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छात्र संघ चुनाव की घोषणा होते ही शुरू हो गई चौधर की जंग
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sun, 31 Jul 2016 01:52 AM IST
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25 जुलाई को जाट कॉलेज में हुई थी घटना
- फोटो : amar ujala
पिछले दिनों जाट कॉलेज में फायरिंग करने वाले आरोपी के खुलासे पर यकीन किया जाए तो छात्र संघ चुनाव में चौधर के लिए शैक्षणिक संस्थानों में जंग शुरू हो गई है। हिंसा के कारण ही दो दशक पहले प्रदेश में छात्र संघ चुनाव पर रोक लगाई गई थी। अब जबकि 20 साल बाद फिर से छात्र संघ चुनाव कराने का फैसला किया गया है तो फिर से हिंसा की शुरूआत हो गई है। पिछले दिनों जाट कॉलेज में हुई फायरिंग की घटना का कारण भी छात्र संघ चुनाव ही बताया जा रहा है।
चुनाव में हिंसा के कारण ही प्रदेश सरकार ने साल 1996 में प्रदेश में छात्र संघ चुनाव पर रोक लगा दी थी। इतिहास गवाह है कि छात्र संघ के चुनावों में अक्सर छात्र एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन जाते हैं। शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा की बजाय आपसी दुश्मनी को लेकर छिड़ने वाली वर्चस्व की जंग के बाद ही सरकार ने छात्र संघ चुनाव पर रोक लगाई थी। कुछ दिन पहले प्रदेश सरकार ने छात्र संघ चुनाव की घोषणा की है। हालांकि, चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या अप्रत्यक्ष यह अभी तय नहीं है, लेकिन शिक्षण संस्थानों में चौधर की जंग शुरू हो गई है। पिछले दिनों शहर के जाट कॉलेज में हुई घटना के बाद पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी ने जो खुलासा किया है, उसने छात्र संघ चुनाव पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी ने खुलासा किया है कि छात्र संघ चुनाव में कोई दूसरा उनके गुट के सामने मैदान में न आए, इसीलिए फायरिंग की थी। इस खुलासे से इतना तो साफ हो गया है कि छात्र संघ चुनाव शांतिपूर्ण कराने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन को पूरा जोर लगाना पड़ेगा।
चुनाव में बाहरी युवकों का रहेगा हस्तक्षेप
पुलिस गिरफ्त में आए अमित लाठर ने कई नए खुलासे किए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बताया कि छात्र संघ चुनाव में बाहरी छात्रों का हस्तक्षेप रहेगा। चुनावी मैदान में उतरने वाले अपने गुट को जीत हासिल कराने के लिए हर दांव-पेंच आजमाया जाएगा।
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कमेटी की रिपोर्ट पर टिका है छात्र संघ चुनाव का भविष्य
छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या अप्रत्यक्ष इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। न ही चुनाव की कोई तिथि तय की गई है। छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष हों या अप्रत्यक्ष इसे तय करने के लिए सरकार ने कई यूनिवर्सिटी के वीसी की संयुक्त कमेटी का गठन किया है, जो आने वाले दिनों में सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी। चुनाव का दारोमदार इस कमेटी की रिपोर्ट पर टिका है। कमेटी में एमडीयू के वीसी प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया भी शामिल हैं।
एमडीयू में 1996 में हुई थी छात्र नेता की हत्या
छात्र संघ चुनाव के संबंध में करीब दो दशक पूर्व साल 1996 में एमडीयू के विधि विभाग में छात्र नेता देवेंद्र की गोली मारकर हत्या की गई थी। इसके बाद प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में गैंगवार बढ़ गया था, जिस कारण सरकार को छात्र संघ चुनाव बंद करने का फैसला लेना पड़ा। इसके अलावा कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में भी ऐसे मामले सामने आए थे।
यह बोले अधिकारी
पुलिस की तरफ से हमें कोई जानकारी नहीं मिली है। जिस अमित को पकड़ा गया है वह हमारे कॉलेज का नहीं है। सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। आईकार्ड से एंट्री और कॉलेज समय में गेट पर पुलिस तैनात रहे इसके लिए सहयोग मांगा गया है।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार मलिक, प्राचार्य जाट कॉलेज
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चुनाव को लेकर सभी की पूरी जिम्मेदारी रहेगी। एमडीयू कैंपस हो या कॉलेज, सभी के सहयोग से चुनाव शांतिपूर्ण कराएं जाएंगे। स्थानीय प्रशासन से मदद ली जाएगी। चुनाव के दौरान ऐसी कोई घटना नहीं होने देंगे।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, वीसी एमडीयू
छात्र नेताओं के बयान
छात्र संघ चुनाव में अक्सर हिंसा होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इससे डरकर चुनाव बंद करा दिए जाएं। यह प्रजातंत्र का हनन होगा। सरकार को पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ चुनाव कराने चाहिए।
- बलवान सिंह सुहाग, (1977 में रहे एमडीयू के पहले प्रधान)
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शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था का बंदोबस्त होना चाहिए। इस तरह की घटनाएं अक्सर सरकार के इशारे पर होती हैं। सरकार नहीं चाहती कि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।
- प्रदीप देशवाल, प्रदेशाध्यक्ष इनसो
अमित लाठर और शिकायतकर्ता रवि के बीच में छात्र संघ चुनाव को लेकर तनातनी चल रही थी। इसी के चलते रवि पर फायरिंग की गई। दो फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। जल्द ही दोनों को गिरफ्तार किया जाएगा।
- कुलदीप सिंह, एसएचओ पीजीआई थाना
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चुनाव में हिंसा के कारण ही प्रदेश सरकार ने साल 1996 में प्रदेश में छात्र संघ चुनाव पर रोक लगा दी थी। इतिहास गवाह है कि छात्र संघ के चुनावों में अक्सर छात्र एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन जाते हैं। शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा की बजाय आपसी दुश्मनी को लेकर छिड़ने वाली वर्चस्व की जंग के बाद ही सरकार ने छात्र संघ चुनाव पर रोक लगाई थी। कुछ दिन पहले प्रदेश सरकार ने छात्र संघ चुनाव की घोषणा की है। हालांकि, चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या अप्रत्यक्ष यह अभी तय नहीं है, लेकिन शिक्षण संस्थानों में चौधर की जंग शुरू हो गई है। पिछले दिनों शहर के जाट कॉलेज में हुई घटना के बाद पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी ने जो खुलासा किया है, उसने छात्र संघ चुनाव पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी ने खुलासा किया है कि छात्र संघ चुनाव में कोई दूसरा उनके गुट के सामने मैदान में न आए, इसीलिए फायरिंग की थी। इस खुलासे से इतना तो साफ हो गया है कि छात्र संघ चुनाव शांतिपूर्ण कराने के लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन को पूरा जोर लगाना पड़ेगा।
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चुनाव में बाहरी युवकों का रहेगा हस्तक्षेप
पुलिस गिरफ्त में आए अमित लाठर ने कई नए खुलासे किए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बताया कि छात्र संघ चुनाव में बाहरी छात्रों का हस्तक्षेप रहेगा। चुनावी मैदान में उतरने वाले अपने गुट को जीत हासिल कराने के लिए हर दांव-पेंच आजमाया जाएगा।
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कमेटी की रिपोर्ट पर टिका है छात्र संघ चुनाव का भविष्य
छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष होंगे या अप्रत्यक्ष इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। न ही चुनाव की कोई तिथि तय की गई है। छात्र संघ चुनाव प्रत्यक्ष हों या अप्रत्यक्ष इसे तय करने के लिए सरकार ने कई यूनिवर्सिटी के वीसी की संयुक्त कमेटी का गठन किया है, जो आने वाले दिनों में सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी। चुनाव का दारोमदार इस कमेटी की रिपोर्ट पर टिका है। कमेटी में एमडीयू के वीसी प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया भी शामिल हैं।
एमडीयू में 1996 में हुई थी छात्र नेता की हत्या
छात्र संघ चुनाव के संबंध में करीब दो दशक पूर्व साल 1996 में एमडीयू के विधि विभाग में छात्र नेता देवेंद्र की गोली मारकर हत्या की गई थी। इसके बाद प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में गैंगवार बढ़ गया था, जिस कारण सरकार को छात्र संघ चुनाव बंद करने का फैसला लेना पड़ा। इसके अलावा कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में भी ऐसे मामले सामने आए थे।
यह बोले अधिकारी
पुलिस की तरफ से हमें कोई जानकारी नहीं मिली है। जिस अमित को पकड़ा गया है वह हमारे कॉलेज का नहीं है। सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। आईकार्ड से एंट्री और कॉलेज समय में गेट पर पुलिस तैनात रहे इसके लिए सहयोग मांगा गया है।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार मलिक, प्राचार्य जाट कॉलेज
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चुनाव को लेकर सभी की पूरी जिम्मेदारी रहेगी। एमडीयू कैंपस हो या कॉलेज, सभी के सहयोग से चुनाव शांतिपूर्ण कराएं जाएंगे। स्थानीय प्रशासन से मदद ली जाएगी। चुनाव के दौरान ऐसी कोई घटना नहीं होने देंगे।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, वीसी एमडीयू
छात्र नेताओं के बयान
छात्र संघ चुनाव में अक्सर हिंसा होती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इससे डरकर चुनाव बंद करा दिए जाएं। यह प्रजातंत्र का हनन होगा। सरकार को पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ चुनाव कराने चाहिए।
- बलवान सिंह सुहाग, (1977 में रहे एमडीयू के पहले प्रधान)
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शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था का बंदोबस्त होना चाहिए। इस तरह की घटनाएं अक्सर सरकार के इशारे पर होती हैं। सरकार नहीं चाहती कि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।
- प्रदीप देशवाल, प्रदेशाध्यक्ष इनसो
अमित लाठर और शिकायतकर्ता रवि के बीच में छात्र संघ चुनाव को लेकर तनातनी चल रही थी। इसी के चलते रवि पर फायरिंग की गई। दो फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। जल्द ही दोनों को गिरफ्तार किया जाएगा।
- कुलदीप सिंह, एसएचओ पीजीआई थाना