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किसान आंदोलन के समर्थन में सेकेंडरी एजुकेश डायरेक्टर निलंबित
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किसान आंदोलन का समर्थन करना सेकेंडरी एजूकेशन के डायरेक्टर कम प्रोग्राम आफिसर एवं लेक्चरर वेलफेयर एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार डॉ. अजय बल्हारा को भारी पड़ा। पीजीटी बायोलाजी के शिक्षक ने सोशल मीडिया पर आंदोलन के समर्थन में पोस्ट डाली थी। इस बारे में मुख्यालय ने निलंबन के निर्देश जारी किए हैं। इस पर एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर करते हुए अभिव्यक्ति की आजादी का हनन करने का आरोप लगाया है।
सरकारी चिट्ठी में लिखा है कि डॉ. अजय बल्हारा को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन के दौरान वे जीवन निर्वाह भत्ता ले सकते हैं। इस दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी सिरसा कार्यालय रहेगा। वे बगैर किसी अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन के समर्थन में डाली गई पोस्ट के चलते किए जाने की चर्चा है। इसके चलते लेक्चरर वेलफेयर एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर करते हुए इसे अभिव्यक्ति की आजादी का हनन बताया है। एसोसिएशन के संरक्षक सुनील नेहरा व राज्य प्रधान अनिल अहलावत ने कहा कि डॉ. अजय बल्हारा एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार हैं। किसान आंदोलन के समर्थन में पोस्ट डालने पर उन्हें सस्पेंड किया गया है। यह गलत है। अभिव्यक्ति की आजादी हमें किसी बात को कहने या समर्थन करने का अधिकार देती है। सरकार के शिक्षक के निलंबन का कदम उठाकर अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने का कृत्य किया है। यूनियन इसका पुरजोर विरोध करती है। साथ ही सरकार से मांग करती है कि तुरंत प्रभाव से निलंबन वापस लेते हुए शिक्षक को बहाल किया जाए। ऐसा नहीं होता है तो हम सभी को भी निलंबित किया जाए। इस संबंध में शुक्रवार को अधिकारियों से मुलाकात की जाएगी।
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सरकारी चिट्ठी में लिखा है कि डॉ. अजय बल्हारा को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन के दौरान वे जीवन निर्वाह भत्ता ले सकते हैं। इस दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी सिरसा कार्यालय रहेगा। वे बगैर किसी अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन के समर्थन में डाली गई पोस्ट के चलते किए जाने की चर्चा है। इसके चलते लेक्चरर वेलफेयर एसोसिएशन ने नाराजगी जाहिर करते हुए इसे अभिव्यक्ति की आजादी का हनन बताया है। एसोसिएशन के संरक्षक सुनील नेहरा व राज्य प्रधान अनिल अहलावत ने कहा कि डॉ. अजय बल्हारा एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार हैं। किसान आंदोलन के समर्थन में पोस्ट डालने पर उन्हें सस्पेंड किया गया है। यह गलत है। अभिव्यक्ति की आजादी हमें किसी बात को कहने या समर्थन करने का अधिकार देती है। सरकार के शिक्षक के निलंबन का कदम उठाकर अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने का कृत्य किया है। यूनियन इसका पुरजोर विरोध करती है। साथ ही सरकार से मांग करती है कि तुरंत प्रभाव से निलंबन वापस लेते हुए शिक्षक को बहाल किया जाए। ऐसा नहीं होता है तो हम सभी को भी निलंबित किया जाए। इस संबंध में शुक्रवार को अधिकारियों से मुलाकात की जाएगी।
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