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सरकार भूल गई उन शहीदों को जो लौट के घर न आए
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देश की आजादी के लिए लड़ने वाले शहीदों को सरकार भूल गई है जो लौट के घर न आए। लेकिन एक स्वतंत्रता सेनानी के बेटे ने 287 ऐसे गुमनाम शहीदों को ढूंढ लिया है, जिनको सरकार ने भुला दिया था।
दादरी के स्वतंत्रता सेनानी राम सिंह फौगाट के रिकॉर्ड को खोजते हुए उनके बेटे श्रीभगवान फौगाट ने 287 गुमनाम शहीदों के नाम खोज डाले, इनमें से 58 रोहतक, झज्जर और सोनीपत जिले के हैं। मुख्य सचिव भी सभी जिलों के उपायुक्त को पत्र भेजकर यह आदेश दे चुके हैं कि गुमनाम शहीदों के रिकॉर्ड को उनके परिवारों तक पहुंचाया जाए। लेकिन इस पर अभी तक अमल नहीं किया गया है।
दादरी निवासी श्रीभगवान फौगाट ने बताया कि यह गुमनाम शहीद वे हैं जिनके परिजन पेंशन की फाइल अस्वीकृत होने के बाद चुपचाप बैठ गए। अब जो पीढ़ी इनके परिवार में है उनको नहीं पता कि उनके परिजन स्वतंत्रता सेनानी थे। वर्ष 1940 से 47 के समय का पता होने के कारण श्रीभगवान भी इनके पास नहीं पहुंच पा रहे हैं। हालांकि श्रीभगवान के आग्रह पर मुख्य सचिव सभी उपायुक्त को यह काम करने के आदेश दे चुके हैं, लेकिन सरकार के किसी नेता द्वारा दिलचस्पी न दिखाने के कारण प्रशासन उन शहीदों को भूल गया है।
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श्रीभगवान ने कहा कि यदि किसी परिवार को अपने पूर्वजों के आजाद हिंद फौज में होने की थोड़ी भी जानकारी है तो वे उनका रिकॉर्ड ढूंढने में मदद कर सकते हैं। 2017 में स्वतंत्रता सेनानियों का रिकॉर्ड खंगालने में सीएम विंडो पर दस बार गुहार लगाई, लेकिन उसके बावजूद भी कोई समाधान नहीं हुआ।
रोहतक के सीटीएम ने श्रीभगवान को दिया था आश्वासन
श्रीभगवान फौगाट सैनिकों के परिवारों को तलाशने और उनके परिवार को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिलवाने के लिए रोहतक की सीटीएम से भी मुलाकात की थी। जहां से उन्हें आश्वासन मिला था कि जल्द ही इसके लिए कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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दादरी के स्वतंत्रता सेनानी राम सिंह फौगाट के रिकॉर्ड को खोजते हुए उनके बेटे श्रीभगवान फौगाट ने 287 गुमनाम शहीदों के नाम खोज डाले, इनमें से 58 रोहतक, झज्जर और सोनीपत जिले के हैं। मुख्य सचिव भी सभी जिलों के उपायुक्त को पत्र भेजकर यह आदेश दे चुके हैं कि गुमनाम शहीदों के रिकॉर्ड को उनके परिवारों तक पहुंचाया जाए। लेकिन इस पर अभी तक अमल नहीं किया गया है।
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दादरी निवासी श्रीभगवान फौगाट ने बताया कि यह गुमनाम शहीद वे हैं जिनके परिजन पेंशन की फाइल अस्वीकृत होने के बाद चुपचाप बैठ गए। अब जो पीढ़ी इनके परिवार में है उनको नहीं पता कि उनके परिजन स्वतंत्रता सेनानी थे। वर्ष 1940 से 47 के समय का पता होने के कारण श्रीभगवान भी इनके पास नहीं पहुंच पा रहे हैं। हालांकि श्रीभगवान के आग्रह पर मुख्य सचिव सभी उपायुक्त को यह काम करने के आदेश दे चुके हैं, लेकिन सरकार के किसी नेता द्वारा दिलचस्पी न दिखाने के कारण प्रशासन उन शहीदों को भूल गया है।
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श्रीभगवान ने कहा कि यदि किसी परिवार को अपने पूर्वजों के आजाद हिंद फौज में होने की थोड़ी भी जानकारी है तो वे उनका रिकॉर्ड ढूंढने में मदद कर सकते हैं। 2017 में स्वतंत्रता सेनानियों का रिकॉर्ड खंगालने में सीएम विंडो पर दस बार गुहार लगाई, लेकिन उसके बावजूद भी कोई समाधान नहीं हुआ।
रोहतक के सीटीएम ने श्रीभगवान को दिया था आश्वासन
श्रीभगवान फौगाट सैनिकों के परिवारों को तलाशने और उनके परिवार को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिलवाने के लिए रोहतक की सीटीएम से भी मुलाकात की थी। जहां से उन्हें आश्वासन मिला था कि जल्द ही इसके लिए कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।