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Rohtak News: सर्व कर्मचारी संघ 21 को राजनीतिक दलों के अध्यक्षों का देगा ज्ञापन
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14सीटीके14..सुखपुरा चौक स्थित कर्मचारी भवन में बैठक करते सर्व कर्मचारी संघ के सदस्य। संवाद
रोहतक। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ ने शनिवार को केंद्रीय कमेटी की बैठक ली। अध्यक्षता राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद ने की। बैठक का संचालन महासचिव सुमेर सिवाच ने किया। रोडवेज कर्मचारियों की मांगों की हो रही अनदेखी और वादाखिलाफी को लेकर कमेटी ने 21 सितंबर को भिवानी में राज्यस्तरीय कन्वेशन करने और सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है।
राज्य प्रधान और महासचिव ने बैठक में सरकार के पिछले नौ वर्ष के कार्यकाल का और कर्मचारी विरोधी रवैये की चर्चा की। रोडवेज के कर्मचारियों ने पिछले वर्षो में हड़ताल धरने और प्रदर्शन से लेकर सीएम आवास घेराव जैसे बड़े आंदोलन किए हैं। इन्हें देखते हुए परिवहन मंत्री ने तीन-चार दौर की बातचीत की, बातचीत में कई मांगों पर सहमती बनी, लेकिन सरकार ने एक भी मांग को लागू नहीं किया।
कर्मचारियों ने कहा जनता और कर्मचारियों की मांग के विपरीत सरकार 362 रूट पर 3658 प्राइवेट बसों को परमिट देने पर तुली हुई है। यूनियन का कहना है उनकी मांग के अनुसार प्राइवेट रूट परमिट देने की बजाय रोडवेज बेड़े में 10 हजार सरकारी बस शामिल की जाएं। इससे 60 हजार बेरोजगारों को पक्का रोजगार देने के अलावा जनता को बेहतर व सुरक्षित परिवहन सेवा दी जा सकती है। सरकार की निजीकरण नीतियों का डटकर विरोध किया जाएगा। सरकार की गलत नीतियों के कारण रोडवेज में हो रहे नुकसान को जनता के बीच में ले जाने का काम करेंगे।
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सरकार ने रोडवेज कर्मचारियों के साथ जो वादाखिलाफी की है, इसका खामियाजा आने वाले चुनाव में सरकार को भुगतना पड़ेगा। बैठक में वरिष्ठ उपप्रधान शिव कुमार श्योराण, कोषाध्यक्ष सुशील इक्कस, मुख्य संगठन सचिव रमेश श्योकंद, पवन शर्मा, उपाध्यक्ष जयकुंवार दहिया, कार्यालय सचिव सतबीर मुंढाल ने कहा रोडवेज कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर लागू करने की बजाय सरकार लम्बे समय से टरकाऊ रवैया अपना रही है।
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राज्य प्रधान और महासचिव ने बैठक में सरकार के पिछले नौ वर्ष के कार्यकाल का और कर्मचारी विरोधी रवैये की चर्चा की। रोडवेज के कर्मचारियों ने पिछले वर्षो में हड़ताल धरने और प्रदर्शन से लेकर सीएम आवास घेराव जैसे बड़े आंदोलन किए हैं। इन्हें देखते हुए परिवहन मंत्री ने तीन-चार दौर की बातचीत की, बातचीत में कई मांगों पर सहमती बनी, लेकिन सरकार ने एक भी मांग को लागू नहीं किया।
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कर्मचारियों ने कहा जनता और कर्मचारियों की मांग के विपरीत सरकार 362 रूट पर 3658 प्राइवेट बसों को परमिट देने पर तुली हुई है। यूनियन का कहना है उनकी मांग के अनुसार प्राइवेट रूट परमिट देने की बजाय रोडवेज बेड़े में 10 हजार सरकारी बस शामिल की जाएं। इससे 60 हजार बेरोजगारों को पक्का रोजगार देने के अलावा जनता को बेहतर व सुरक्षित परिवहन सेवा दी जा सकती है। सरकार की निजीकरण नीतियों का डटकर विरोध किया जाएगा। सरकार की गलत नीतियों के कारण रोडवेज में हो रहे नुकसान को जनता के बीच में ले जाने का काम करेंगे।
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सरकार ने रोडवेज कर्मचारियों के साथ जो वादाखिलाफी की है, इसका खामियाजा आने वाले चुनाव में सरकार को भुगतना पड़ेगा। बैठक में वरिष्ठ उपप्रधान शिव कुमार श्योराण, कोषाध्यक्ष सुशील इक्कस, मुख्य संगठन सचिव रमेश श्योकंद, पवन शर्मा, उपाध्यक्ष जयकुंवार दहिया, कार्यालय सचिव सतबीर मुंढाल ने कहा रोडवेज कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर लागू करने की बजाय सरकार लम्बे समय से टरकाऊ रवैया अपना रही है।