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Rohtak News: कैंटीन चलाने जो पहले देते थे ताने अब करते हैं सहयोग
Tue, 25 Nov 2025 12:52 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 25 Nov 2025 12:52 AM IST
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रोहतक । कैंटीन कारोबार में पुरुषों का ही एकाधिकार माना जाता है लेकिन रोहतक की 10 महिलाएं इस मिथक को तोड़कर कैंटीन संभाल रही हैं। जिले के निंगाना, पटवापुर व आंवल सहित तीन गांवों की 10 से 30 किलोमीटर की दूरी तय कर ये महिलाएं शहर में कैंटीन चला रही हैं। सभी महिलाएं अलग अलग स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं बताती हैं कि पहले परिजन उनको ताने भी देते थे लेकिन अब सहयोग कर रहे हैं।
नारी का गौरव महिला ब्लॉक संगठन कलानौर की ये सभी महिलाएं नई अनाज मंडी परिसर में अटल किसान मजदूर कैंटीन का संचालन कर रही हैं। नौवीं कक्षा तक पढ़ी निंगाना गांव निवासी रितु बताती हैं कि कैंटीन में रोटी-सब्जी से लेकर साफ-सफाई तक सभी कार्य बांटे गए हैं।
उनके अलावा सुदेश, सुनीता, निर्मला, कविता व अनुबाला भी यहां इसी गांव से आती हैं जबकि पटवापुर से आशा, कविता व मुगली और आंवल से प्रमिला यहां कैंटीन संचालक में भागीदारी निभा रही हैं।
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2021 से कैंटीन चला रही इन महिलाओं का कहना है कि अब इसे रेगुलर कर दिया है। इसमें 10 रुपये में खाना दिया जा रहा है। सरकार की ओर से भी उनको प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। कैंटीन में रोजाना 200 से अधिक लोग खाना खाने आते हैं। इससे वे सभी महिलाएं 8-10 हजार रुपये प्रति माह आमदनी कर रही हैं। वे बताती हैं कि कैंटीन संचालन कर अब तो उन्हें प्रबंधन करना आ गया है।
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नारी का गौरव महिला ब्लॉक संगठन कलानौर की ये सभी महिलाएं नई अनाज मंडी परिसर में अटल किसान मजदूर कैंटीन का संचालन कर रही हैं। नौवीं कक्षा तक पढ़ी निंगाना गांव निवासी रितु बताती हैं कि कैंटीन में रोटी-सब्जी से लेकर साफ-सफाई तक सभी कार्य बांटे गए हैं।
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उनके अलावा सुदेश, सुनीता, निर्मला, कविता व अनुबाला भी यहां इसी गांव से आती हैं जबकि पटवापुर से आशा, कविता व मुगली और आंवल से प्रमिला यहां कैंटीन संचालक में भागीदारी निभा रही हैं।
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2021 से कैंटीन चला रही इन महिलाओं का कहना है कि अब इसे रेगुलर कर दिया है। इसमें 10 रुपये में खाना दिया जा रहा है। सरकार की ओर से भी उनको प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। कैंटीन में रोजाना 200 से अधिक लोग खाना खाने आते हैं। इससे वे सभी महिलाएं 8-10 हजार रुपये प्रति माह आमदनी कर रही हैं। वे बताती हैं कि कैंटीन संचालन कर अब तो उन्हें प्रबंधन करना आ गया है।