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Rohtak News: 500 रुपये चोरी के मामले में आरोपी बरी
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रोहतक। जिला अदालत में 500 रुपये की चोरी का मुकदमा आठ साल तक चला। आठ सितंबर को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) मोहम्मद सगीर की अदालत ने आरोपी संपूर्ण सिंह को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के बयानों में विरोधाभास है। एफआईआर दर्ज कराते समय चोरी की रकम 50 हजार रुपये बताई गई थी, जबकि गवाही के दौरान इसे मात्र 500 रुपये बताया गया।
अदालत में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, शिवम एंक्लेव निवासी अमित वर्मा ने सिविल लाइन थाना पुलिस में 4 दिसंबर 2017 को एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में अमित ने आरोप लगाया था कि 24 से 27 अक्तूबर 2017 के बीच उनकी गैरमौजूदगी में जगदीश कॉलोनी स्थित मकान का ताला तोड़कर सामान और 50 हजार रुपये की नकदी चोरी कर ली गई। शिकायत में आरोपी संपूर्ण सिंह के साथ उसके बेटे और तीन-चार अन्य लोगों के भी वारदात में शामिल होने का आरोप लगाया गया था।
अदालत ने कहा कि शिकायत में घटना की सही तारीख तक दर्ज नहीं की गई थी और शिकायतकर्ता घटना के समय शहर से बाहर था। अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों को आठ साल के दौरान कई अवसर मिलने के बावजूद अदालत में पेश नहीं किया। जांच अधिकारी की भी गवाही नहीं कराई गई।
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अदालत ने एफआईआर दर्ज करने में करीब दो महीने की देरी को भी अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा करने वाला तथ्य माना। इन परिस्थितियों में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा। इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है।
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अदालत में दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, शिवम एंक्लेव निवासी अमित वर्मा ने सिविल लाइन थाना पुलिस में 4 दिसंबर 2017 को एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में अमित ने आरोप लगाया था कि 24 से 27 अक्तूबर 2017 के बीच उनकी गैरमौजूदगी में जगदीश कॉलोनी स्थित मकान का ताला तोड़कर सामान और 50 हजार रुपये की नकदी चोरी कर ली गई। शिकायत में आरोपी संपूर्ण सिंह के साथ उसके बेटे और तीन-चार अन्य लोगों के भी वारदात में शामिल होने का आरोप लगाया गया था।
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अदालत ने कहा कि शिकायत में घटना की सही तारीख तक दर्ज नहीं की गई थी और शिकायतकर्ता घटना के समय शहर से बाहर था। अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों को आठ साल के दौरान कई अवसर मिलने के बावजूद अदालत में पेश नहीं किया। जांच अधिकारी की भी गवाही नहीं कराई गई।
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अदालत ने एफआईआर दर्ज करने में करीब दो महीने की देरी को भी अभियोजन की कहानी पर संदेह पैदा करने वाला तथ्य माना। इन परिस्थितियों में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा। इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है।