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Rohtak News: अतिदोहन और फसल चक्र न अपनाने से घट रही मृदा की उर्वरक क्षमता
Thu, 04 Dec 2025 11:48 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 04 Dec 2025 11:48 PM IST
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फोटो संख्या:55- गांव मालड़ा के खेत में उगी फसल---संवाद
महेंद्रगढ़। जिले में मिट्टी की उर्वरक क्षमता निरंतर घटती जा रही है। बीते पांच सालों में मिट्टी की उर्वरक क्षमता न्यूनतम पैरामीटर से भी नीचे आ गई है जबकि मूल पोषक तत्त्वों में तीन की मात्रा कम तो तीन की मध्यम बनी हुई है। किसानों में जागरूकता का अभाव में वह फसल चक्र नहीं अपना रहे हैं व अतिदोहन ने मिट्टी की सेहत भी बिगाड़ दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. राजपाल ने बताया कि फसलों की वृद्धि, अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन, नाईट्रोजन, फॉस्फोरस, जिंक, पोटाश व सल्फर की मात्रा होनी आवश्यक है। इन पोषक तत्त्वों की कमी के कारण फसलों में पीलापन, कम पैदावार, जलन रोग, सामान्य से कम वृद्धि आदि लक्षण नजर आने लगते हैं।
जिले की मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन, नाईट्रोजन, फॉस्फोरस की मात्रा कम है जबकि पोटाश, जिंक व सल्फर की मात्रा मध्यम बनी हुई है। इसका असर फसलों में साफ दिखने को मिल रहा है। अगर इन तत्त्वों का उचित प्रबंधन हो तो फसलों में सकारात्मक असर होगा।
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क्षेत्र में निरंतर फसल चक्र की अनदेखी की जा रही है और इसके कारण मिट्टी में केवल एक ही तरह के पोषक तत्व पाएं जाते हैं। इनका फसलों में उपयोग होता है जबकि अन्य तत्वों की कमी हो रही है।
किसान अच्छी पैदावार के लिए केवल उर्वरक का प्रयोग करते हैं। इससे मिट्टी में सही तत्वों का पता नहीं चल पाता है। अगर दलहन फसलें जैसे मूंग, चना, अरहर, उड़द आदि उगाएं तो इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है। साथ ही फसल चक्र को बढ़ावा देने से भी हर साल मिट्टी में नए पोषक तत्त्व जमा होते हैं और फसल उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी।
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क्षेत्र में 40 फीसदी क्षारीय तो 20 लवणीय भूमि
विशेषज्ञ के अनुसार क्षेत्र में 40 फीसदी क्षारीय तो 20 फीसदी लवणीय भूमि है। क्षेत्र में पाली-आकोदा बेल्ट में लवणीय क्षेत्र है जबकि अन्य क्षारीय क्षेत्र है। जिले में 21 फीसदी क्षेत्र में ही पानी खेती में उपयोग करने लायक है। मिट्टी की न्यूनतम उर्वरक क्षमता 0.4 पीएच होती है जबकि महेंद्रगढ़ जिले की मिट्टी की उर्वरक क्षमता 0.2 पीएच है। इससे कम गुणवत्ता वाली फसलों का उत्पादन होता है।
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समय पर कराएं मिट्टी की जांच
किसान फसल बोने से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं। इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा पता चलता है। साथ ही जांच के बाद किसान कमी पाए जाने वाले तत्त्वों को मिट्टी में बढ़ा सकते हैं। इससे फसल पैदावार अच्छी रहेगी। हर खेत स्वस्थ खेत योजना के तहत हरियाणा सरकार की ओर से किसानों के मृदा सेहत कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके माध्यम से किसान नजदीकी लैब में जाकर मिट्टी का निशुल्क परीक्षण करा सकते हैं और मिट्टी की पूरी जानकारी पा सकते हैं।
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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
सरकार की ओर से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें देशी बीज, केंचुआ खाद, गोबर खाद, मुर्गी खाद का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही फसलों के अवशेष जलाने की बजाय उनको खेत की जुताई में ही शामिल करें। इनसे मिट्टी में पोषक तत्वों की बढ़ोतरी होगी और पशुओं व लोगों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
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कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. राजपाल ने बताया कि फसलों की वृद्धि, अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन, नाईट्रोजन, फॉस्फोरस, जिंक, पोटाश व सल्फर की मात्रा होनी आवश्यक है। इन पोषक तत्त्वों की कमी के कारण फसलों में पीलापन, कम पैदावार, जलन रोग, सामान्य से कम वृद्धि आदि लक्षण नजर आने लगते हैं।
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जिले की मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन, नाईट्रोजन, फॉस्फोरस की मात्रा कम है जबकि पोटाश, जिंक व सल्फर की मात्रा मध्यम बनी हुई है। इसका असर फसलों में साफ दिखने को मिल रहा है। अगर इन तत्त्वों का उचित प्रबंधन हो तो फसलों में सकारात्मक असर होगा।
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क्षेत्र में निरंतर फसल चक्र की अनदेखी की जा रही है और इसके कारण मिट्टी में केवल एक ही तरह के पोषक तत्व पाएं जाते हैं। इनका फसलों में उपयोग होता है जबकि अन्य तत्वों की कमी हो रही है।
किसान अच्छी पैदावार के लिए केवल उर्वरक का प्रयोग करते हैं। इससे मिट्टी में सही तत्वों का पता नहीं चल पाता है। अगर दलहन फसलें जैसे मूंग, चना, अरहर, उड़द आदि उगाएं तो इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है। साथ ही फसल चक्र को बढ़ावा देने से भी हर साल मिट्टी में नए पोषक तत्त्व जमा होते हैं और फसल उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी।
क्षेत्र में 40 फीसदी क्षारीय तो 20 लवणीय भूमि
विशेषज्ञ के अनुसार क्षेत्र में 40 फीसदी क्षारीय तो 20 फीसदी लवणीय भूमि है। क्षेत्र में पाली-आकोदा बेल्ट में लवणीय क्षेत्र है जबकि अन्य क्षारीय क्षेत्र है। जिले में 21 फीसदी क्षेत्र में ही पानी खेती में उपयोग करने लायक है। मिट्टी की न्यूनतम उर्वरक क्षमता 0.4 पीएच होती है जबकि महेंद्रगढ़ जिले की मिट्टी की उर्वरक क्षमता 0.2 पीएच है। इससे कम गुणवत्ता वाली फसलों का उत्पादन होता है।
समय पर कराएं मिट्टी की जांच
किसान फसल बोने से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं। इससे मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा पता चलता है। साथ ही जांच के बाद किसान कमी पाए जाने वाले तत्त्वों को मिट्टी में बढ़ा सकते हैं। इससे फसल पैदावार अच्छी रहेगी। हर खेत स्वस्थ खेत योजना के तहत हरियाणा सरकार की ओर से किसानों के मृदा सेहत कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके माध्यम से किसान नजदीकी लैब में जाकर मिट्टी का निशुल्क परीक्षण करा सकते हैं और मिट्टी की पूरी जानकारी पा सकते हैं।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
सरकार की ओर से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें देशी बीज, केंचुआ खाद, गोबर खाद, मुर्गी खाद का प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही फसलों के अवशेष जलाने की बजाय उनको खेत की जुताई में ही शामिल करें। इनसे मिट्टी में पोषक तत्वों की बढ़ोतरी होगी और पशुओं व लोगों की सेहत पर सकारात्मक असर पड़ेगा।