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45 प्लस के तीन लाख लोगों को टीकाकरण करने का लक्ष्य
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स्वास्थ्य विभाग जिले में 45 प्लस की आबादी तीन लाख के करीब मान रहा है। इन सभी को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अभी तक 101705 लोगों को कोरोना से बचाव का टीकाकरण किया जा चुका है। वहीं टीका उत्सव के आखिरी दिन बुधवार को विभाग की ओर से 5815 लोगों को पहली डोज और 736 को वैक्सीन की दूसरी डोज लगाई गई। टीकाकरण मामले में जिला प्रदेश में भले ही पीछे चल रहा है, लेकिन संक्रमण फैलने के मामले में टॉप फाइव जिलों की सूची में शामिल है। ऐसे में विभाग के सामने कड़ी चुनौती है कि वह कम समय में अधिक से अधिक लोगों को टीका लगाकर सुरक्षित करे।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में कोविशील्ड के साथ कोवैक्सीन भी उपलब्ध कराई गई है। सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने टीकाकरण के लिए अपने सभी उप सिविल सर्जनों को जगह-जगह तैनात किया है कि अधिक से अधिक लोगों को जागरूक कर टीका लगवाएं। इसमें विभाग सामाजिक संस्थाओं की भी मदद ले रहा है। टीकाकरण के बीच सबसे बड़ा चैलेंज बना है कि लोगों का सवाल है कि टीका लगने के बाद भी कोरोना हो रहा है। ऐसे में उप सिविल सर्जन एवं जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अनिलजीत त्रेहान ने बताया कि टीका लगने के बाद एंटीबॉडी बनती है। यदि कुछ लोग संक्रमित हो गए तो यह मतलब नहीं है कि टीके का लाभ नहीं है। यह व्यक्ति को गंभीर स्थिति में जाने से बचाता है। एक बार टीका लगने से हमारे शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी कोरोना के अन्य स्ट्रेन से भी लड़ती हैं। अधिकारी ने बताया कि टीका लगने के बाद अच्छी मात्रा में एंटीबॉडी बनती हैं, इसलिए इसे लगवाना जरूरी है। यदि किसी को कोरोना हो गया है तो भी उसे अपनी डोज लगवानी चाहिए। कोवैक्सीन 28 से 42 दिन में व कोविशील्ड चार सप्ताह के बाद लगवानी चाहिए।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में कोविशील्ड के साथ कोवैक्सीन भी उपलब्ध कराई गई है। सिविल सर्जन डॉ. अनिल बिरला ने टीकाकरण के लिए अपने सभी उप सिविल सर्जनों को जगह-जगह तैनात किया है कि अधिक से अधिक लोगों को जागरूक कर टीका लगवाएं। इसमें विभाग सामाजिक संस्थाओं की भी मदद ले रहा है। टीकाकरण के बीच सबसे बड़ा चैलेंज बना है कि लोगों का सवाल है कि टीका लगने के बाद भी कोरोना हो रहा है। ऐसे में उप सिविल सर्जन एवं जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अनिलजीत त्रेहान ने बताया कि टीका लगने के बाद एंटीबॉडी बनती है। यदि कुछ लोग संक्रमित हो गए तो यह मतलब नहीं है कि टीके का लाभ नहीं है। यह व्यक्ति को गंभीर स्थिति में जाने से बचाता है। एक बार टीका लगने से हमारे शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी कोरोना के अन्य स्ट्रेन से भी लड़ती हैं। अधिकारी ने बताया कि टीका लगने के बाद अच्छी मात्रा में एंटीबॉडी बनती हैं, इसलिए इसे लगवाना जरूरी है। यदि किसी को कोरोना हो गया है तो भी उसे अपनी डोज लगवानी चाहिए। कोवैक्सीन 28 से 42 दिन में व कोविशील्ड चार सप्ताह के बाद लगवानी चाहिए।
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