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सतनारायण हत्याकांडः एससी-एसटी आयोग ने डीसी, एसपी व जांच अधिकारी को 24 को किया तलब
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काहनौर पुलिस चौकी में करीब ढाई साल पहले पुलिस हिरासत में प्रताड़ना से हुई मसूदपुर के सतनारायण की मौत के मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई है। घटना के 890 दिनों के बाद भी पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलने पर एससी-एसटी आयोग के वाइस चेयरमैन ने दिल्ली स्थित मुख्यालय पर रोहतक के उपायुक्त, एसपी और केस के जांच अधिकारी को 24 सितंबर को तलब किया है। निर्देश दिए हैं कि उस दिन आयोग के पास सभी दस्तावेज, केस डायरी और एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) लेकर ही आएं। वहीं, पीड़ित परिजनों को शुक्रवार को दूसरी बार बयान दर्ज करने के लिए जिला विकास भवन बुलाया गया। एडीसी अजय कुमार ने मृतक सतनारायण के भाई छतर सिंह, बहन सुमित्रा, पत्नी वेदो को बुलाकर बयान दर्ज किए।
मृतक के बड़े भाई छतर सिंह ने बताया कि उनके रिश्ते का भतीजा प्रवीन घर के सामने रहता है। आरोप है कि प्रवीन की पत्नी कविता मकान बेचना चाहती थी। चूंकि मकान प्रवीन के नाम था, इसलिए सतनारायण ने विरोध किया। 11 मार्च 2017 को कविता के फोन पर काहनौर पुलिस चौकी पर तैनात एएसआई दिनेश कुमार, हेड कांस्टेबल सतीश कुुमार आए और सतनारायण को पीटते हुए साथ ले गए। जब परिजन चौकी पहुंचे तो सतनारायण के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। कुछ देर बाद दोनों पुलिस कर्मी उसे अचेतावस्था में कलानौर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने सतनारायण को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पीजीआई में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिजनों ने बताया कि सतनारायण की मौत के बाद आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के प्रयास किए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बाद में एसपी के निर्देश पर 21 मार्च 2017 को एएसआई दिनेश और हेड कांस्टेबल सतीश कुुमार के खिलाफ 302, 342 व एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया।
परिजनों का आरोप है कि अब तक आरोपी पुलिस कर्मियों को न तो गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है और न ही मुकदमे में चार्जशीट दाखिल की गई है। उन्होंने एससी-एसटी आयोग से न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद उपायुक्त ने एडीसी को जांच सौंपी है। वहीं, कार्रवाई में पुलिस और प्रशासन की ढिलाई को आयोग ने गंभीरता लेते हुए उपायुक्त, एसपी और विवेचक को 24 सितंबर को तलब किया है।
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हार्ट अटैक से मौत तो फिर चोट के निशान कैसे
पुलिस की तरफ से कहा जा रहा है कि हार्ट अटैक से सतनारायण से मौत हुई थी। वहीं, परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सतनारायण के शरीर पर चोट के तीन निशान मिले थे। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं बताया गया। फोरेंसिक जांच के लिए विसरा सुरक्षित करके भेजा गया था।
पुलिस ने कहा, नहीं वीडियोग्राफी हुई, आरटीआई में होने की पुष्टि हुई
परिजनों ने सतनारायण का पोस्टमार्टम डॉक्टरों की टीम से कराने व वीडियोग्राफी की लिखित मांग की थी। पुलिस का कहना है कि वीडियोग्राफी नहीं हुई। वहीं, सूचना अधिकार के तहत से मांगी गई रिपोर्ट में वीडियोग्राफी होने की पुष्टि हुई।
तत्कालीन डीएसपी व एसडीएम की जांच संदेह के घेरे में
आरोप है कि दोनों पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचक ने जांच को लटका दिया। वहीं, अफसरों के निर्देश पर तत्कालीन डीएसपी रविंद्र को जांच सौंप दी गई। आरोप है कि डीएसपी रविंद्र ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस कर्मियों को क्लीन चिट दे दी थी। जब मामला एससी-एसटी आयोग पहुंचा तो जांच एसडीएम राकेश कुमार को सौंपी गई। एसडीएम ने डेढ़ साल बाद भी जांच पूरी नहीं की। अब जांच एडीसी को सौंपा गया है।
शुक्रवार को सतनारायण के परिजनों के अलावा कुछ अन्य लोगों को बयान दर्ज किए गए हैं। पुलिस कर्मियों को भी बुलाकर पूछताछ की जा चुकी है। इतना कहा जा सकता है कि इस मामले में अधिकतम लोगों के बयान हो चुके हैं।
- अजय कुमार, एडीसी रोहतक
परिजनों के आरोप और सवाल
1. पुलिस ने जानबूझकर गवाहों को डराने और जांच को प्रभावित करने का मौका दोषियों को दिया।
2. शिकायत पर एफआईआर दर्ज किए बिना जांच करके मामले को रफा-दफा का प्रयास क्यों किया।
3. काहनौर चौकी प्रभारी को मृतक के शरीर पर चोट के निशान क्यों नहीं दिखे।
4. पुलिस ने हरियाणा मानवाधिकार आयोग को क्यों गुमराह करने का प्रयास किया।
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मृतक के बड़े भाई छतर सिंह ने बताया कि उनके रिश्ते का भतीजा प्रवीन घर के सामने रहता है। आरोप है कि प्रवीन की पत्नी कविता मकान बेचना चाहती थी। चूंकि मकान प्रवीन के नाम था, इसलिए सतनारायण ने विरोध किया। 11 मार्च 2017 को कविता के फोन पर काहनौर पुलिस चौकी पर तैनात एएसआई दिनेश कुमार, हेड कांस्टेबल सतीश कुुमार आए और सतनारायण को पीटते हुए साथ ले गए। जब परिजन चौकी पहुंचे तो सतनारायण के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। कुछ देर बाद दोनों पुलिस कर्मी उसे अचेतावस्था में कलानौर अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने सतनारायण को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पीजीआई में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। परिजनों ने बताया कि सतनारायण की मौत के बाद आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के प्रयास किए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। बाद में एसपी के निर्देश पर 21 मार्च 2017 को एएसआई दिनेश और हेड कांस्टेबल सतीश कुुमार के खिलाफ 302, 342 व एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया।
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परिजनों का आरोप है कि अब तक आरोपी पुलिस कर्मियों को न तो गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है और न ही मुकदमे में चार्जशीट दाखिल की गई है। उन्होंने एससी-एसटी आयोग से न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद उपायुक्त ने एडीसी को जांच सौंपी है। वहीं, कार्रवाई में पुलिस और प्रशासन की ढिलाई को आयोग ने गंभीरता लेते हुए उपायुक्त, एसपी और विवेचक को 24 सितंबर को तलब किया है।
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हार्ट अटैक से मौत तो फिर चोट के निशान कैसे
पुलिस की तरफ से कहा जा रहा है कि हार्ट अटैक से सतनारायण से मौत हुई थी। वहीं, परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सतनारायण के शरीर पर चोट के तीन निशान मिले थे। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं बताया गया। फोरेंसिक जांच के लिए विसरा सुरक्षित करके भेजा गया था।
पुलिस ने कहा, नहीं वीडियोग्राफी हुई, आरटीआई में होने की पुष्टि हुई
परिजनों ने सतनारायण का पोस्टमार्टम डॉक्टरों की टीम से कराने व वीडियोग्राफी की लिखित मांग की थी। पुलिस का कहना है कि वीडियोग्राफी नहीं हुई। वहीं, सूचना अधिकार के तहत से मांगी गई रिपोर्ट में वीडियोग्राफी होने की पुष्टि हुई।
तत्कालीन डीएसपी व एसडीएम की जांच संदेह के घेरे में
आरोप है कि दोनों पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचक ने जांच को लटका दिया। वहीं, अफसरों के निर्देश पर तत्कालीन डीएसपी रविंद्र को जांच सौंप दी गई। आरोप है कि डीएसपी रविंद्र ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस कर्मियों को क्लीन चिट दे दी थी। जब मामला एससी-एसटी आयोग पहुंचा तो जांच एसडीएम राकेश कुमार को सौंपी गई। एसडीएम ने डेढ़ साल बाद भी जांच पूरी नहीं की। अब जांच एडीसी को सौंपा गया है।
शुक्रवार को सतनारायण के परिजनों के अलावा कुछ अन्य लोगों को बयान दर्ज किए गए हैं। पुलिस कर्मियों को भी बुलाकर पूछताछ की जा चुकी है। इतना कहा जा सकता है कि इस मामले में अधिकतम लोगों के बयान हो चुके हैं।
- अजय कुमार, एडीसी रोहतक
परिजनों के आरोप और सवाल
1. पुलिस ने जानबूझकर गवाहों को डराने और जांच को प्रभावित करने का मौका दोषियों को दिया।
2. शिकायत पर एफआईआर दर्ज किए बिना जांच करके मामले को रफा-दफा का प्रयास क्यों किया।
3. काहनौर चौकी प्रभारी को मृतक के शरीर पर चोट के निशान क्यों नहीं दिखे।
4. पुलिस ने हरियाणा मानवाधिकार आयोग को क्यों गुमराह करने का प्रयास किया।