महम। आज के जमाने में जहां कुछ लोग गंदे नाले में गोबर बहा रहे हैं,यहां तक कि कुछ भी हो नाले में डालने के कारण नाले अवरुद्ध हो रहे हैं। वहीं शहर से सटे गांव किशनगढ़ के ग्रामीणों ने खुद अपने हाथों से नाले का निर्माण कर एक अलग ही मिसाल पेश की है। ग्रामीण, देवेंद्र, सुरेंद्र , प्रदीप, रघुवीर, अजीत , चांद, राजू,विजय, सहीराम आदि ने बताया कि जलभरत तालाब की ओर जाने वाले पानी की निकासी के लिए लगभग सौ फुट तक नाला नहीं था। इसलिए पानी की निकासी नहीं हो पाती थी। कई बार पंचायत से इस बारे में आग्रह किया लेकिन कोई समाधान नहीं हो सका आखिर में आस पास के युवकों ने एकत्रित होकर नाला बनाने की योजना बनाई तथा शर्त यह रही कि सभी लोग खुद आकर काम पर लगेंगे। रविवार को नाले की खुदाई करने के बाद सोमवार सुबह नाला निर्माण का कार्य शुरू किया गया। कुछ युवकों ने मिस्त्री का काम किया तो बाकि बचे युवकों ने मजदूर का काम संभाला । इतना ही नहीं सभी ने मिलकर शपथ ली है कि भविष्य में किसी भी परिवार का सदस्य नाले में पॉलिथीन व अन्य रुकावट का सामान नहीं फैंकेगा। नाला बनाने का कार्य एक दो दिन में पूरा कर लिया जाएगा। बताया कि बरसात का मौसम नजदीक है अगर नाला नहीं बनता तो पूरे मोहल्ले के लिए यह परेशानी हो सकती थी। बरसात शुरू होने के बाद ऐसा संभव नहीं था। इस बारे में गांव के सरपंच प्रतिनिधी संदीप दहिया का कहना है कि ग्रामीण समस्या लेकर उनके पास आए थे। उन्होंने पंचायत से ईंट , सीमेंट व अन्य निर्माण सामग्री उपलब्ध करवा दी है। हाथों हाथ मिस्त्री व मजदूर न मिलने के कारण ऊपर से बरसात के मौसम को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद काम कर मिसाल पेश की है। जो काबिले तारीफ भी है। उनसे ही प्रेरणा लेते हुए अन्य ग्रामीणों को भी एकता का परिचय देते हुए सामाजिक कार्यों में सहयोग करना चाहिए। कहा कि गावं में सय रोड पर बने नाले में कुछ ग्रामीण गोबर बहा रहे हैं जिससे नाला बंद हो जाता है। उन्होंने इनसे सीख लेकर गाेबर बहाना बंद करना चाहिए।