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नहीं रहे 1971 युद्ध के नायक इंदर सिंह: पाक की पनडुब्बी को डुबोने पर मिला था वीर चक्र, रोहतक में ली अंतिम सांस

Mon, 09 Oct 2023 11:26 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 09 Oct 2023 11:26 PM IST
सार

कमांडर इंदर सिंह ने 52 साल पहले अपने शौर्य का प्रदर्शन करके इतिहास रचा था। 1971 युद्ध के हीरो कमांडर इंदर सिंह के शौर्य पर देश आज भी गौरवान्वित होता है। 99 वर्षीय वीर चक्र विजेता कमांडर इंदर सिंह पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे।

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Vir Chakra Commander Inder Singh passed away in Rohtak of Haryana
वीर चक्र विजेता कमांडर इंद्र सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत-पाक के 1971 युद्ध में अपना कौशल दिखाते हुए पाक की पनडुब्बी, गाजी को डुबोने वाले कमांडर इंदर सिंह का सोमवार को निधन हो गया। वे 99 वर्ष के थे। मंगलवार दोपहर 12 बजे शीला बाईपासस स्थित रामबाग श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। पूर्व सैनिक संघ ने 1971 युद्ध के हीरो के जाने को बड़ी क्षति करार दिया है।

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पूर्व सैनिक संघ के प्रवक्ता कैप्टन जगवीर मलिक ने बताया कि हमारे विमान वाहक युद्धपोत विक्रांत को डुबोने के लिए निकली पाक की पनडुब्बी गाजी को आईएनएस राजपूत जहाज पर बतौर कमांडर तैनात इंदर सिंह ने समुद्र की गहराइयों में दफना दिया था। इस शौर्य के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने करीब 52 साल पहले अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हुए इतिहास रचा था। वर्तमान में भी उनकी यह उपलब्धि देश के लिए विरासत समान है।
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झंग कॉलोनी निवासी 99 वर्षीय वीर चक्र विजेता कमांडर इंदर सिंह पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। वे अपने घर पर ही रहते थे। परिजनों ने उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उनका बाहरी लोगों से मिलना वर्जित किया हुआ था। परिवार उनकी देखभाल कर रहा था। सोमवार को उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।
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वर्षा के देवता इंद्र के नाम पर हुआ नामकरण
कमांडर इंदर सिंह किसान परिवार से संबंध रखते थे। इनका जन्म किसान चौधरी जागे राम के बेटे रतिराम के घर पर 4 अक्तूबर 1924 को हुआ। इस दिन कई दिनों के बाद वर्षा हुई थी। इसलिए परिजनों ने इनका नाम वर्षा के देव इंद्र के नाम पर इंदर सिंह रखा। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। पढ़ाई में अच्छे अंक लाने के चलते अध्यापक एवं परिजन उन्हें पसंद करते थे। खेलों में भी उसकी रुचि थी। आठवीं की परीक्षा पास करने के बाद इन्हें उच्च शिक्षा के लिए जाट स्कूल सोनीपत में दाखिल दिलाया गया। यहां से दसवीं पास की।


नेवी में भर्ती के साथ ही युद्ध में लिया हिस्सा
जून 1944 में जब दूसरा महायुद्ध अपनी चरम सीमा पर था, उस समय नौजवान इंदर सिंह रॉयल इंडियन नेवी में नाविक के रूप में भर्ती हो गए। प्रशिक्षण समाप्ति के बाद इन्होंने पूर्वी सेक्टर में युद्ध में भाग लिया। 15 अगस्त 1947 को भारतवर्ष की स्वतंत्रता के साथ ही रॉयल भारतीय नौसेना का नाम भारतीय नौसेना हो गया। अपनी प्रतिभा के बल पर इन्होंने 1957 में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया। 1961 में गोवा मुक्ति ऑपरेशन में गोवा को मुक्त कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। 1965 के भारत-पाक युद्ध में इनकी नियुक्ति सुरक्षा के लिए पूर्वी सेक्टर में रही।

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