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एसडीओ-जेई हड़ताल पर, शहर फिर न बन जाए 'जलनगरी'
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धरना देते जन स्वास्थ्य विभाग के जेई और एसडीओ। अमर उजाला
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रोहतक। जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ व जूनियर इंजीनियर शनिवार को भी फोन बंद करके बेमियादी हड़ताल पर हैं। यानी सीवर अथवा पेयजल से संबंधित कोई भी समस्या उनके पास निदान होने के लिए नहीं पहुंचेगी। ऐसे में 30 जून जैसी बारिश हुई तो शहर का डूबना (जलभराव) तय है।
वहीं, सीवर कर्मियों ने समर्थन देते हुए जल्द हड़ताल में शामिल होने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में शहरवासियों के सामने विकट की समस्या पैदा हो सकती है। वहीं, आंदोलित इंजीनियरों ने एलान किया है कि जब तक जूनियर इंजीनियर की बहाली नहीं होगी तब तक हड़ताल पर रहेंगे।
धरने की अध्यक्षता करते हुए डिप्लोमा इंजीनियर एसोसिएशन के राज्य प्रधान राजेश रुहिल ने आरोप लगाया कि चीफ इंजीनियर प्रदीप पूनिया ने कई सर्किल के एस्टीमेट रोक कर रखे हैं जिनका खामियाजा फील्ड में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों को झेलना पड़ रहा है। रोहतक, दादरी, भिवानी आदि जिलों का भी कार्यभार उनके पास है, वहां भी दुर्गति है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि न सिर्फ चीफ इंजीनियर को हटाया जाए बल्कि उनके खिलाफ जांच भी कराई जाए। राज्य प्रधान ने कहा कि जानकारी मिली है कि दादरी उपायुक्त ने भी चीफ इंजीनियर की ढुलमुल कार्यशैली के बारे में सरकार को पत्र लिखा है।
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वहीं एसडीओ और जूनियर इंजीनियरों के बेमियादी हड़ताल पर होने और कभी भी बारिश होने से शहर में जबरदस्त जलभराव की आशंका है। तेज बारिश होने की स्थिति में जलभराव से शहर की व्यवस्था चरमराने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसपर राज्य प्रधान का कहना है कि हमें खेद है कि बारिश में जलभराव की दिक्कत जनता को होगी। हम अपने मान-सम्मान के लिए सेवा में हैं। ऐसा नहीं होगा कि कोई अपमानित करता रहे और हम काम करें। सरकार को चाहिए कि चीफ इंजीनियर के खिलाफ जांच करके कार्रवाई करें और निलंबित जेई को बहाल किया जाए।
चीफ इंजीनियर के खिलाफ होनी चाहिए जांच : रुहिल
सिस्टम फेल होने से जलभराव हुआ। इसके लिए अफसर जिम्मेदार हैं और ठीकरा जेई पर फोड़ दिया है। पहले ही उच्चाधिकारियों को चेताया था कि मशीन 20-25 साल पुरानी है जिनसे दिक्कत होगी। ये बात डिप्लोमा इंजीनियर एसोसिएशन के राज्य प्रधान राजेश रुहिल ने कही। राज्य प्रधान ने बताया कि मार्च में ही एस्टीमेट बनाकर भेजा था, जो पास नहीं हुआ। सरकार को चीफ इंजीनियर के खिलाफ जांच करानी चाहिए। बिना बजट के इंजीनियर कैसे काम करेगा। मशीन चाहिए और लेबर भी। लेबर को आठ-आठ माह से वेतन नहीं मिला है। ठेकेदारों ने खुर्द मोर्चा खोल रखा है। यदि जल्द साथी जेई को बहाल नहीं किया तो 18 विभागों के इंजीनियर धरने में शामिल होंगे। कार्यकारी अभियंता और अधीक्षण अभियंता ने अपनी गाड़ी में ईंधन भरवाने के लिए पंप ऑथराइज कर रखे हैं। इनकी जिम्मेदारी बनती है कि डिस्पोजल के लिए भी पंप ऑथराइज करते। अधीक्षण अभियंता ने जेई के निलंबन की संस्तुति की, उनके खिलाफ भी जल्द मोर्चा खोलेंगे।
एसडीओ व जेई के फोन बंद, कहां शिकायत करे जनता
आंदोलित एसडीओ और जेई सुबह नौ बजे से देर शाम धरना खत्म होने तक अपने मोबाइल फोन बंद रखे हुए हैं। उनका कहना है कि वह कोई भी शिकायत नहीं सुनेंगे और न समाधान करेंगे। ऐसे में जनता के सामने जलभराव और पेयजल की समस्या होने पर शिकायत दर्ज कराने में दिक्कत हो रही है। वहीं, मानसरोवर स्थित जलघर में बना कंट्रोल रूम साप्ताहिक अवकाश की वजह से शनिवार को बंद रहा और रविवार को भी बंद रहेगा।
पत्र में जेई के निलंबन का कारण नहीं
आंदोलित इंजीनियरों का कहना है कि इंजीनियरिंग इन चीफ असीम खन्ना की तरफ से जारी निलंबन पत्र में कोई वजह अंकित नहीं की है। बिना कारण बताए जूनियर इंजीनियर अजय को निलंबित करना गलत है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार निलंबन से पहले कारण बताओ नोटिस आदि देने चाहिए थे, वह भी नहीं दिया।
सीवर सफाईकर्मियों ने धरना स्थल पर आकर दिया समर्थन
जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ व जूनियर इंजीनियरों के धरना स्थल पर सीवर सफाईकर्मियों ने आकर अपना समर्थन दिया। प्रधान सुनील ने बताया कि हड़ताल को समर्थन दिया है। यदि धरना जारी रहा तो जल्द अगला कदम उठाएंगे।
वर्जन-
शिकायत के लिए कंट्रोल रूम एक्सईएन कार्यालय में चल रहा है। राज्य प्रधान ने जो आरोप लगाए हैं वह निराधार हैं।
- राजीव गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग
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वहीं, सीवर कर्मियों ने समर्थन देते हुए जल्द हड़ताल में शामिल होने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में शहरवासियों के सामने विकट की समस्या पैदा हो सकती है। वहीं, आंदोलित इंजीनियरों ने एलान किया है कि जब तक जूनियर इंजीनियर की बहाली नहीं होगी तब तक हड़ताल पर रहेंगे।
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धरने की अध्यक्षता करते हुए डिप्लोमा इंजीनियर एसोसिएशन के राज्य प्रधान राजेश रुहिल ने आरोप लगाया कि चीफ इंजीनियर प्रदीप पूनिया ने कई सर्किल के एस्टीमेट रोक कर रखे हैं जिनका खामियाजा फील्ड में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों को झेलना पड़ रहा है। रोहतक, दादरी, भिवानी आदि जिलों का भी कार्यभार उनके पास है, वहां भी दुर्गति है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि न सिर्फ चीफ इंजीनियर को हटाया जाए बल्कि उनके खिलाफ जांच भी कराई जाए। राज्य प्रधान ने कहा कि जानकारी मिली है कि दादरी उपायुक्त ने भी चीफ इंजीनियर की ढुलमुल कार्यशैली के बारे में सरकार को पत्र लिखा है।
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वहीं एसडीओ और जूनियर इंजीनियरों के बेमियादी हड़ताल पर होने और कभी भी बारिश होने से शहर में जबरदस्त जलभराव की आशंका है। तेज बारिश होने की स्थिति में जलभराव से शहर की व्यवस्था चरमराने से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसपर राज्य प्रधान का कहना है कि हमें खेद है कि बारिश में जलभराव की दिक्कत जनता को होगी। हम अपने मान-सम्मान के लिए सेवा में हैं। ऐसा नहीं होगा कि कोई अपमानित करता रहे और हम काम करें। सरकार को चाहिए कि चीफ इंजीनियर के खिलाफ जांच करके कार्रवाई करें और निलंबित जेई को बहाल किया जाए।
चीफ इंजीनियर के खिलाफ होनी चाहिए जांच : रुहिल
सिस्टम फेल होने से जलभराव हुआ। इसके लिए अफसर जिम्मेदार हैं और ठीकरा जेई पर फोड़ दिया है। पहले ही उच्चाधिकारियों को चेताया था कि मशीन 20-25 साल पुरानी है जिनसे दिक्कत होगी। ये बात डिप्लोमा इंजीनियर एसोसिएशन के राज्य प्रधान राजेश रुहिल ने कही। राज्य प्रधान ने बताया कि मार्च में ही एस्टीमेट बनाकर भेजा था, जो पास नहीं हुआ। सरकार को चीफ इंजीनियर के खिलाफ जांच करानी चाहिए। बिना बजट के इंजीनियर कैसे काम करेगा। मशीन चाहिए और लेबर भी। लेबर को आठ-आठ माह से वेतन नहीं मिला है। ठेकेदारों ने खुर्द मोर्चा खोल रखा है। यदि जल्द साथी जेई को बहाल नहीं किया तो 18 विभागों के इंजीनियर धरने में शामिल होंगे। कार्यकारी अभियंता और अधीक्षण अभियंता ने अपनी गाड़ी में ईंधन भरवाने के लिए पंप ऑथराइज कर रखे हैं। इनकी जिम्मेदारी बनती है कि डिस्पोजल के लिए भी पंप ऑथराइज करते। अधीक्षण अभियंता ने जेई के निलंबन की संस्तुति की, उनके खिलाफ भी जल्द मोर्चा खोलेंगे।
एसडीओ व जेई के फोन बंद, कहां शिकायत करे जनता
आंदोलित एसडीओ और जेई सुबह नौ बजे से देर शाम धरना खत्म होने तक अपने मोबाइल फोन बंद रखे हुए हैं। उनका कहना है कि वह कोई भी शिकायत नहीं सुनेंगे और न समाधान करेंगे। ऐसे में जनता के सामने जलभराव और पेयजल की समस्या होने पर शिकायत दर्ज कराने में दिक्कत हो रही है। वहीं, मानसरोवर स्थित जलघर में बना कंट्रोल रूम साप्ताहिक अवकाश की वजह से शनिवार को बंद रहा और रविवार को भी बंद रहेगा।
पत्र में जेई के निलंबन का कारण नहीं
आंदोलित इंजीनियरों का कहना है कि इंजीनियरिंग इन चीफ असीम खन्ना की तरफ से जारी निलंबन पत्र में कोई वजह अंकित नहीं की है। बिना कारण बताए जूनियर इंजीनियर अजय को निलंबित करना गलत है। उन्होंने बताया कि नियमानुसार निलंबन से पहले कारण बताओ नोटिस आदि देने चाहिए थे, वह भी नहीं दिया।
सीवर सफाईकर्मियों ने धरना स्थल पर आकर दिया समर्थन
जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ व जूनियर इंजीनियरों के धरना स्थल पर सीवर सफाईकर्मियों ने आकर अपना समर्थन दिया। प्रधान सुनील ने बताया कि हड़ताल को समर्थन दिया है। यदि धरना जारी रहा तो जल्द अगला कदम उठाएंगे।
वर्जन-
शिकायत के लिए कंट्रोल रूम एक्सईएन कार्यालय में चल रहा है। राज्य प्रधान ने जो आरोप लगाए हैं वह निराधार हैं।
- राजीव गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग