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Rohtak News: शहर में 10 हजार से अधिक लावारिस कुत्ते, 4 साल से नहीं लगी लगाम

Tue, 12 Aug 2025 11:59 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 12 Aug 2025 11:59 PM IST
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There are more than 10 thousand stray dogs in the city, no control has been done for 4 years
रेवाड़ी। लंबे समय से लावारिस कुत्तों के आतंक से परेशान शहरवासियों को अब राहत मिलने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान लावारिस कुत्तों की समस्या को बेहद गंभीर करार दिया है। ऐसे में एनसीआर जिलों के निकायों को 8 सप्ताह में इसके समाधान के निर्देश दिए गए हैं।
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लावारिस कुत्तों को सड़कों से हटाकर आश्रय घरों में रखने को कहा गया है। साथ ही एक सप्ताह में हेल्पलाइन नंबर जारी करने को भी कहा है। रेवाड़ी जिला एनसीआर क्षेत्र में आता है। यहां पिछले चार साल से लावारिस कुत्तों की नसबंदी ओर टीकाकरण के लिए कोई भी कदम नहीं उठाए गए हैं।
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कई बार हाउस की मीटिंग में भी इसका मुद्दा उठा, मगर बात हवा हवाई ही रह गई। शहर में 10 हजार से अधिक लावारिस कुत्ते घूम रहे हैं। अभी स्थिति इस प्रकार की है कि अगर रात के समय में कोई पैदल गुजरे तो कुत्ते के झुंड हमला भी कर सकते हैं। सेक्टर में भी स्थिति इसी प्रकार की है। लोग रात के समय घर से निकलना महफूज नहीं समझते हैं। डर रहता है कि कहीं कुत्ते झुंड बनाकर हमला न कर दे। लोग डर के साए में जीने को मजबूर है।
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कुत्तों के काटने के 6 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके

जनवरी से लेकर अभी तक कुत्तों के काटने के से 6 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। जिले में रोजाना 50 से 60 कुत्तों के काटने के मामले सामने आते हैं। इनमें 30 से 40 मामले तो अकेले सिविल अस्पताल के हैं। बाकी ग्रामीण क्षेत्र के मामले इससे ज्यादा हो सकते हैं। कई लोग इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल व क्लीनिक की ओर रुख करते हैं, ऐसे में कुत्तों के काटने की संख्या काफी अधिक है। कुत्तों के काटने से रेबीज नामक बीमारी होती है, जो काफी जानलेवा होती है।

4 साल से नहीं हो पाई कुत्तों की नसबंदी

नगर परिषद की तरफ से 4 साल पहले कुत्तों की नसबंदी को लेकर प्रयास किए गए थे। वह कार्य कुछ समय तक चला, मगर फिर ठंडे बस्ते में चला गया। तब से लेकर अभी तक कोई भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। परेशान लोगों ने कई बार नगर परिषद को शिकायत भी की है। पार्षद भी कई बार मीटिंग में इसका मुद्दा उठा चुके हैं। विधायक लक्ष्मण सिंह यादव भी मीटिंग लेते वक्त लावारिस कुत्तों को लेकर योजना बनाने के लिए आदेश दे चुके हैं मगर फिर भी अभी तक कुछ भी नहीं हो पाया है। नगर परिषद का कार्यकाल जनवरी तक है, ऐसे में अब समय भी काफी कम बचा है।


नगर परिषद के ध्यान न देने से शहर कुत्तों का बना हिट स्पॉट


4 साल से कुत्तों की नसबंदी को लेकर नगर परिषद की तरफ से कोई कदम नहीं उठाना भी काफी हैरान कर देने वाला है। नगर परिषद के अधिकारियों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि इन चार सालों में कुत्तों की संख्या काफी बढ़ सकती है जो बाद में नगर परिषद के लिए ही परेशानी का सबब बन सकते हैं। अगर भविष्य में कुत्तों की नसबंदी या उन्हें पकड़कर आश्रय घरों में छोड़ने की कोशिश भी की जाएगी तो यह इतना आसान नहीं होगा। वर्तमान में संख्या इतनी ज्यादा है कि एक गली में 50 से अधिक कुत्ते घूमते हुए दिखाई देते हैं। ऐसे में चुनौतियां कम नहीं होगी।
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