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पुराने रोहतक की देशवाली बेल्ट के कद्दावर नेता रहे श्रीकृष्ण हुड्डा

Sun, 12 Apr 2020 11:27 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 12 Apr 2020 11:27 PM IST
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Shrikrishna Hooda is the tallest leader of Rohtak's Deshwali belt
बरोदा विधायक 75 वर्षीय श्रीकृष्ण हुड्डा देशवाली बेल्ट यानी पुराने रोहतक के कद्दावर नेता रहे। राजनीति के सफर में उन्होंने कई मुकाम हासिल किए। एक बार उपप्रधानमंत्री तक रहे जननायक ताऊ देवीलाल का सिपाही बनकर श्रीकृष्ण हुड्डा ने किलोई हलके से 1987 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हराया तो 2005 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए विधायक की कुर्सी छोड़ दी। वे तीन बार किलोई तो तीन बार बरोदा हलके से विधायक रहे। अब लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनका रविवार को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया।
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रोहतक की राजनीति में हुड्डा परिवार का दबदबा रहा है। इसमें खिड़वाली गांव निवासी श्रीकृष्ण हुड्डा का भी अहम योगदान रहा। श्रीकृष्ण हुड्डा ने अपनी राजनीति की शुरुआत ताऊ देवीलाल की पार्टी लोकदल से की थी। देवीलाल ने 1987 में श्रीकृष्ण हुड्डा को किलोई हलके से टिकट दिया। श्रीकृष्ण का मुकाबला कांग्रेस प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह हुड्डा से हुआ। श्रीकृष्ण ने 15 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल कर लगातार दूसरी बार हलके में कांग्रेस को हराया, क्योंकि 1982 में हलके में लोकदल के हरिचंद हुड्डा ने कांग्रेस के भूपेंद्र हुड्डा को हराया था। हालांकि 1987 के बाद 1991 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा की जगह हलके से कृष्णमूर्ति हुड्डा को टिकट दिया, क्योंकि भूपेंद्र हुड्डा ने लोकसभा का चुनाव लड़ा और ताऊ देवीलाल को हराया। हलके में कृष्णमूर्ति हुड्डा भी जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे श्रीकृष्ण हुड्डा को हराने में कामयाब रहे। 1996 के विधानसभा चुनाव में श्रीकृष्ण हुड्डा ने पिछली हार का बदला लेते हुए हविपा के रामफूल को हराया, जबकि कांग्रेस के कृष्णमूर्ति हुड्डा तीसरे स्थान पर रहे। श्रीकृष्ण हुड्डा ने 2000 का चुनाव नहीं लड़ा। जब हलके से भूपेंद्र हुड्डा विधायक बने। 2005 में भूपेंद्र हुड्डा जहां सांसद बने तो श्रीकृष्ण हुड्डा किलोई हलके से विधायक बने। अचानक इसी समय हलके ही नहीं, प्रदेश व कांग्रेस की राजनीति में अहम बदलाव आया। सोनिया गांधी ने पूर्व सीएम भजनलाल की जगह भूपेंद्र हुड्डा को मुख्यमंत्री बना दिया। हुड्डा ने सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया। उधर, श्रीकृष्ण हुड्डा ने मुख्यमंत्री बने भूपेंद्र हुड्डा के लिए किलोई हलके से त्यागपत्र देकर सीट खाली कर दी। उस समय कयास लगाए जा रहे थे कि श्रीकृष्ण हुड्डा को कांग्रेस रोहतक लोकसभा का टिकट देगी, लेकिन कांग्रेस ने भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा को टिकट दिया। दीपेंद्र जीतकर लोकसभा में पहुंचने में कामयाब रहे। हालांकि 2009, 2014 व 2019 में कांग्रेस ने सोनीपत के बरोदा हलके से श्रीकृष्ण हुड्डा को टिकट दिया। तीनों बार श्रीकृष्ण हुड्डा जीत हासिल करने में कामयाब रहे। पिछली साल उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी योगेश्वर दत्त को हराया था।
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