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Rohtak News: सीआरएसयू में कुलपति ने शिक्षकों के साथ साझा किए जापान के अनुभव

Tue, 20 Jan 2026 12:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 12:24 AM IST
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The Vice-Chancellor shared his experiences from Japan with the teachers at CRSU.
19जेएनडी32: जापान से वापस आने पर सीआरएसयू स्टाफ सदस्य स्वागत करते हुए। स्रोत विवि
संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. डॉ. राम पाल सैनी का जापान यात्रा से स्वदेश वापसी पर विश्वविद्यालय में स्वागत किया गया। कुलपति ने शिक्षकों, अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ जापान के अनुभव साझा किए। शिक्षा प्रणाली, कार्य संस्कृति व शोध वातावरण पर विस्तार से चर्चा की।
प्रो. सैनी ने बताया कि जापान दौरे के दौरान चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय ने जापान के छह प्रमुख विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक व शोध सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन किए हैं। इनसे भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाएं, फैकल्टी एक्सचेंज, छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रम और नवाचार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मंच पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि वहां समय की पाबंदी, गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता और राष्ट्र के प्रति समर्पण स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है। जापान ने शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाया है जो भारत के लिए भी प्रेरणादायी है।
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डॉ. राम पाल ने कहा कि जापान अपने उत्पादों और ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने पर विशेष ध्यान देता है। भारत को भी लोकल को ग्लोबल की सोच के साथ उत्पादों की गुणवत्ता और नवाचार पर जोर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जापान में विद्यालय स्तर से ही बच्चों को टीम वर्क, अनुशासन और जीवन कौशल सिखाए जाते हैं जिससे वे जिम्मेदार नागरिक बनते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के तहत ऐसी समग्र और व्यवहारिक शिक्षा प्रणाली को लागू करने की व्यापक संभावनाएं हैं।
कंसाई विश्वविद्यालय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक और बहुविषयक शोध के लिए जाना जाता है। वहीं टोक्यो विश्वविद्यालय जापान का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विश्वविद्यालय है।

इसके अलावा क्योटो विश्वविद्यालय भी उन्नत शोध और नवाचार के क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध है। कार्यक्रम के अंत में उनहोंने बताया कि जापान के साथ हुए शैक्षणिक सहयोग से सीआरएसयू में शोध, नवाचार और वैश्विक दृष्टिकोण को नई दिशा मिलेगी।
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