपनी निगरानी में रख जाता है। विभाग की ओर से हर साल 75 हजार लोगों की सैंपलिंग की जाती है। किसी मरीज को एचआईवी की पुष्टि होते ही सबसे पहले उन्हें टीबी की स्क्रीनिंग के लिए भेजा जाता है।
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आईसीटीसी में मरीजों को टीबी जांच के लिए कैट वन का कोर्स कराया जाता है। इसके बाद जब मरीजों में सुधार आना शुरू हो जाता है तो उसके बाद उसे एआरटी सेंटर भेजा जाता है। जहां मरीजों की सीडी फाॅर और वायरल लोड की जांच की जाती है। यदि मरीज का सीडी फाॅर 350 से 250 के बीच मिलता है तो पीड़ित मरीज को टीबी और एआरटी की दवाई एक साथ खानी पड़ती है।
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2350 मरीज ले रहे दवा
सोनीपत में एआरटी सेंटर की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई। उस दौरान मात्र 500 मरीज दवाई ले रहे थे। अब मरीजों संख्या 2350 तक पहुंच गई है। समय-समय पर एचआईवी पीड़ित मरीजों की कांउसिलिंग की जाती है। इन सेंटरों पर गर्भवती, टीबी के मरीज, हाई रिस्क ग्रुप व स्वैच्छिक जांच कराने वाले लोगों की जानकारी गोपनीय रखी जाती है।
वर्जन
एड्स से बचाव के लिए वैक्सीन अब तक विकसित नहीं हुई है। एचआईवी संक्रमित की लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है। एचआईवी के संक्रमण को जीवनभर दवा खानी पड़ती है। लोगों को एड्स से बचाव के लिए समय-समय पर जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. तरुण यादव, उप सिविल सर्जन