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Rohtak News: सुस्त चाल...24 दिन में सिर्फ 23 किशोरियों लगीं सर्वाइकल कैंसर से बचाव की वैक्सीन
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रोहतक। जिले में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू किए गए एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान सुस्त चाल से चल रहा है। नागरिक अस्पताल में 24 दिन में केवल 23 किशोरियों को ही वैक्सीन लगा पाया है। इस तरह प्रतिदिन औसतन केवल एक किशोरी को ही वैक्सीन लग रही है।
इनमें से करीब 15 वैक्सीन तो पहले दिन ही लग गई थीं। इस तरह 23 दिन में केवल नौ वैक्सीन लग पाई है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता की कमी व भ्रांतियों के कारण किशोरियां व उनके परिवार वाले वैक्सीन लगवाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
आमजन को लगता है कि ये नई वैक्सीन है। इसे लगवाने से दिक्कत हो सकती है। यह वैक्सीन कई साल से मार्केट में उपलब्ध है। महंगी होने के कारण हर किसी की पहुंच सीमित है। बाहर से लगवाने पर वैक्सीन का खर्च 4000 से 5000 रुपये तक पड़ता है। सरकार की ओर से इसे निशुल्क लगाया जा रहा है।
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अभियान के तहत जिले को कुल 2000 वैक्सीन किशोरियों को लगवाने के लिए मिली हैं। विभाग को जनसंख्या के कुछ प्रतिशत के आधार पर इन वैक्सीन लगाने के निर्देश मिले थे।
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सीएचसी व सब डिविजन अस्पतालाें में भी उपलब्ध
किशोरियों की सुविधाओं को देखते हुए विभाग की ओर से छह सीएचसी व दो सब डिविजन अस्पतालाें में इसकी सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। इसमें चिड़ी, लाखनमाजरा, मदीना, सांपला, कहानौर व किलोई सीएचसी सेंटर शामिल हैं। महम व कलानौर अस्पताल में भी यह सुविधा उपलब्ध है।
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पोर्टल भी फेल होता नजर आ रहा
एचपीवी वैक्सीनेशन के लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी फेल होती नजर आ रही है। अब तक हुए वैक्सीनेशन में सभी ने अस्पताल पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराया है। सरकार ने ऑनलाइन व्यवस्था भी बनाई हुई है।
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वर्जन
जागरूकता की कमी के कारण किशोरियां व उनके परिवार वाले वैक्सीनेशन से पीछे हट रहे हैं। इस कारण अब तक 23 वैक्सीन ही लग पाई है। किसी ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। विभाग की तरफ से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. प्रतिभा खत्री, जिला वैक्सीनेशन नोडल अधिकारी, रोहतक
रोहतक। जिले में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए शुरू किए गए एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान सुस्त चाल से चल रहा है। नागरिक अस्पताल में 24 दिन में केवल 23 किशोरियों को ही वैक्सीन लगा पाया है। इस तरह प्रतिदिन औसतन केवल एक किशोरी को ही वैक्सीन लग रही है।
इनमें से करीब 15 वैक्सीन तो पहले दिन ही लग गई थीं। इस तरह 23 दिन में केवल नौ वैक्सीन लग पाई है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता की कमी व भ्रांतियों के कारण किशोरियां व उनके परिवार वाले वैक्सीन लगवाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
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आमजन को लगता है कि ये नई वैक्सीन है। इसे लगवाने से दिक्कत हो सकती है। यह वैक्सीन कई साल से मार्केट में उपलब्ध है। महंगी होने के कारण हर किसी की पहुंच सीमित है। बाहर से लगवाने पर वैक्सीन का खर्च 4000 से 5000 रुपये तक पड़ता है। सरकार की ओर से इसे निशुल्क लगाया जा रहा है।
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अभियान के तहत जिले को कुल 2000 वैक्सीन किशोरियों को लगवाने के लिए मिली हैं। विभाग को जनसंख्या के कुछ प्रतिशत के आधार पर इन वैक्सीन लगाने के निर्देश मिले थे।
सीएचसी व सब डिविजन अस्पतालाें में भी उपलब्ध
किशोरियों की सुविधाओं को देखते हुए विभाग की ओर से छह सीएचसी व दो सब डिविजन अस्पतालाें में इसकी सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। इसमें चिड़ी, लाखनमाजरा, मदीना, सांपला, कहानौर व किलोई सीएचसी सेंटर शामिल हैं। महम व कलानौर अस्पताल में भी यह सुविधा उपलब्ध है।
पोर्टल भी फेल होता नजर आ रहा
एचपीवी वैक्सीनेशन के लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी फेल होती नजर आ रही है। अब तक हुए वैक्सीनेशन में सभी ने अस्पताल पहुंचकर रजिस्ट्रेशन कराया है। सरकार ने ऑनलाइन व्यवस्था भी बनाई हुई है।
वर्जन
जागरूकता की कमी के कारण किशोरियां व उनके परिवार वाले वैक्सीनेशन से पीछे हट रहे हैं। इस कारण अब तक 23 वैक्सीन ही लग पाई है। किसी ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। विभाग की तरफ से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. प्रतिभा खत्री, जिला वैक्सीनेशन नोडल अधिकारी, रोहतक