राजस्थान को भी मिल सकते हैं 'योगी': CM पद की दौड़ में बाबा बालकनाथ, छह साल की उम्र में आए थे गुरु की शरण में
BJP candidate Mahant Balak Nath Yogi : बाबा बालकनाथ चलते-चलते चटनी-रोटी खा लेते हैं, रात ढाई बजे उठकर आरती करते हैं, आध्यात्मिक, शैक्षणिक व सामाजिक जीवन में गजब तालमेल है। बाबा मस्तनाथ विवि में राजस्थान में जीत से उत्साह का माहौल। बाबा मस्तनाथ मठ में केंद्रीय मंत्री अमित शाह से लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तक आ चुके हैं।
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हरियाणा के रोहतक के अस्थल बोहर स्थित बाबा मस्तनाथ मठ के महंत बाबा बालकनाथ राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में बने हुए हैं। एक दिन पहले विधानसभा में जीत व अब मुख्यमंत्री बनने की संभावना के चलते मठ व विवि में उत्साह का माहौल है। कभी भी महंत बालकनाथ मठ में अपने गुरुओं से आशीर्वाद लेने आ सकते हैं। बाबा मस्तनाथ विवि की कार्यवाहक उप कुलाधिकपति डॉक्टर अंजना राव से अमर उजाला ने बातचीत की और विवि के कुलाधिपति एवं मठ के गद्दीनशीन महंत बाबा बालकनाथ की दिनचर्या के बारे में जाना।
बचपन से ही था मंदिर व गुरुओं के पास जाने का शौक
कुलाधिपति डॉक्टर अंजना राव ने बताया कि महंत बालकनाथ के पिता किसान हैं। वे दो भाई हैं, महंत बालकनाथ बड़े हैं। बचपन से ही उनको मंदिर व गुरुओं के पास जाने का शौक रहा है। छह साल की उम्र में महंत बालकनाथ अपने गुरु महंत चांदनाथ के पास आ गए थे। महंत चांदनाथ जब बीमार थे, उनकी देखभाल महंत बालकनाथ ने ही की थी।
हर रोज रात ढाई बजे करते हैं आरती
उनको आध्यात्मिक, शैक्षणिक व सामाजिक जीवन में तालमेल बनाकर चलना होता है। हर रोज रात ढ़ाई बजे से मठ में आरती शुरू हो जाती है। रात को चाहे महंत बालकनाथ कितनी भी देरी से आए हो, लेकिन समय पर उठकर आरती करते हैं। इसके बाद विवि के कामकाज का ब्यौरा लेते हैं। साथ ही साधु संतों के साथ मिलने के साथ-साथ आम लोगों के बीच रहते हैं। चलते-चलते चटनी-रोटी तक खा लेते हैं। उन्होंने बताया कि महंत बालकनाथ अभी राजस्थान सरकार के गठन में व्यस्त हैं। समय मिलते ही मठ आएंगे।
मठ में आ चुके हैं अमित शाह से लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
मस्तनाथ मठ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तक आ चुके हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो लगातार आते रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, बाबा रामदेव, जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर आचार्य अवधेशानंद संत समाज के लोग अक्तूबर माह में मठ में आए थे।