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Rohtak News: तीन माह में विभाग ने पानी के 88 सैंपल लिए, 17 मिले फेल
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38...हरि सिंह कॉलोनी में पेयजल सैंपल लेता जन स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी। संवाद
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रोहतक। दूषित जलापूर्ति और काला पानी नलों में सप्लाई होने से शहर वासियों की समस्या बढ़ी है। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं कि कब तक लोग काला पानी व बदबूदार पानी पीने को मजबूर रहेंगे।
जन स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी से पता चला है कि विभाग ने बीते तीन में 88 पानी की सैंपल लिए हैं जिनमें से 17 सैंपल फेल पाए गए हैं। कहा जा सकता है कि अभी शहर में गंदे पानी की समस्या से लोगों को राहत नहीं मिली है।
शहर में जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से 5.15 लाख आबादी को चार जलघरों से पानी सप्लाई किया जाता है। बीते दिनों में टीम की पड़ताल में भी पाया गया था कि एक लाख से अधिक आबादी दूषित पानी पीने को मजबूर है।
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आमजन की शिकायत का समाधान करने के लिए विभाग की लैब के माध्यम से पानी की जांच प्रत्येक माह की जा रही है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पानी की सप्लाई के दौरान जलघरों व कॉलोनियों में घरों के पानी में टीडीएस, रासायनिक व बैक्टीरियोलॉजिकल सैंपल भरकर जांच की है।
टीडीएस और रासायनिक सैंपल की रिपोर्ट मौके पर ही मिल जाती है लेकिन बैक्टीरियोलॉजिकल की जांच लैब में की जाती है।
उन्होंने बताया कि विभाग को अक्तूबर 2025 के बाद से टीडीएस और रासायनिक सैंपल करने के बाद बैक्टीरियोलॉजिकल कुल 83 सैंपल शहर की अलग-अलग कॉलोनियों व घरों से लिए गए हैं। इनमें 71 सैंपल सही पाए गए हैं जबकि 17 सैंपल फेल मिले हैं।
अधिकारियों का कहना है कि 17 सैंपल की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। कई कॉलोनियों में समाधान भी किया जा चुका है। इसमें मुख्य शिकायतें घरों के पुराने कनेक्शन और आस-पास में सीवर पाइप लाइन लीकेज वाले क्षेत्र में पाई गई हैं।
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वर्जन
विभाग की ओर से पानी की गुणवत्ता को लेकर निरंतर जांच की जाती है। टीम कॉलोनियों में पानी को चैक करती है। सैंपल भी लेकर जांच करती है। जहां सैंपल में कमी पाई जाती है, वहां जांच कर समस्या का समाधान किया जा रहा है। सैंपल फेल मिलने वाली कॉलोनियों में पुरानी पाइपलाइन हैं। उनके के लिए 45 किलोमीटर में 17 करोड़ से पाइपलाइन सुधार किया जाएगा। -शिवराज चौहान, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग।
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जन स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी से पता चला है कि विभाग ने बीते तीन में 88 पानी की सैंपल लिए हैं जिनमें से 17 सैंपल फेल पाए गए हैं। कहा जा सकता है कि अभी शहर में गंदे पानी की समस्या से लोगों को राहत नहीं मिली है।
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शहर में जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से 5.15 लाख आबादी को चार जलघरों से पानी सप्लाई किया जाता है। बीते दिनों में टीम की पड़ताल में भी पाया गया था कि एक लाख से अधिक आबादी दूषित पानी पीने को मजबूर है।
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आमजन की शिकायत का समाधान करने के लिए विभाग की लैब के माध्यम से पानी की जांच प्रत्येक माह की जा रही है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पानी की सप्लाई के दौरान जलघरों व कॉलोनियों में घरों के पानी में टीडीएस, रासायनिक व बैक्टीरियोलॉजिकल सैंपल भरकर जांच की है।
टीडीएस और रासायनिक सैंपल की रिपोर्ट मौके पर ही मिल जाती है लेकिन बैक्टीरियोलॉजिकल की जांच लैब में की जाती है।
उन्होंने बताया कि विभाग को अक्तूबर 2025 के बाद से टीडीएस और रासायनिक सैंपल करने के बाद बैक्टीरियोलॉजिकल कुल 83 सैंपल शहर की अलग-अलग कॉलोनियों व घरों से लिए गए हैं। इनमें 71 सैंपल सही पाए गए हैं जबकि 17 सैंपल फेल मिले हैं।
अधिकारियों का कहना है कि 17 सैंपल की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। कई कॉलोनियों में समाधान भी किया जा चुका है। इसमें मुख्य शिकायतें घरों के पुराने कनेक्शन और आस-पास में सीवर पाइप लाइन लीकेज वाले क्षेत्र में पाई गई हैं।
वर्जन
विभाग की ओर से पानी की गुणवत्ता को लेकर निरंतर जांच की जाती है। टीम कॉलोनियों में पानी को चैक करती है। सैंपल भी लेकर जांच करती है। जहां सैंपल में कमी पाई जाती है, वहां जांच कर समस्या का समाधान किया जा रहा है। सैंपल फेल मिलने वाली कॉलोनियों में पुरानी पाइपलाइन हैं। उनके के लिए 45 किलोमीटर में 17 करोड़ से पाइपलाइन सुधार किया जाएगा। -शिवराज चौहान, अधीक्षण अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग।