फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   'Scrub typhus' found the first suspected patient in the state

‘स्क्रब टायफस’ का प्रदेश में पहला संदिग्ध मरीज मिला

Sat, 03 Aug 2019 03:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 03 Aug 2019 03:00 AM IST
विज्ञापन
'Scrub typhus' found the first suspected patient in the state
बरसात के मौसम में मच्छर जनित डेंगू, मलेरिया के चक्कर में ‘स्क्रब टायफस’ बीमारी को नजरअंदाज करना जीवन को खतरे में डालने जैसा है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में पहले ही प्रदेशभर में हाई अलर्ट जारी कर रखा है। शुक्रवार को शहर के एक निजी अस्पताल में स्क्रब टायफस का एक संदिग्ध मरीज सामने आया है। इस संबंध में निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने पीजीआईएमएस में एक्सपर्ट से विचार-विमर्श कर मरीज का उपचार शुरू कर दिया है।
विज्ञापन

पीजीआईएमएस के पीसीसीएम विभागाध्यक्ष एव स्क्रब टाइफस एक्सपर्ट डॉ. ध्रुव चौधरी के अनुसार वर्ष 2007-08 में इस बीमारी की प्रदेश में पहली बार पहचान हुई थी। 2013 में इस बीमारी को कोई मानने को भी तैयार नहीं था, लेकिन 20 मरीजों की पुष्टि हुई थी और इसमें तीन की मौत भी हुई थी। अगस्त से नवंबर माह में इस बीमारी के होने का अधिक खतरा रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में हाई अलर्ट जारी किया है। यह बीमारी मुख्य रूप से जंगल, हरियाली, बाग में मिलने वाले कीट व जानवरों में मिलने वाले कीट के काटने से होती है। डेंगू, मलेरिया जैसे बीमार के लक्षण मिलने के कारण डॉक्टर भी इसकी पहचान नहीं कर पाते। इसलिए उपचार करने वाले डॉक्टरों को भी इस मौसम में इस बीमारी को ध्यान में रख कर जांच करवानी चाहिए और उपचार करना चाहिए। 2018 में अकेले पीजीआईएमएस में इसके 60 मरीजों का पंजीकरण हुआ था।
विज्ञापन

समय पर उपचार न हो तो हो जाती है खतरनाक
डॉ. ध्रुव चौधरी बताते हैं कि यह बीमारी सात से आठ दिन मरीज को प्रभावित करती है। इसमें मरीज को डोक्सीसाइकलिन दी जाती है। इसकी जांच के लिए कार्ड टेस्ट व एलाइजा जांच होती है। यह जांच पीजीआईएमएस के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में होती है। यह कीट अकसर गर्म व मॉस्चर वाली जगह पर काटता है। इस बीमारी का यदि समय पर उपचार न हो तो यह खतरनाक हो जाता है और मल्टी आर्गन फेल कर मरीज के जीवन को खतरे में डाल देता है। इसका वायरस रक्त वाहिकाओं में फैल कर शरीर के मुख्य अंगों को ब्लाक कर देता है। इससे शरीर के अहम अंग काम करना बंद करने लगते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

लक्षण : बुखार के कारणों का पता न चल पाना और बुखार 103 से 104 तक रहना
- सिरदर्द रहना, चमड़ी पर चकते बनना और प्लेटलेट्स कम होना
- संक्रमण अधिक होने पर दिमाग, दिल, फेफड़ा, गुर्दे पर प्रभाव आना
सुझाव : - प्लेटलेट्स कई कारणों से गिरती हैं, इसलिए घबराने की बजाए समय पर जांच कराएं
- झोला छाप डॉक्टरों, झाड़फूंक की जगह योग्य डॉक्टर से उपचार लें
- खेतों में बगैर जूते व गलब्ज काम करने न जाएं
- शरीर को पूरा ढकने वाले कपडे़ पहनें
ऐसे पहचाने स्क्रब टायफस को
हरियाणा में स्क्रब टायफस बीमारी को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। इसके प्रभाव में आने पर शरीर में काटे गए स्थान पर चमड़ी पर अलसर बनता है और यह काले रंग का हो जाता है। पहले यह जंगलों में रहने वाले, पर्वतारोहियों को होता था अब यह प्लेन एरिया में लोगों को अपना शिकार बना रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed