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स्टेशन पर चार माह से वाटर वेंडिंग मशीन खराब, रोहतक से लेकर दिल्ली के अफसरों तक को नहीं जानकारी
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रोहतक रेलवे स्टेशन पर बंद पड़ी वाटर वेंडिंग मशीन।
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रोहतक। रेलवे स्टेशन पर हर रोज आने वाले हजारों यात्रियों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने को लगी वाटर वेंडिंग मशीन चार माह से बंद है। यात्रियों को 15 रुपये की पानी की बोतल खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है। हैरानी तो यह है कि स्टेशन अधीक्षक से लेकर उच्चाधिकारियों तक इसको लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं। इसका संचालन कराने वाली रेलवे की कंपनी आईआरसीटीसी के पीआरओ का कहना है कि मशीन चार माह से बंद है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। जल्द ही पता करके समस्या का निदान कराया जाएगा।
रेलवे के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार स्टेशन पर हर रोज 40-45 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। रेलवे की तरफ से पेयजल सप्लाई के लिए नल तो लगे हैं, लेकिन उनमें टंकी से पानी की सप्लाई होती है। टंकी के पानी की सप्लाई होने की वजह से अधिकांश यात्री पीने से परहेज करते हैं। मजबूरन यात्रियों को 15 रुपये की पानी की बोतल खरीदकर प्यास बुझानी पड़ती है। यात्रियों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए रेलवे की कंपनी आईआरसीटीसी ने प्लेटफार्म नंबर एक और प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर वाटर वेंडिंग मशीन लगवाई थी। इस मशीन के माध्यम से यात्री तीन रुपये में आधा लीटर और पांच रुपये में एक लीटर शुद्ध आरओ प्लांट से फिल्टर पानी लेकर प्यास बुझाते थे। यही नहीं, लंबी यात्रा पर जाने वाले यात्री पानी की बड़ी बोतलें भी इससे भरते थे। यानी 15 रुपये में यात्रियों को तीन लीटर शुद्ध पेयजल मिलता था। करीब चाह माह से ये मशीनें बंद पड़ी हुई हैं। लाखों रुपये कीमत की मशीनें धूल फांक रही हैं। वहीं, यात्रियों को मजबूरन प्यास बुझाने के लिए बोतल खरीदनी पड़ रही है। वहीं, रेलवे स्टेशन अधीक्षक से लेकर दिल्ली में बैठे उच्चाधिकारियों तक के पास वाटर वेंडिंग मशीन चार माह से बंद होने के बाबत कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। अफसर एक-दूसरे से स्थिति स्पष्ट करने की बात टाल रहे हैं।
अधिकारी बोले - पता लगाएंगे
स्टेशन अधीक्षक यशपाल मीणा का कहना है कि वाटर वेंडिंग मशीन के बारे में वह कुछ नहीं बता सकते। इसके बारे में सीएमआई ही बता सकते हैं। डीआरएम के पीआरओ माइकल का कहना है कि मशीन बंद होने की कोई जानकारी नहीं है और सही जवाब आईआरसीटीसी के अफसर बता सकते हैं। आईआरसीटीसी के पीआरओ सिद्धार्थ ने बताया कि अभी तक किसी ने नहीं बताया कि रोहतक स्टेशन पर लगी वाटर वेंडिंग मशीनें बंद हैं। जल्द पता लगाएंगे कि आखिर क्यों और किस वजह से मशीनें बंद हैं।
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रेलवे के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार स्टेशन पर हर रोज 40-45 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। रेलवे की तरफ से पेयजल सप्लाई के लिए नल तो लगे हैं, लेकिन उनमें टंकी से पानी की सप्लाई होती है। टंकी के पानी की सप्लाई होने की वजह से अधिकांश यात्री पीने से परहेज करते हैं। मजबूरन यात्रियों को 15 रुपये की पानी की बोतल खरीदकर प्यास बुझानी पड़ती है। यात्रियों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए रेलवे की कंपनी आईआरसीटीसी ने प्लेटफार्म नंबर एक और प्लेटफार्म नंबर दो-तीन पर वाटर वेंडिंग मशीन लगवाई थी। इस मशीन के माध्यम से यात्री तीन रुपये में आधा लीटर और पांच रुपये में एक लीटर शुद्ध आरओ प्लांट से फिल्टर पानी लेकर प्यास बुझाते थे। यही नहीं, लंबी यात्रा पर जाने वाले यात्री पानी की बड़ी बोतलें भी इससे भरते थे। यानी 15 रुपये में यात्रियों को तीन लीटर शुद्ध पेयजल मिलता था। करीब चाह माह से ये मशीनें बंद पड़ी हुई हैं। लाखों रुपये कीमत की मशीनें धूल फांक रही हैं। वहीं, यात्रियों को मजबूरन प्यास बुझाने के लिए बोतल खरीदनी पड़ रही है। वहीं, रेलवे स्टेशन अधीक्षक से लेकर दिल्ली में बैठे उच्चाधिकारियों तक के पास वाटर वेंडिंग मशीन चार माह से बंद होने के बाबत कोई संतोषजनक जवाब नहीं है। अफसर एक-दूसरे से स्थिति स्पष्ट करने की बात टाल रहे हैं।
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अधिकारी बोले - पता लगाएंगे
स्टेशन अधीक्षक यशपाल मीणा का कहना है कि वाटर वेंडिंग मशीन के बारे में वह कुछ नहीं बता सकते। इसके बारे में सीएमआई ही बता सकते हैं। डीआरएम के पीआरओ माइकल का कहना है कि मशीन बंद होने की कोई जानकारी नहीं है और सही जवाब आईआरसीटीसी के अफसर बता सकते हैं। आईआरसीटीसी के पीआरओ सिद्धार्थ ने बताया कि अभी तक किसी ने नहीं बताया कि रोहतक स्टेशन पर लगी वाटर वेंडिंग मशीनें बंद हैं। जल्द पता लगाएंगे कि आखिर क्यों और किस वजह से मशीनें बंद हैं।
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