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Rohtak News: रूखी-सूखी खाकर एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियन बनीं सोनिका
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06सीटीके30...धावक सोनिका अभ्यास के दौरान। स्रोत: परिवार
विकास सैनी
रोहतक। लड़की का खेल मैदान पर आना ही चुनौती है। इस पर भी एथलेटिक्स। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति ने इस राह को कठिन बना दिया। शुरुआत के दिन भूली नहीं हूं। उस समय डाइट भले ही न मिली, लेकिन कड़ा अभ्यास जरूर करती थी। घर में रूखी-सूखी खाकर मुकाम हासिल किया।
अपनी मेहनत से पदक ही नहीं जीते, बल्कि अपनी परिस्थितियों को भी बदला है। अब रेलवे में क्लर्क हूं। अपने पैरों पर खड़ी हूं, इसलिए अब ओलंपिक में पदक जीतने के लिए जी जान से मेहनत कर रही हूं। यह कहना है भिवानी के शिवाडी हाल देव कॉलोनी निवासी धावक सोनिका परमार का। विश्व एथलेटिक्स दिवस की पूर्व संध्या पर धावक बेटी ने अमर उजाला से अपना संघर्ष साझा किया।
एमडीयू से स्नातक करने वाली सोनिका 10 हजार मीटर की धावक हैं। पिछले आठ साल से यहां अभ्यास में जुटी हैं। अब तक दो बार एशियन क्राॅस कंट्री चैंपियन बन चुकी है। इस बेटी ने नेपाल में कांस्य व हांगकांग में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2022 में जर्मनी में हुए वर्ल्ड रेलवे गेम्स में कांस्य पदक जीता। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्तर पर दो स्वर्ण, चार रजत व तीन कांस्य पदक जीत चुकी है। फिलहाल एशियन खेलों की तैयारी चल रही है। इसके बाद ओलंपिक में पदक जीतना लक्ष्य है।
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परिवार की पहली खिलाड़ी
सोनिका परिवार की पहली खिलाड़ी हैं। महिला के रूप में भी वह पहली बेटी हैं। इससे पूर्व अब तक कोई खेल मैदान में नहीं आया है। पिता धर्मवीर सिंह किसान हैं। मां निशो देवी गृहिणी हैं। बड़ी बहन मोनिका की शादी हो चुकी है। छोटा भाई नवजीत दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल हैं। एमडीयू के कोच रमेश सिंधु के पास अभ्यास कर अपना हुनर निखार रही इस बेटी को देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतना है।
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रोहतक। लड़की का खेल मैदान पर आना ही चुनौती है। इस पर भी एथलेटिक्स। परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति ने इस राह को कठिन बना दिया। शुरुआत के दिन भूली नहीं हूं। उस समय डाइट भले ही न मिली, लेकिन कड़ा अभ्यास जरूर करती थी। घर में रूखी-सूखी खाकर मुकाम हासिल किया।
अपनी मेहनत से पदक ही नहीं जीते, बल्कि अपनी परिस्थितियों को भी बदला है। अब रेलवे में क्लर्क हूं। अपने पैरों पर खड़ी हूं, इसलिए अब ओलंपिक में पदक जीतने के लिए जी जान से मेहनत कर रही हूं। यह कहना है भिवानी के शिवाडी हाल देव कॉलोनी निवासी धावक सोनिका परमार का। विश्व एथलेटिक्स दिवस की पूर्व संध्या पर धावक बेटी ने अमर उजाला से अपना संघर्ष साझा किया।
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एमडीयू से स्नातक करने वाली सोनिका 10 हजार मीटर की धावक हैं। पिछले आठ साल से यहां अभ्यास में जुटी हैं। अब तक दो बार एशियन क्राॅस कंट्री चैंपियन बन चुकी है। इस बेटी ने नेपाल में कांस्य व हांगकांग में स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 2022 में जर्मनी में हुए वर्ल्ड रेलवे गेम्स में कांस्य पदक जीता। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्तर पर दो स्वर्ण, चार रजत व तीन कांस्य पदक जीत चुकी है। फिलहाल एशियन खेलों की तैयारी चल रही है। इसके बाद ओलंपिक में पदक जीतना लक्ष्य है।
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परिवार की पहली खिलाड़ी
सोनिका परिवार की पहली खिलाड़ी हैं। महिला के रूप में भी वह पहली बेटी हैं। इससे पूर्व अब तक कोई खेल मैदान में नहीं आया है। पिता धर्मवीर सिंह किसान हैं। मां निशो देवी गृहिणी हैं। बड़ी बहन मोनिका की शादी हो चुकी है। छोटा भाई नवजीत दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल हैं। एमडीयू के कोच रमेश सिंधु के पास अभ्यास कर अपना हुनर निखार रही इस बेटी को देश के लिए ओलंपिक में पदक जीतना है।