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Rohtak News: महिलाओं के लिए सुरक्षा...समान अवसर व सम्मान ही सामाजिक न्याय
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5-रोहतक के आईएमटी स्थित कार्यालय में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में पह
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। महिलाओं के लिए संविधान में कानून है और अधिकार भी। महिलाओं को सामाजिक न्याय तब मिलेगा, जब सुरक्षा, समान अवसर, आर्थिक स्वतंत्रता, सम्मान व इच्छा हों। ये बातें बतौर मुख्य वक्ता एमडीयू के विधि विभाग की अध्यक्ष प्रो. सोनू देहमिवाल ने अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में कहीं।
आईएमटी स्थित कार्यालय में वीरवार को शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक-धार्मिक समेत विभिन्न संगठनों से जुड़ी प्रबुद्ध महिलाओं ने सामाजिक न्याय विषय पर अपनी राय रखी। प्रो. सोनू देहमिवाल ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीति न्याय हैं। तीनों न्याय महिलाओं के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना पुरुषों के लिए जरूरी।
कहा, कानून की दृष्टि से तो न्याय मिल गया लेकिन सामाजिक सोच से नहीं मिला। इसके लिए जागरूकता की जरूरत है। इसके लिए शुरुआत परिवार से ही करनी होगी।
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महिलाएं खुद को पुरुषों के बराबर समझें। बच्चे को पैदा करना...ये नहीं कि मां ही परवरिश करेगी। पुरुष भी संभाल सकते हैं। पुरुषों को जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
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- डॉ. आरती साहू, गायनेकोलॉजिस्ट
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महिलाएं आगे आ रही हैं लेकिन सामाजिक सोच में परिवर्तन की आवश्यकता है। यह शिक्षा से ही होगा। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना चाहिए।
- वंदना राजौरिया, स्त्री शक्ति संगठन
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महिलाओं के मन में भय होता है। वो अपने स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बताने से भी डरती हैं। न्याय के लिए भी माताएं ही बेटियों को समझा सकती हैं।
- डॉ. तरुणा सचदेवा, स्त्री रोग विशेषज्ञ
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वास्तव में महिलाएं जूझ रही हैं। जहां सीधे परिवार व पुलिस को नहीं बता पाती, उतना वह संगठन को बता देती हैं। महिलाओं को संगठनों से जुड़ना चाहिए।
- ममता शर्मा, प्रधान, स्त्री शक्ति संगठन
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लंबा केस चलने के कारण महिलाएं मानसिक रूप से हार जाती हैं। कोर्ट में न्याय सभी को मिलता है लेकिन उसके लिए धैर्य रखने की जरूरत है।
- किरण श्योराण, अधिवक्ता
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ऐसी कोई समस्या नहीं जिससे निपटा नहीं जा सकता हो। सफलता के लिए संघर्ष और समय लगता है। कोर्ट भी स्टेप बाय स्टेप कार्य करती है।
- रीना लौरा धनखड़, अधिवक्ता
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बेटे-बेटियों की जैसी परवरिश की जाएगी, वैसा ही आगे काम करेंगे। अपने घर से अच्छा सीखेंगे तो अपने आप समाज भी सही होगा। मां पहला गुरु होती है।
- डाॅ. निधि राठी, शिक्षिका
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महिलाओं व पुरुषों के नजरिए में परिवर्तन लाने की जरूरत है। महिलाओं को मजबूत होना है तो मजबूत बनना होगा।
- डॉ. नीलम मंगला, सहायक प्रोफेसर मनोविज्ञान, महिला महाविद्यालय रोहतक
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परिवार का माहौल सही होगा तो समाज सही होगा। लोग एक-दूसरे से सीखते हैं। महिलाओं के विषय पर काउंसिलिंग होनी चाहिए।
- कविता देवी, प्राध्यापिका
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सही और गलत की जानकारी बच्चों को शुरू से देनी चाहिए। अभिभावकों व स्कूलों के अंदर बच्चों को जागरूक करना चाहिए।
- मोनिका, शिक्षिका
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बेटियों को किसी प्रकार की समस्या है तो माताओं को उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्हें समझाना चाहिए। अपने अनुभव भी साझा करने चाहिए।
- अर्चना नांदल, नर्सिंग अधिकारी
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रोहतक। महिलाओं के लिए संविधान में कानून है और अधिकार भी। महिलाओं को सामाजिक न्याय तब मिलेगा, जब सुरक्षा, समान अवसर, आर्थिक स्वतंत्रता, सम्मान व इच्छा हों। ये बातें बतौर मुख्य वक्ता एमडीयू के विधि विभाग की अध्यक्ष प्रो. सोनू देहमिवाल ने अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता कार्यक्रम में कहीं।
आईएमटी स्थित कार्यालय में वीरवार को शिक्षा, चिकित्सा, सामाजिक-धार्मिक समेत विभिन्न संगठनों से जुड़ी प्रबुद्ध महिलाओं ने सामाजिक न्याय विषय पर अपनी राय रखी। प्रो. सोनू देहमिवाल ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीति न्याय हैं। तीनों न्याय महिलाओं के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना पुरुषों के लिए जरूरी।
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कहा, कानून की दृष्टि से तो न्याय मिल गया लेकिन सामाजिक सोच से नहीं मिला। इसके लिए जागरूकता की जरूरत है। इसके लिए शुरुआत परिवार से ही करनी होगी।
महिलाएं खुद को पुरुषों के बराबर समझें। बच्चे को पैदा करना...ये नहीं कि मां ही परवरिश करेगी। पुरुष भी संभाल सकते हैं। पुरुषों को जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
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- डॉ. आरती साहू, गायनेकोलॉजिस्ट
महिलाएं आगे आ रही हैं लेकिन सामाजिक सोच में परिवर्तन की आवश्यकता है। यह शिक्षा से ही होगा। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना चाहिए।
- वंदना राजौरिया, स्त्री शक्ति संगठन
महिलाओं के मन में भय होता है। वो अपने स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बताने से भी डरती हैं। न्याय के लिए भी माताएं ही बेटियों को समझा सकती हैं।
- डॉ. तरुणा सचदेवा, स्त्री रोग विशेषज्ञ
वास्तव में महिलाएं जूझ रही हैं। जहां सीधे परिवार व पुलिस को नहीं बता पाती, उतना वह संगठन को बता देती हैं। महिलाओं को संगठनों से जुड़ना चाहिए।
- ममता शर्मा, प्रधान, स्त्री शक्ति संगठन
लंबा केस चलने के कारण महिलाएं मानसिक रूप से हार जाती हैं। कोर्ट में न्याय सभी को मिलता है लेकिन उसके लिए धैर्य रखने की जरूरत है।
- किरण श्योराण, अधिवक्ता
ऐसी कोई समस्या नहीं जिससे निपटा नहीं जा सकता हो। सफलता के लिए संघर्ष और समय लगता है। कोर्ट भी स्टेप बाय स्टेप कार्य करती है।
- रीना लौरा धनखड़, अधिवक्ता
बेटे-बेटियों की जैसी परवरिश की जाएगी, वैसा ही आगे काम करेंगे। अपने घर से अच्छा सीखेंगे तो अपने आप समाज भी सही होगा। मां पहला गुरु होती है।
- डाॅ. निधि राठी, शिक्षिका
महिलाओं व पुरुषों के नजरिए में परिवर्तन लाने की जरूरत है। महिलाओं को मजबूत होना है तो मजबूत बनना होगा।
- डॉ. नीलम मंगला, सहायक प्रोफेसर मनोविज्ञान, महिला महाविद्यालय रोहतक
परिवार का माहौल सही होगा तो समाज सही होगा। लोग एक-दूसरे से सीखते हैं। महिलाओं के विषय पर काउंसिलिंग होनी चाहिए।
- कविता देवी, प्राध्यापिका
सही और गलत की जानकारी बच्चों को शुरू से देनी चाहिए। अभिभावकों व स्कूलों के अंदर बच्चों को जागरूक करना चाहिए।
- मोनिका, शिक्षिका
बेटियों को किसी प्रकार की समस्या है तो माताओं को उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्हें समझाना चाहिए। अपने अनुभव भी साझा करने चाहिए।
- अर्चना नांदल, नर्सिंग अधिकारी

5-रोहतक के आईएमटी स्थित कार्यालय में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में पह