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फिर रुकी वैश्य शिक्षण संस्था की चुनाव प्रक्रिया

Thu, 17 Mar 2022 01:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 17 Mar 2022 01:03 AM IST
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Then the election process of Vaishya educational institution stopped
रोहतक। वैश्य शिक्षण संस्था का चुनावी विवाद टल नहीं रहा है। पिछले दो साल से अटकी चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के 12वें दिन फिर थम गई। इस बार जिला रजिस्ट्रार कार्यालय ने चुनाव पर रोक के निर्देश जारी किए हैं। इस बारे में संस्था के एक सदस्य ने याचिका दायर करते हुए चुनावी प्रक्रिया को गलत ठहराया है। चुनाव अधिकारी की ओर से मतदाता सूची प्रकाशन के बाद आपत्ति दर्ज कराने के लिए नियमानुसार पर्याप्त समय न देने की बात कही गई है। इस मामले में जिला रजिस्ट्रार कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं।
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वैश्य संस्था की एसडीएम कम चुनाव अधिकारी की ओर से जारी चुनावी प्रक्रिया के तहत बुधवार को नामांकन का दूसरा दिन रहा। नामांकन के दूसरे दिन कोई नामांकन पत्र दाखिल नहीं हुआ। इसकी वजह जिला रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से चुनाव पर स्टे लगाना रहा। जिला रजिस्ट्रार ने जनता कॉलोनी निवासी प्रवीण जिंदल व दिल्ली रोहिणी के विजय अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करतेे हुए स्टे का निर्देश जारी किया है। ऐसे में एक बार फिर संस्था की चुनाव की प्रक्रिया दो कदम चलकर फिर रुक गई है। पिछले दो साल से चुनावी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसकी वजह संस्था के 346 नए वोट मतदाता सूची में जोड़े जाना बताया जा रहा है। प्रधान पक्ष इन्हें वैध तो सचिव पक्ष इसे अवैध बता रहा है।
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संस्था के पूर्व सचिव जारी कर चुके हैं चुनावी शेड्यूल
सरकार की ओर से नियुक्त चुनाव अधिकारी के रूप में एसडीएम ने हाल ही में वैश्य संस्था का चुनावी शेड्यूल जारी किया था। इसके तहत चार मार्च को मतदाता सूची प्रकाशित करते हुए 10 मार्च तक आपत्तियां मांगी गई। सप्लीमेंटरी मतदाता सूची का प्रकाशन 14 मार्च को किया गया। इसमें 346 नए जोड़े गए वोटों को छोड़ कर 16717 मतदाताओं के नाम शामिल किए गए। चुनावी प्रक्रिया के तहत 15 मार्च को नामांकन पत्र दाखिल करने का समय शुरू हुआ। नामांकन प्रक्रिया के दूसरे ही दिन चुनाव पर रोक लग गई। इससे पूर्व संस्था के पूर्व सचिव डॉ. चंद्र चुनावी शेड्यूल जारी कर चुके हैं। यह शेड्यूल भी विवादों व शोरशराबे के बीच जारी हुआ था। कार्यालय बंद होने के कारण सचिव ने सड़क पर खड़े होकर चुनावी कार्यक्रम की जानकारी सार्वजनिक की।
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हाई कोर्ट में विचाराधीन है वोट का विवाद
संस्था में नई कार्यकारिणी के चुनाव से पूर्व कुछ नए वोट जोड़े गए। इनमें 346 वोट निर्धारित समय निकलने के बाद जोड़े जाने का दावा करते हुए पूर्व सचिव ने इन्हें रद्द कर दिया। इस बारे में लिखित कार्रवाई भी की गई। जबकि प्रधान पक्ष ने इन्हें सही बताते हुए अपना दावा रखा। इसके बाद पहले यह मामला जिला रजिस्ट्रार के पास पहुंचा। यहां से वोट रद्द किए जाने के बाद मामला चंडीगढ़ रजिस्ट्रार व जनरल रजिस्ट्रार के पास पहुंचा। यहां भी इन्हें वैध नहीं मनाया गया। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में मामला रखा तो इसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद मामला डबल बेंच में रखा गया। यहां यह विवाद विचाराधीन है। बुधवार को इस केस में सुनवाई होनी थी, मगर किन्हीं कारणों से सुनवाई नहीं हो पाई। अब केस की अगली तिथि 21 मार्च दी गई है।
सोसायटी एक्ट के तहत नहीं दिया समय
चुनाव अधिकारी कम एसडीएम ने चुनावी कार्यक्रम के तहत मतदाता सूची जारी कर आपत्तियां आमंत्रित की थी। इसके लिए चार से 10 मार्च तक का ही समय दिया गया। जबकि सोसायटी एक्ट के तहत 15 दिन का समय दिया जाना चाहिए था। यह समय नहीं मिलने से आपत्तियों का समाधान भी असंभव है। इस परिस्थिति में चुनाव के बाद यदि कोई अपील करता है तो चुनाव रद्द हो सकते हैं। ऐसे में संस्था व सदस्यों का समय और धन व्यर्थ होने के साथ ऊर्जा भी बर्बाद होती। चुनावी प्रक्रिया भी एक महीने की ही रखी गई है। जबकि एक्ट में 90 दिन की चुनावी प्रक्रिया का प्रावधान है। इस मामले में सुनवाई नहीं होने पर जिला रजिस्ट्रार कार्यालय में याचिका दायर की गई है।

- प्रवीण जिंदल, सदस्य, वैश्य शिक्षण संस्था।
रजिस्ट्रार कार्यालय ने दिया एक तरफा फैसला
संस्था के चुनाव बड़ी मुश्किल से आगे बढ़े थे। इस पर फिर स्टे का अवरोध लग गया है। कुछ लोग जानबूझ कर अड़चन लगा रहे हैं। रजिस्ट्रार कार्यालय ने भी एक व्यक्ति की याचिका पर एक तरफा फैसला सुना दिया। एसडीएम कम चुनाव अधिकारी का पक्ष ही नहीं सुना गया। जहां तक नए वोटों का मामला है, यह केस हाई कोर्ट में विचाराधीन है। यह मामला एक पक्ष चार बार हर चुका है। रजिस्ट्रार कार्यालय ने दबाव में चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाने का फैसला दिया है। इससे समाज आहत है। इस बारे में चंडीगढ़ रजिस्ट्रार से न्याय की गुहार लगाई जाएगी।
- अजय गुप्ता बाबा, सदस्य, वैश्य शिक्षण संस्था।
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