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Rohtak News: 90 करोड़ की तीन साल बाद भी रिकवरी नहीं, आरोपी को जमानत मिली
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रोहतक। जीएसटी (वस्तु और सेवा कर) के 500 करोड़ से ज्यादा के फर्जी फर्मों के नाम पर बिल काटकर 90 करोड़ अपने खातें में डालने के आरोपी दिल्ली के सरस्वती विहार (पीतमपुरा) निवासी गौरव को जमानत मिल गई है। दरअसल, टीम तीन साल बाद भी कोई रिकवरी नहीं कर सकी।
बचाव पक्ष के वकील पीयूष गक्खड़ ने बताया कि जीएसटी विभाग ने वित्त वर्ष 2020-21 में जांच के दौरान पाया कि दिल्ली निवासी गौरव मूलरूप से महम खंड का रहने वाला है। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी फर्म बनाकर 500 करोड़ से ज्यादा के बिल काटे हैं। बिलों के आधार पर विभाग से इनपुट टैक्स क्रेडिट की 90 करोड़ की राशि अपने फर्जी खातों में डलवाकर निकाल ली। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। आरोपी को जेल में गए साढ़े तीन माह के करीब समय हुआ था कि कोरोना काल में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए कि जिस केस में आरोपी को सात साल से कम की सजा है, उसे अंतरिम जमानत दी जाए। इसके बाद आरोपी जमानत पर बाहर आ गया। कोरोना खत्म होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब आरोपियों को अदालतों में सरेंडर करना होगा।
17 अगस्त को आरोपी ने रोहतक कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसके बाद बचाव पक्ष ने एडीजे आरके यादव की अदालत में जमानत के लिए याचिका दायर की। अदालत को बताया कि आरोपी ने दो साल कोई गलत कार्य नहीं किया। न ही 90 करोड़ में से उससे कोई रिकवरी हुई है। न ही यह साबित हुआ कि आरोपी ने ही फर्जी फर्म खोली हैं। उसकी हैंडराइटिंग का कोई नमूना नहीं लिया गया। दोनों पक्षों की बहस के बाद अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी।
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बचाव पक्ष के वकील पीयूष गक्खड़ ने बताया कि जीएसटी विभाग ने वित्त वर्ष 2020-21 में जांच के दौरान पाया कि दिल्ली निवासी गौरव मूलरूप से महम खंड का रहने वाला है। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी फर्म बनाकर 500 करोड़ से ज्यादा के बिल काटे हैं। बिलों के आधार पर विभाग से इनपुट टैक्स क्रेडिट की 90 करोड़ की राशि अपने फर्जी खातों में डलवाकर निकाल ली। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। आरोपी को जेल में गए साढ़े तीन माह के करीब समय हुआ था कि कोरोना काल में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए कि जिस केस में आरोपी को सात साल से कम की सजा है, उसे अंतरिम जमानत दी जाए। इसके बाद आरोपी जमानत पर बाहर आ गया। कोरोना खत्म होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब आरोपियों को अदालतों में सरेंडर करना होगा।
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17 अगस्त को आरोपी ने रोहतक कोर्ट में सरेंडर कर दिया। इसके बाद बचाव पक्ष ने एडीजे आरके यादव की अदालत में जमानत के लिए याचिका दायर की। अदालत को बताया कि आरोपी ने दो साल कोई गलत कार्य नहीं किया। न ही 90 करोड़ में से उससे कोई रिकवरी हुई है। न ही यह साबित हुआ कि आरोपी ने ही फर्जी फर्म खोली हैं। उसकी हैंडराइटिंग का कोई नमूना नहीं लिया गया। दोनों पक्षों की बहस के बाद अदालत ने आरोपी को जमानत दे दी।
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