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पानी की सैंपलिंग पर स्वास्थ्य और जन स्वास्थ्य विभाग भिड़े
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 19 Jun 2016 02:09 AM IST
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पेयजल की सैंपलिंग
- फोटो : Demo pic
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स्वास्थ्य और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग पेयजल के सैंपलों की रिपोर्ट को लेकर आमने-सामने हैं। दोनों विभाग एक दूसरे को गलत और खुद को सही ठहराने में जुटे हैं। ऐसे में पेयजल की जांच रिपोर्ट पर असमंजस की स्थिति बन गई है। आमजन के लिए सवाल बना हुआ है कि वे आखिर किसकी रिपोर्ट पर यकीन करें।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का कहना है कि अपने सप्लाई के पानी की जांच खुद करता है। इसकी रिपोर्ट विभाग को दी जाती है, जहां समस्या होती है उसे सही कराया जाता है। जबकि स्वास्थ्य विभाग भी जांच के लिए सप्लाई के पानी के सैंपल भरता है। इसमें से कई सैंपल फैल हो जाते हैं। ऐसे मामलों की बड़ी संख्या जिला उपायुक्त के माध्यम से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कार्यालय पहुंचती है, लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं की जाती है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग इस रिपोर्ट को तरजीह नहीं देता है। उसका कहना है कि जब वह खुद अपने पानी के सैंपल लेकर जांच करता है तो उसे किसी और विभाग की जांच रिपोर्ट की जरूरत नहीं है।
हमारे यहां महीने में 300 से अधिक पानी के सैंपलों की जांच की जाती है। हमारी तुलना में अधिकतर रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग की फेल होती है। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वे हमारे साथ पानी का सैंपल भरें। जहां से स्वास्थ्य विभाग सैंपल भरता है, वहां पर उनका रिकार्ड होना चाहिए। हमें यह भी जानकारी होनी चाहिए कि स्वास्थ्य विभाग कब, किस जगह से सैंपल लेकर गया। हम पानी को क्लोरिन, फिटकरी और ब्लीचिंग पाउडर से बैक्टीरिया मुक्त करते हैं।
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- सोनिया, केमिस्ट, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग
सौ से 200 पेयजल सैंपल की जांच हम हर माह करते हैं। सैंपल हम कहीं से भी भर सकते हैं। हमारी जांच का अलग तरीका है और लैब भी अलग है। हम पानी में वॉयरस और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग पानी में रसायनिक पदार्थों की जांच करता है। उनकी जांच एलटी करता है और हमारे यहां माइक्रोबायोलोजी विभाग के मैथोलोजिस्ट बैक्टीरिया की जांच करते हैं। हम अपनी जांच रिपोर्ट प्रशासन के माध्यम से भेजते हैं, इस पर अगली कार्रवाई उनकी बनती है।
- मंजीत सिंह नैन, हेल्थ निरीक्षक, स्वास्थ्य विभाग
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जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग का कहना है कि अपने सप्लाई के पानी की जांच खुद करता है। इसकी रिपोर्ट विभाग को दी जाती है, जहां समस्या होती है उसे सही कराया जाता है। जबकि स्वास्थ्य विभाग भी जांच के लिए सप्लाई के पानी के सैंपल भरता है। इसमें से कई सैंपल फैल हो जाते हैं। ऐसे मामलों की बड़ी संख्या जिला उपायुक्त के माध्यम से जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कार्यालय पहुंचती है, लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं की जाती है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग इस रिपोर्ट को तरजीह नहीं देता है। उसका कहना है कि जब वह खुद अपने पानी के सैंपल लेकर जांच करता है तो उसे किसी और विभाग की जांच रिपोर्ट की जरूरत नहीं है।
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हमारे यहां महीने में 300 से अधिक पानी के सैंपलों की जांच की जाती है। हमारी तुलना में अधिकतर रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग की फेल होती है। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वे हमारे साथ पानी का सैंपल भरें। जहां से स्वास्थ्य विभाग सैंपल भरता है, वहां पर उनका रिकार्ड होना चाहिए। हमें यह भी जानकारी होनी चाहिए कि स्वास्थ्य विभाग कब, किस जगह से सैंपल लेकर गया। हम पानी को क्लोरिन, फिटकरी और ब्लीचिंग पाउडर से बैक्टीरिया मुक्त करते हैं।
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- सोनिया, केमिस्ट, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग
सौ से 200 पेयजल सैंपल की जांच हम हर माह करते हैं। सैंपल हम कहीं से भी भर सकते हैं। हमारी जांच का अलग तरीका है और लैब भी अलग है। हम पानी में वॉयरस और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग पानी में रसायनिक पदार्थों की जांच करता है। उनकी जांच एलटी करता है और हमारे यहां माइक्रोबायोलोजी विभाग के मैथोलोजिस्ट बैक्टीरिया की जांच करते हैं। हम अपनी जांच रिपोर्ट प्रशासन के माध्यम से भेजते हैं, इस पर अगली कार्रवाई उनकी बनती है।
- मंजीत सिंह नैन, हेल्थ निरीक्षक, स्वास्थ्य विभाग