{"_id":"6a23441f9d52da8ca304f814","slug":"uhsrs-examination-branch-under-scrutiny-again-bds-students-fail-in-april-pass-in-may-rohtak-news-c-17-roh1020-867617-2026-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: यूएचएसआर की परीक्षा शाखा फिर सवालों के घेरे में, बीडीएस के विद्यार्थी अप्रैल में फेल मई में पास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: यूएचएसआर की परीक्षा शाखा फिर सवालों के घेरे में, बीडीएस के विद्यार्थी अप्रैल में फेल मई में पास
विज्ञापन
विकास सैनी
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएसआर) की परीक्षा शाखा फिर सवालों में घिर गई है। इस बार मामला बीडीएस अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों का है। विवि की ओर से छह अप्रैल को जारी परीक्षा परिणाम में फेल हुए 23 विद्यार्थी 26 मई को दोबारा जारी परिणाम में पास हो गए।
50 से अधिक विद्यार्थियों के अधिकतम 20 तक अंक बढ़े हैं। उत्तर पुस्तिकाओं की पुन: जांच में यह कारनामा होने का अंदेशा है। विवि की परीक्षा शाखा की लापरवाही के चलते कई विद्यार्थी पीजी में प्रवेश लेने से भी वंचित रह गए हैं।
डेंटल कॉलेजों के वर्ष 2021 बैच के विद्यार्थियों ने कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल को शिकायत दी थी। ई-मेल के जरिए भेजी शिकायत में 19 जनवरी 2026 को हुई ओरल सर्जरी विषय की परीक्षा का मुद्दा उठाया है। कहा है कि विद्यार्थियों को बड़े सवालों के समान अंक मिले हैं। छोटे सवालों के भी सभी को समान रूप से अंक दिए गए हैं।
विज्ञापन
संतुष्टिदायक जवाब देने के बावजूद परिणाम खराब रहा। मई में दोबारा जारी परिणाम में अप्रैल में फेल हुए विद्यार्थी पास हो गए। कॉलेज के 50 से अधिक विद्यार्थियों के 20 तक अंक भी बढ़ गए। इससे छात्र ही नहीं बल्कि अभिभावकों व शिक्षाविद भी हैरान हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं में त्रुटियां पाई गईं तो मूल मूल्यांकन प्रक्रिया कितनी विश्वसनीय रही।
-- -- -- -- -- -
उत्तर पुस्तिकाओं की पुन: जांच का अंदेशा
विवि में वर्षों से केवल री-टोटलिंग (अंकों की पुनर्गणना) की व्यवस्था रही है। छात्रों को उत्तर पुस्तिका के वास्तविक मूल्यांकन की समीक्षा का अवसर नहीं मिलता था। पहली बार विवि में पुनः उत्तर पुस्तिका जांचने का अंदेशा जताया गया है। इसकी वजह पुनर्गणना में विद्यार्थियों के इतने अधिक अंक बढ़ना नामुमकिन बताया गया है। इसमें ऐसे तथ्य उजागर हुए जिन्होंने पूरे परीक्षा तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। ऐसे में पिछले वर्षों के परिणाम भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि विवि की पुनः जांच का निर्णय स्वागत योग्य है। इसके साथ ही मूल मूल्यांकन में हुईं गंभीर त्रुटियों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान सार्वजनिक कर उनकी जवाबदेही तय की जाए।
-- -- -- -- -- -
ये हैं विद्यार्थियों व अभिभावकों की मुख्य मांगें
- पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- जिन उत्तर पुस्तिकाओं में बड़े पैमाने पर अंक बढ़े हैं, उनकी विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- मूल्यांकन प्रक्रिया में हुईं त्रुटियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं परीक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पारदर्शी पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था लागू की जाए।
- सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छात्रों को निष्पक्ष पुनर्मूल्यांकन का अधिकार दिया जाए।
-- -- -- -- -- -
डेंटल कॉलेज के दो परीक्षकों को कारण बताओ नोटिस, सात दिन में मांगा जवाब
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने डेंटल कॉलेज के ओरल सर्जरी विभाग के दो परीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। दोनों से सात दिन में जवाब मांगा है कि उन्हें पेपर जांचने, परीक्षा से संबंधित अन्य कार्यों से हटाने व यूएचएस ऑर्डिनेंस के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।
-- -- -
वर्जन
पेपर को लेकर शिकायत मिली थी। इसके बाद दोबारा से दो एग्जामिनर ने पेपर की जांच की। इसमें कुछ कमियां नजर आईं। गड़बड़ी की जांच की जा रही है। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. एचके अग्रवाल, कुलपति, स्वास्थ्य विज्ञान विवि
-- -- -- -- -- --
विज्ञापन
रोहतक। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएचएसआर) की परीक्षा शाखा फिर सवालों में घिर गई है। इस बार मामला बीडीएस अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों का है। विवि की ओर से छह अप्रैल को जारी परीक्षा परिणाम में फेल हुए 23 विद्यार्थी 26 मई को दोबारा जारी परिणाम में पास हो गए।
50 से अधिक विद्यार्थियों के अधिकतम 20 तक अंक बढ़े हैं। उत्तर पुस्तिकाओं की पुन: जांच में यह कारनामा होने का अंदेशा है। विवि की परीक्षा शाखा की लापरवाही के चलते कई विद्यार्थी पीजी में प्रवेश लेने से भी वंचित रह गए हैं।
विज्ञापन
डेंटल कॉलेजों के वर्ष 2021 बैच के विद्यार्थियों ने कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल को शिकायत दी थी। ई-मेल के जरिए भेजी शिकायत में 19 जनवरी 2026 को हुई ओरल सर्जरी विषय की परीक्षा का मुद्दा उठाया है। कहा है कि विद्यार्थियों को बड़े सवालों के समान अंक मिले हैं। छोटे सवालों के भी सभी को समान रूप से अंक दिए गए हैं।
विज्ञापन
संतुष्टिदायक जवाब देने के बावजूद परिणाम खराब रहा। मई में दोबारा जारी परिणाम में अप्रैल में फेल हुए विद्यार्थी पास हो गए। कॉलेज के 50 से अधिक विद्यार्थियों के 20 तक अंक भी बढ़ गए। इससे छात्र ही नहीं बल्कि अभिभावकों व शिक्षाविद भी हैरान हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं में त्रुटियां पाई गईं तो मूल मूल्यांकन प्रक्रिया कितनी विश्वसनीय रही।
उत्तर पुस्तिकाओं की पुन: जांच का अंदेशा
विवि में वर्षों से केवल री-टोटलिंग (अंकों की पुनर्गणना) की व्यवस्था रही है। छात्रों को उत्तर पुस्तिका के वास्तविक मूल्यांकन की समीक्षा का अवसर नहीं मिलता था। पहली बार विवि में पुनः उत्तर पुस्तिका जांचने का अंदेशा जताया गया है। इसकी वजह पुनर्गणना में विद्यार्थियों के इतने अधिक अंक बढ़ना नामुमकिन बताया गया है। इसमें ऐसे तथ्य उजागर हुए जिन्होंने पूरे परीक्षा तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। ऐसे में पिछले वर्षों के परिणाम भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि विवि की पुनः जांच का निर्णय स्वागत योग्य है। इसके साथ ही मूल मूल्यांकन में हुईं गंभीर त्रुटियों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान सार्वजनिक कर उनकी जवाबदेही तय की जाए।
ये हैं विद्यार्थियों व अभिभावकों की मुख्य मांगें
- पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- जिन उत्तर पुस्तिकाओं में बड़े पैमाने पर अंक बढ़े हैं, उनकी विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- मूल्यांकन प्रक्रिया में हुईं त्रुटियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं परीक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पारदर्शी पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था लागू की जाए।
- सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छात्रों को निष्पक्ष पुनर्मूल्यांकन का अधिकार दिया जाए।
डेंटल कॉलेज के दो परीक्षकों को कारण बताओ नोटिस, सात दिन में मांगा जवाब
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने डेंटल कॉलेज के ओरल सर्जरी विभाग के दो परीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। दोनों से सात दिन में जवाब मांगा है कि उन्हें पेपर जांचने, परीक्षा से संबंधित अन्य कार्यों से हटाने व यूएचएस ऑर्डिनेंस के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।
वर्जन
पेपर को लेकर शिकायत मिली थी। इसके बाद दोबारा से दो एग्जामिनर ने पेपर की जांच की। इसमें कुछ कमियां नजर आईं। गड़बड़ी की जांच की जा रही है। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. एचके अग्रवाल, कुलपति, स्वास्थ्य विज्ञान विवि