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Rohtak Lok Sabha Result 2024: दीपेंद्र हुड्डा को 72 साल में चौथी बड़ी जीत मिली... लेकिन तोड़ न पाए ये रिकॉर्ड
Wed, 05 Jun 2024 02:55 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, रोहतक
अमर उजाला नेटवर्क, रोहतक
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 05 Jun 2024 02:55 PM IST
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दीपेंद्र हुड्डा।
- फोटो : X @DeependerSHooda
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रोहतक सीट पर भाजपा की कांग्रेस के जाट वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति उल्टी पड़ गई। जाट मतदाताओं ने एकजुट होकर कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा को वोट दिया, जबकि गैर जाट वोट बैंक बिखर गया। 72 साल के चुनावी इतिहास में दीपेंद्र ने मत प्रतिशत के हिसाब से चौथी बड़ी जीत हासिल की।
हालांकि वे अपने 2009 के 69 प्रतिशत वोट हासिल करने के रिकॉर्ड को तोड़ नहीं सके। पांच साल पहले रोहतक शहर, कलानौर, बहादुरगढ़ व कोसली में कांग्रेस कहार मिली थी, वहीं पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के परिवार ने जमकर प्रचार किया।
परिणाम स्वरूप नौ हलकों में दीपेंद्र जीतने में कामयाब रहे। रोहतक सीट पर पांच साल पहले भाजपा ने जाट व नॉन जाट के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था। परिणाम यह हुआ कि कोसली व रोहतक से भाजपा प्रत्याशी को अच्छी बढ़त मिली।
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अबकी बार भाजपा ने रणनीति बदली और जाट वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास किया। इसके बावजूद हलके से कांग्रेस 77 हजार वोट से लीड लेने में कामयाब हुई है, जबकि कोसली व रोहतक शहर में भी भाजपा जीत नहीं सकी।
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हालांकि वे अपने 2009 के 69 प्रतिशत वोट हासिल करने के रिकॉर्ड को तोड़ नहीं सके। पांच साल पहले रोहतक शहर, कलानौर, बहादुरगढ़ व कोसली में कांग्रेस कहार मिली थी, वहीं पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के परिवार ने जमकर प्रचार किया।
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परिणाम स्वरूप नौ हलकों में दीपेंद्र जीतने में कामयाब रहे। रोहतक सीट पर पांच साल पहले भाजपा ने जाट व नॉन जाट के मुद्दे पर चुनाव लड़ा था। परिणाम यह हुआ कि कोसली व रोहतक से भाजपा प्रत्याशी को अच्छी बढ़त मिली।
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अबकी बार भाजपा ने रणनीति बदली और जाट वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास किया। इसके बावजूद हलके से कांग्रेस 77 हजार वोट से लीड लेने में कामयाब हुई है, जबकि कोसली व रोहतक शहर में भी भाजपा जीत नहीं सकी।
जीत की वजह
- जाट वोट बैंक में भाजपा सेंध नहीं लगा सकी, कांग्रेस नॉन जाट वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब।
- कांग्रेस ने बिजली, पानी, सीवर व सड़क जैसे विकास के मुद्दे को उठाया।
- पिता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा दीपेंद्र हुड्डा की छवि भी अहम रही।
हार की वजह
- मोदी के नाम पर वोट मिला, लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार से लोग नाराज।
- नॉन जाट वोट बैंक को एकजुट नहीं कर सकी भाजपा, किसान आंदोलन के नाम पर विरोध।
- बिजली, पानी, सीवर व सड़क जैसी सुविधाओं से संतुष्ट नहीं था शहरी मतदात।