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Rohtak News: धूम्रपान पर करने पर उत्पन्न होते हैं 300 प्रकार के केमिकल
Sun, 31 May 2026 11:59 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 31 May 2026 11:59 AM IST
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34-डॉ. सिद्धार्थ आर्य
रोहतक। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर तंबाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। पीजीआई के नशा मुक्ति केंद्र में कार्यरत प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ आर्य के अनुसार धूम्रपान के दौरान तंबाकू उच्च तापमान पर जलता है जिससे लगभग 300 प्रकार के रासायनिक पदार्थ उत्पन्न होते हैं।
ये हानिकारक रसायन सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें हाइड्रोकार्बन जैसे विषैले तत्व भी शामिल होते हैं, जो लंबे समय में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
डॉ. आर्य ने बताया कि लगातार धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को शुरुआत में हल्की खांसी होती है, लेकिन एक वर्ष के भीतर यह समस्या सुबह और शाम अधिक बढ़ने लगती है। अधिकांश लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करते हैं, जबकि यह फेफड़ों को हो रहे नुकसान का प्रारंभिक संकेत हो सकता है।
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उन्होंने बताया कि पीजीआई की ओपीडी में आने वाले प्रत्येक 100 मरीजों में लगभग 75 प्रतिशत किसी न किसी रूप में तंबाकू सेवन से प्रभावित होते हैं। इसके अलावा अस्पताल के अन्य विभागों से भी प्रतिदिन पांच से सात मरीज नशा मुक्ति केंद्र में रेफर किए जाते हैं।
नियमित उपचार और परामर्श का पालन करने वाले लगभग 30 प्रतिशत मरीज एक से तीन वर्षों के भीतर तंबाकू की लत से छुटकारा पाने में सफल हो रहे हैं।
बॉक्स : काउंसिलिंग और विशेष क्लीनिक से मिल रही राहत
पीजीआई में तंबाकू की लत से पीड़ित मरीजों का उपचार दवाइयों और काउंसिलिंग के माध्यम से किया जा रहा है। इसके लिए सप्ताह में एक दिन विशेष तंबाकू क्लीनिक संचालित किया जाता है। मरीजों को तीन से छह माह तक चलने वाले उपचार कार्यक्रम से जोड़ा जाता है, जिससे लत छोड़ने में सहायता मिलती है।
तंबाकू सेवन के प्रमुख लक्षण और दुष्प्रभाव
लगातार खांसी आना
होंठों का काला पड़ना
सांस संबंधी बीमारियां
फेफड़ों और मुंह का कैंसर
दांतों और मसूड़ों की समस्याएं
हृदय एवं श्वसन तंत्र पर गंभीर असर
निकोटिन नहीं, धुआं पहुंचाता ज्यादा नुकसान
डॉ. सिद्धार्थ आर्य के अनुसार तंबाकू में मौजूद निकोटिन मुख्य रूप से धूम्रपान की इच्छा उत्पन्न करता है, जबकि शरीर को सबसे अधिक नुकसान धूम्रपान से निकलने वाला धुआं पहुंचाता है। नशा मुक्ति केंद्र में निकोटिन युक्त गोलियां भी दी जाती हैं, जो धीरे-धीरे धूम्रपान की इच्छा कम करने में मदद करती हैं।
न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीक भी बन रही सहारा
तंबाकू की लत छोड़ने के लिए न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीक को भी प्रभावी माना जा रहा है। इस तकनीक में विशेष तरंगों के माध्यम से मस्तिष्क में धूम्रपान की इच्छा को कम करने का प्रयास किया जाता है। हालांकि यह सुविधा फिलहाल पीजीआई में उपलब्ध नहीं है, लेकिन भविष्य में इसे उपयोगी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
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ये हानिकारक रसायन सीधे फेफड़ों तक पहुंचकर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें हाइड्रोकार्बन जैसे विषैले तत्व भी शामिल होते हैं, जो लंबे समय में कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
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डॉ. आर्य ने बताया कि लगातार धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को शुरुआत में हल्की खांसी होती है, लेकिन एक वर्ष के भीतर यह समस्या सुबह और शाम अधिक बढ़ने लगती है। अधिकांश लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करते हैं, जबकि यह फेफड़ों को हो रहे नुकसान का प्रारंभिक संकेत हो सकता है।
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उन्होंने बताया कि पीजीआई की ओपीडी में आने वाले प्रत्येक 100 मरीजों में लगभग 75 प्रतिशत किसी न किसी रूप में तंबाकू सेवन से प्रभावित होते हैं। इसके अलावा अस्पताल के अन्य विभागों से भी प्रतिदिन पांच से सात मरीज नशा मुक्ति केंद्र में रेफर किए जाते हैं।
नियमित उपचार और परामर्श का पालन करने वाले लगभग 30 प्रतिशत मरीज एक से तीन वर्षों के भीतर तंबाकू की लत से छुटकारा पाने में सफल हो रहे हैं।
बॉक्स : काउंसिलिंग और विशेष क्लीनिक से मिल रही राहत
पीजीआई में तंबाकू की लत से पीड़ित मरीजों का उपचार दवाइयों और काउंसिलिंग के माध्यम से किया जा रहा है। इसके लिए सप्ताह में एक दिन विशेष तंबाकू क्लीनिक संचालित किया जाता है। मरीजों को तीन से छह माह तक चलने वाले उपचार कार्यक्रम से जोड़ा जाता है, जिससे लत छोड़ने में सहायता मिलती है।
तंबाकू सेवन के प्रमुख लक्षण और दुष्प्रभाव
लगातार खांसी आना
होंठों का काला पड़ना
सांस संबंधी बीमारियां
फेफड़ों और मुंह का कैंसर
दांतों और मसूड़ों की समस्याएं
हृदय एवं श्वसन तंत्र पर गंभीर असर
निकोटिन नहीं, धुआं पहुंचाता ज्यादा नुकसान
डॉ. सिद्धार्थ आर्य के अनुसार तंबाकू में मौजूद निकोटिन मुख्य रूप से धूम्रपान की इच्छा उत्पन्न करता है, जबकि शरीर को सबसे अधिक नुकसान धूम्रपान से निकलने वाला धुआं पहुंचाता है। नशा मुक्ति केंद्र में निकोटिन युक्त गोलियां भी दी जाती हैं, जो धीरे-धीरे धूम्रपान की इच्छा कम करने में मदद करती हैं।
न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीक भी बन रही सहारा
तंबाकू की लत छोड़ने के लिए न्यूरोमॉड्यूलेशन तकनीक को भी प्रभावी माना जा रहा है। इस तकनीक में विशेष तरंगों के माध्यम से मस्तिष्क में धूम्रपान की इच्छा को कम करने का प्रयास किया जाता है। हालांकि यह सुविधा फिलहाल पीजीआई में उपलब्ध नहीं है, लेकिन भविष्य में इसे उपयोगी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।