{"_id":"68f163377b0f1aa1c204f7f8","slug":"the-chocolate-we-disliked-as-children-is-the-sweetness-that-has-come-into-our-lives-rohtak-news-c-17-roh1020-746198-2025-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: बचपन में नापंसद चाॅकलेट ही जीवन में घोल रही मिठास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: बचपन में नापंसद चाॅकलेट ही जीवन में घोल रही मिठास
Fri, 17 Oct 2025 02:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 17 Oct 2025 02:57 AM IST
विज्ञापन
10...अपने हाथाें से बनाई चाकलेट दिखाती संगीता सिंघल । संवाद
रोहतक। बच्चों को चॉकलेट बहुत पसंद होता है मगर डीएलएफ कॉलोनी की रहने वाली संगीता सिंघल को बचपन में यह नापसंद था। घर में चॉकलेट व बिस्किट में से वे बिस्किट को ही चुनकर खाती थीं। अब उसी नापसंद को स्टार्टअप बनाया और वह उनकी जिंदगी में मिठास घोल रहा है।
इस कारोबार से फिलहाल 25 हजार रुपये प्रति महीना आमदनी कर रही हैं। उनका कहना है कि वे केवल जानकारों के ऑर्डर पर ही चॉकलेट तैयार करती हैं लेकिन भविष्य में इसे और बढ़ाना चाहती हैं ताकि कुछ और महिलाओं के लिए भी यह रोजगार का साधन बन सके।
संगीता बताती हैं कि उन्होंने एक निजी स्कूल में शिक्षिका की नौकरी छोड़कर सात साल पहले चॉकलेट का कारोबार शुरू किया था। संगीता को भले ही बचपन में चॉकलेट खाना पसंद नहीं था लेकिन उसे तैयार करना पसंद था। उनकी मां पुष्पा जैन से चॉकलेट व अन्य तरह के बेकरी उत्पाद घर पर ही बनाती थीं।
विज्ञापन
मां से मेहनत का मंत्र लेकर संगीता उद्यमशीलता में आगे बढ़ रही हैं। चॉकलेट व अन्य बेकरी उत्पाद बनाने का बचपन से ही शौक रखने वाली संगीता ने वर्ष 2018 में इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने की ठान ली। इसके लिए बैंक से लोन लिया और चॉकलेट का स्टार्टअप शुरू कर दिया। हालांकि, कारोबार का अनुभव नहीं होने के चलते शुरुआत में उनको नुकसान उठाना पड़ा पर मायूस नहीं हुईं।
लगातार अपने काम पर फोकस करती रहीं। अब वे जानकारों के ऑर्डर पर चॉकलेट व अन्य बेकरी उत्पाद तैयार करती हैं। वे ऑनलाइन ऑर्डर भी लेने लगी हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ( पीएमईजीपी) के तहत उन्होंने यह स्टार्टअप किया।
इसके लिए उन्होंने 15 दिन का प्रशिक्षण भी लिया। अब वे प्रशासन की ओर से अलग-अलग आयोजनों के अवसर पर प्रदर्शनी भी लगाती हैं। उन्हें प्रशासन सम्मानित भी कर चुका है।
-- -
लाॅकडाउन में हुआ नुकसान
लाॅकडाउन में उनको काफी नुकसान हुआ। उत्पाद बिकने बंद हो गए। बाद में स्थिति सामान्य होती गई। वे ड्राईफ्रूट चॉकलेट, बटर चॉकलेट, ब्राउनी केक, चोको केक, खजूर चॉकलेट के अलावा रागी के आटे से बिस्किट व मटर, मोटे अनाज से बिस्किट, बेसन के लड्डू व पिन्नी सहित 10 से 12 प्रकार के उत्पाद बनाती हैं।
विज्ञापन
इस कारोबार से फिलहाल 25 हजार रुपये प्रति महीना आमदनी कर रही हैं। उनका कहना है कि वे केवल जानकारों के ऑर्डर पर ही चॉकलेट तैयार करती हैं लेकिन भविष्य में इसे और बढ़ाना चाहती हैं ताकि कुछ और महिलाओं के लिए भी यह रोजगार का साधन बन सके।
विज्ञापन
संगीता बताती हैं कि उन्होंने एक निजी स्कूल में शिक्षिका की नौकरी छोड़कर सात साल पहले चॉकलेट का कारोबार शुरू किया था। संगीता को भले ही बचपन में चॉकलेट खाना पसंद नहीं था लेकिन उसे तैयार करना पसंद था। उनकी मां पुष्पा जैन से चॉकलेट व अन्य तरह के बेकरी उत्पाद घर पर ही बनाती थीं।
विज्ञापन
मां से मेहनत का मंत्र लेकर संगीता उद्यमशीलता में आगे बढ़ रही हैं। चॉकलेट व अन्य बेकरी उत्पाद बनाने का बचपन से ही शौक रखने वाली संगीता ने वर्ष 2018 में इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने की ठान ली। इसके लिए बैंक से लोन लिया और चॉकलेट का स्टार्टअप शुरू कर दिया। हालांकि, कारोबार का अनुभव नहीं होने के चलते शुरुआत में उनको नुकसान उठाना पड़ा पर मायूस नहीं हुईं।
लगातार अपने काम पर फोकस करती रहीं। अब वे जानकारों के ऑर्डर पर चॉकलेट व अन्य बेकरी उत्पाद तैयार करती हैं। वे ऑनलाइन ऑर्डर भी लेने लगी हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम ( पीएमईजीपी) के तहत उन्होंने यह स्टार्टअप किया।
इसके लिए उन्होंने 15 दिन का प्रशिक्षण भी लिया। अब वे प्रशासन की ओर से अलग-अलग आयोजनों के अवसर पर प्रदर्शनी भी लगाती हैं। उन्हें प्रशासन सम्मानित भी कर चुका है।
लाॅकडाउन में हुआ नुकसान
लाॅकडाउन में उनको काफी नुकसान हुआ। उत्पाद बिकने बंद हो गए। बाद में स्थिति सामान्य होती गई। वे ड्राईफ्रूट चॉकलेट, बटर चॉकलेट, ब्राउनी केक, चोको केक, खजूर चॉकलेट के अलावा रागी के आटे से बिस्किट व मटर, मोटे अनाज से बिस्किट, बेसन के लड्डू व पिन्नी सहित 10 से 12 प्रकार के उत्पाद बनाती हैं।