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सिविल अस्पताल में अक्तूबर में नहीं होगी सर्जरी
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चिकित्सकों के लिए बनाया जा रहा स्पेशलिस्ट कैडर मरीजों पर भारी पड़ सकता है। इसके तहत सेवानिवृत्त चिकित्सकों को नए सिरे से शुरू की गई नियुक्ति देने की प्रक्रिया स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करेगी। इससे सिविल अस्पताल में अक्तूबर महीने में सर्जरी नहीं होगी। इसकी वजह सर्जन की नई सिरे से नियुक्ति में लगने वाला समय बताया जा रहा है। सरकार अक्तूबर में सेवानिवृत्त चिकित्सकों को पुन: नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
दरअसल, सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों का स्पेशलिस्ट कैडर बनाने की योजना बनाई है। इसके तहत सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे अनुबंधित चिकित्सकों को 30 सितंबर तक ही सेवाओं में रखने का फैसला लिया गया है। इसके बाद इन्हें दोबारा से नियुक्ति दी जाएगी। इस प्रक्रिया में करीब एक महीने का समय लग सकता है। इससे अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी हो जाएगी। सिविल अस्पताल की बात करें तो यहां पांच चिकित्सक कम हो जाएंगे। इसमें फिजिशियन, हड्डी, एसपीएम, नेत्र रोग व सर्जरी के चिकित्सक शामिल हैं। इससे ओपीडी के दूसरे चिकित्सकों पर वर्कलोड बढ़ जाएगा। सिविल अस्पताल में फिलहाल एक ही सर्जन है। वह भी अनुबंध पर है। इनकी ओपीडी औसतन 80 मरीजों की होती है। इसके अलावा ओटी के दिन करीब आठ सर्जरी भी होती हैं। ऐसे में सर्जरी के मरीजों का दर्द बढ़ना तय है। इसके अलावा किलोई, चिड़ी व महम में भी एक-एक चिकित्सक कम हो जाएगा।
आवेदन के साथ मांगी गई है तीन पसंद
नए सिरे से आवेदन में चिकित्सकों से उनकी पसंद के तीन केंद्रों के नाम भी मांगे गए हैं। इन पसंदीदा जगह पर संबंधित चिकित्सक का पद रिक्त होने पर ही उन्हें वहां नियुक्ति दी जाएगी। जबकि पद नहीं होने पर उन्हें प्रदेश में कहीं भी नियुक्ति दी जा सकती है। इस संबंध में पत्र जारी हो गया है।
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पीजीआई पर बढ़ेगा वर्कलोड
जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास चिकित्सकों की कमी पीजीआई पर वर्कलोड बढ़ाएगी। सिविल अस्पताल में मरीजों को इलाज नहीं मिलने पर वे पीजीआई का रुख करेंगे। इससे यहां की ओपीडी व ओटी पर आने वाले एक महीने वर्कलोड बना रहेगा।
चिकित्सकों को 30 सितंबर तक सेवा में रहने का समय दिया गया है। इनकी नए सिरे से नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। ज्यादातर ने अपनी पसंद के केंद्र भी बता दिए हैं। यह सरकार का फैसला है। मरीजों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। विभाग के पास पर्याप्त चिकित्सक उपलब्ध हैं।
- डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन
सरकार का चिकित्सकों को हटाने का फैसला गलत है। चिकित्सकों की आयु सीमा 65 वर्ष की थी। डॉक्टरों को सात वर्ष आयु सीमा बढ़ाकर नियुक्ति दी गई थी। अब अचानक से उन्हें हटाया जा रहा है। यह गलत है। अस्पतालों में पहले ही चिकित्सक कम हैं। इस मामले में डॉक्टरों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हमने भी सरकार को अपनी मांग भेजी है।
- डॉ. जसबीर परमार, अध्यक्ष, एचसीएमएस एसोसिएशन
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दरअसल, सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों का स्पेशलिस्ट कैडर बनाने की योजना बनाई है। इसके तहत सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे अनुबंधित चिकित्सकों को 30 सितंबर तक ही सेवाओं में रखने का फैसला लिया गया है। इसके बाद इन्हें दोबारा से नियुक्ति दी जाएगी। इस प्रक्रिया में करीब एक महीने का समय लग सकता है। इससे अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी हो जाएगी। सिविल अस्पताल की बात करें तो यहां पांच चिकित्सक कम हो जाएंगे। इसमें फिजिशियन, हड्डी, एसपीएम, नेत्र रोग व सर्जरी के चिकित्सक शामिल हैं। इससे ओपीडी के दूसरे चिकित्सकों पर वर्कलोड बढ़ जाएगा। सिविल अस्पताल में फिलहाल एक ही सर्जन है। वह भी अनुबंध पर है। इनकी ओपीडी औसतन 80 मरीजों की होती है। इसके अलावा ओटी के दिन करीब आठ सर्जरी भी होती हैं। ऐसे में सर्जरी के मरीजों का दर्द बढ़ना तय है। इसके अलावा किलोई, चिड़ी व महम में भी एक-एक चिकित्सक कम हो जाएगा।
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आवेदन के साथ मांगी गई है तीन पसंद
नए सिरे से आवेदन में चिकित्सकों से उनकी पसंद के तीन केंद्रों के नाम भी मांगे गए हैं। इन पसंदीदा जगह पर संबंधित चिकित्सक का पद रिक्त होने पर ही उन्हें वहां नियुक्ति दी जाएगी। जबकि पद नहीं होने पर उन्हें प्रदेश में कहीं भी नियुक्ति दी जा सकती है। इस संबंध में पत्र जारी हो गया है।
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पीजीआई पर बढ़ेगा वर्कलोड
जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास चिकित्सकों की कमी पीजीआई पर वर्कलोड बढ़ाएगी। सिविल अस्पताल में मरीजों को इलाज नहीं मिलने पर वे पीजीआई का रुख करेंगे। इससे यहां की ओपीडी व ओटी पर आने वाले एक महीने वर्कलोड बना रहेगा।
चिकित्सकों को 30 सितंबर तक सेवा में रहने का समय दिया गया है। इनकी नए सिरे से नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। ज्यादातर ने अपनी पसंद के केंद्र भी बता दिए हैं। यह सरकार का फैसला है। मरीजों को दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। विभाग के पास पर्याप्त चिकित्सक उपलब्ध हैं।
- डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन
सरकार का चिकित्सकों को हटाने का फैसला गलत है। चिकित्सकों की आयु सीमा 65 वर्ष की थी। डॉक्टरों को सात वर्ष आयु सीमा बढ़ाकर नियुक्ति दी गई थी। अब अचानक से उन्हें हटाया जा रहा है। यह गलत है। अस्पतालों में पहले ही चिकित्सक कम हैं। इस मामले में डॉक्टरों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हमने भी सरकार को अपनी मांग भेजी है।
- डॉ. जसबीर परमार, अध्यक्ष, एचसीएमएस एसोसिएशन