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पाकिस्तान के मुल्तान से आई मुखौटा परंपरा का भक्तों में बढ़ रहा क्रेज

Thu, 06 Oct 2022 02:15 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 06 Oct 2022 02:15 AM IST
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The increasing craze among the devotees of the mask tradition from Multan, Pakistan
पुरानी आईटीआई मैदान में श्री रामलीला उत्सव कमेटी के हनुमान शोभायात्रा में जमीन पर दंडवत पैर छूत?
देश के विभाजन के दौरान पाकिस्तान के मुल्तान से हिंदुस्तान आई मुखौटा परंपरा बुधवार को दशहरे पर एक बार फिर देखने को मिली। यह परंपरा समय के साथ लुप्त होने की बजाय लगातार बढ़ रही है। इसका असर रोहतक, झज्जर, पानीपत व आसपास के जिलों में भी देखा जा सकता है। इसके तहत बुधवार को 23 भक्तों ने हनुमान स्वरूप मुखौटा धारण कर दशहरा मेले में भगवान श्रीराम का जयघोष किया और विजय यात्रा में शामिल हुए।
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‘मुखौटा परंपरा’ कहने के लिए भले ही सामान्य हो, लेकिन इसे धारण करना उतना ही कठिन है। क्योंकि इसे धारण करने वाले भक्त को 40 दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है। इसके बाद ही इस मुखौटे को धारण कर सकता है। पूर्व की रामलीला में 14 भक्त इस रूप में दिखते थे, लेकिन इस साल इनकी संख्या 23 हो गई है। इसमें चार साल के बच्चे से लेकर 44 साल तक के व्यक्ति भी शामिल हैं। बुधवार को श्री सनातन धर्म पंजाबी रामलीला क्लब से पांच हनुमान स्वरूप में भक्त पुरानी आईटीआई स्थित दशहरा मेला व 18 गौकर्ण धाम पर आयोजित दशहरा मेला में रवाना हुए।
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हनुमान जी का मुखौटा और सिंदूर में लिपटे भक्तों को देख भक्तों ने उनके हनुमान स्वरूप की पूजा की। खास बात यह होती है कि सभी भक्त चाहते हैं कि हनुमान भक्तों के शरीर पर लगा सिंदूर उन्हें भी प्रसाद रूप में मिल जाए। ओम प्रकाश गुलाटी ने बताया कि मुखौटा परंपरा उनके पूर्वज पाकिस्तान के मुल्तान से लाए थे। पहले यह बेरी में होता था, इसे फिर रोहतक लाया गया। इसमें 40 दिन कलाकार जमीन पर सोते हैं और मीठा ही खाते हैं। अशोक गुलाटी, सुरेंद्र नरूला व मदन गुलाटी ने बताया कि मुखौटा लकड़ी व अन्य सामग्री का होता है। इसे पहन कर तीन से चार किलोमीटर नाचते हुए चलना आसान नहीं होता। लेकिन हनुमान जी के आशीर्वाद से भक्त यह कर पाते हैं। व्रतधारण करने वाले व्रत वीरवार को खोलेंगे।
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