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Rohtak News: विज्ञापन के सृजन में विचारों का विशेष महत्व
Fri, 26 Apr 2024 05:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Fri, 26 Apr 2024 05:56 AM IST
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25सीटीके13 - महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आयोजित कार्यशाला म
रोहतक। विज्ञापन की दुनिया बाहर से आकर्षक लगती है। विज्ञापन जगत में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत के साथ क्रिएटिव विजुअलाइजेशन व इमोशनल कनेक्ट होना जरूरी है। विज्ञापन की दुनिया में शिखर तक पहुंचने के लिए जुनून व पागलपन (क्रिएटिव मैडनेस) जरूरी है। यह कहना है विज्ञापन प्रोफेशनल, क्रिएटिव एवं स्ट्रटीजिक कंसल्टेंट सुराजीत गुहा का। वे वीरवार को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आयोजित कार्यशाला में विज्ञापन क्षेत्र के बारे में ज्ञान व अनुभव साझा कर रहे थे। इसका विषय एडवरटाइजिंग करियर: द इनसाइड स्टोरी रहा।
उन्होंने कहा कि विज्ञापन किसी भी व्यक्ति प्रोडक्ट, सर्विसेज, इंस्टीट्यूशन की पहचान बनाने की कवायद है। विज्ञापन के जरिए प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई जाती है। विज्ञापन के सृजन में विचारों का विशेष महत्व है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में आज भी ओरिजनल आइडिया तथा क्रिएटिव आइडिया थिंकर का महत्व रहेगा, ऐसा उनका कहना था। उन्होंने विज्ञापन के जरिए ब्रांडिंग की प्रक्रिया भी विद्यार्थियों से साझा की।
पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार ने भारत में विज्ञापनों की विकास यात्रा को साझा किया। उन्होंने विज्ञापनों के लुभावने नारों का विशेष उल्लेख किया। विज्ञापन की ग्रोथ स्टोरी में टेलीविजन उद्योग के योगदान को रेखांकित किया। कार्यशाला समन्वयक प्राध्यापक सुनित मुखर्जी ने कार्यक्रम संचालन किया। उन्होंने आमंत्रित विशेषज्ञ का परिचय दिया। सुनित मुखर्जी ने कहा कि विज्ञापन का केवल व्यावसायिक महत्व ही नहीं, सामाजिक सरोकार भी महत्वपूर्ण है। इस मौके पर शोधार्थी रविकांत, कंवलजीत, जगरूप सिंह, कुलदीप, अजय कुमार, प्रिया, विनोद, आशु, साहिल, साएमा समेत विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि विज्ञापन किसी भी व्यक्ति प्रोडक्ट, सर्विसेज, इंस्टीट्यूशन की पहचान बनाने की कवायद है। विज्ञापन के जरिए प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई जाती है। विज्ञापन के सृजन में विचारों का विशेष महत्व है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में आज भी ओरिजनल आइडिया तथा क्रिएटिव आइडिया थिंकर का महत्व रहेगा, ऐसा उनका कहना था। उन्होंने विज्ञापन के जरिए ब्रांडिंग की प्रक्रिया भी विद्यार्थियों से साझा की।
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पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. हरीश कुमार ने भारत में विज्ञापनों की विकास यात्रा को साझा किया। उन्होंने विज्ञापनों के लुभावने नारों का विशेष उल्लेख किया। विज्ञापन की ग्रोथ स्टोरी में टेलीविजन उद्योग के योगदान को रेखांकित किया। कार्यशाला समन्वयक प्राध्यापक सुनित मुखर्जी ने कार्यक्रम संचालन किया। उन्होंने आमंत्रित विशेषज्ञ का परिचय दिया। सुनित मुखर्जी ने कहा कि विज्ञापन का केवल व्यावसायिक महत्व ही नहीं, सामाजिक सरोकार भी महत्वपूर्ण है। इस मौके पर शोधार्थी रविकांत, कंवलजीत, जगरूप सिंह, कुलदीप, अजय कुमार, प्रिया, विनोद, आशु, साहिल, साएमा समेत विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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