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किसी की रिपोर्ट में एक तो किसी में दो शिशु पल रहा गर्भ में
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 30 Nov 2015 01:51 AM IST
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जच्चा-बच्चा सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सख्ती अस्पतालों में जांच करने वाले कर्मचारियों के लिए मजाक से कम नहीं।
यही वजह है कि गर्भवती महिला की अल्ट्रासोनोग्राफी की रिपोर्ट में गर्भ में कभी एक शिशु तो कभी दो शिशु होने की बात सामने आ रही है।
ऐसा ही एक मामला सामने में आया है फर्नीचर मार्केट निवासी गीता का।
गीता के पति पवन ने बताया कि उन्होंने सामान्य अस्पताल में छह नवंबर को जांच कराई तो 14 नवंबर को अल्ट्रासाउंड जांच करने की तिथि दी गई। जब जांच कराई तो डॉक्टर ने बताया कि उसकी पत्नी के गर्भ में जुड़वा बच्चे हैं।
अपनी तसल्ली के लिए उसने हुडा कॉम्प्लेक्स स्थित एक निजी जांच केंद्र पर जांच कराई तो वहां भी जुड़वा बच्चे बताया गया। 31 सप्ताह के गर्भ की सुरक्षा को देखते हुए जब पीजीआई में जांच कराई तो होश उड़ गए।
यहां अल्ट्रासाउंड जांच में बताया गया कि गर्भ में एक बच्चा है। अब पहले दो स्थानों पर जांच में दो बच्चे बताए गए और पीजीआई ने एक बताया।
इस स्थिति में अब परेशानी हो गई है कि हम किसकी जांच रिपोर्ट सही माने। पीड़ित ने बताया कि यदि उसकी पत्नी के गर्भ में एक बच्चा है तो सामान्य अस्पताल और निजी जांच केंद्र दोषी हैं। यदि ये दोनों सही हैं तो पीजीआई के डॉक्टर ने गलती की है। फिलहाल रिपोर्ट अब गर्भवती महिला के मुसीबत बन गई है।
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बढ़ गई परेशानी
पीजीआई की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि महिला एक गर्भ से है, जबकि दो सेंटर जुड़वा बच्चे बता रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि डॉक्टर डिलीवरी के दौरान पीजीआई की रिपोर्ट मानता है तो एक बच्चे के जन्म के बाद जच्चा को नार्मल मान लेता है। ऐसे में दूसरे शिशु के साथ दुर्घटना हो सकती है। यदि दो बच्चों की रिपोर्ट सही है और बच्चा एक होता है तो बाद में परिजन कुछ भी आरोप लगा कर हंगामा कर सकते हैं। संबंधित डॉक्टर को साबित करना भारी पड़ जाएगा कि दूसरा बच्चा कहां गया। क्योंकि डॉक्टर की जांच रिपोर्ट भी झुठलाना आसान नहीं होगा।
बोले अधिकारी
ऐसी गलती होने की संभावना कम होती है। मेरे पास ऐसी कोई शिकायत भी नहीं आई है। यदि किसी को कोई समस्या है तो वह आ जाए, उसकी एक्सपर्ट से जांच करा दी जाएगी। गर्भवती महिलाओं की जांच स्त्री रोग विभाग में होती है।
- डॉ. रोहताश यादव, विभागाध्यक्ष, रेडियोलोजी विभाग, पीजीआई
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यही वजह है कि गर्भवती महिला की अल्ट्रासोनोग्राफी की रिपोर्ट में गर्भ में कभी एक शिशु तो कभी दो शिशु होने की बात सामने आ रही है।
ऐसा ही एक मामला सामने में आया है फर्नीचर मार्केट निवासी गीता का।
गीता के पति पवन ने बताया कि उन्होंने सामान्य अस्पताल में छह नवंबर को जांच कराई तो 14 नवंबर को अल्ट्रासाउंड जांच करने की तिथि दी गई। जब जांच कराई तो डॉक्टर ने बताया कि उसकी पत्नी के गर्भ में जुड़वा बच्चे हैं।
अपनी तसल्ली के लिए उसने हुडा कॉम्प्लेक्स स्थित एक निजी जांच केंद्र पर जांच कराई तो वहां भी जुड़वा बच्चे बताया गया। 31 सप्ताह के गर्भ की सुरक्षा को देखते हुए जब पीजीआई में जांच कराई तो होश उड़ गए।
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यहां अल्ट्रासाउंड जांच में बताया गया कि गर्भ में एक बच्चा है। अब पहले दो स्थानों पर जांच में दो बच्चे बताए गए और पीजीआई ने एक बताया।
इस स्थिति में अब परेशानी हो गई है कि हम किसकी जांच रिपोर्ट सही माने। पीड़ित ने बताया कि यदि उसकी पत्नी के गर्भ में एक बच्चा है तो सामान्य अस्पताल और निजी जांच केंद्र दोषी हैं। यदि ये दोनों सही हैं तो पीजीआई के डॉक्टर ने गलती की है। फिलहाल रिपोर्ट अब गर्भवती महिला के मुसीबत बन गई है।
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बढ़ गई परेशानी
पीजीआई की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि महिला एक गर्भ से है, जबकि दो सेंटर जुड़वा बच्चे बता रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि डॉक्टर डिलीवरी के दौरान पीजीआई की रिपोर्ट मानता है तो एक बच्चे के जन्म के बाद जच्चा को नार्मल मान लेता है। ऐसे में दूसरे शिशु के साथ दुर्घटना हो सकती है। यदि दो बच्चों की रिपोर्ट सही है और बच्चा एक होता है तो बाद में परिजन कुछ भी आरोप लगा कर हंगामा कर सकते हैं। संबंधित डॉक्टर को साबित करना भारी पड़ जाएगा कि दूसरा बच्चा कहां गया। क्योंकि डॉक्टर की जांच रिपोर्ट भी झुठलाना आसान नहीं होगा।
बोले अधिकारी
ऐसी गलती होने की संभावना कम होती है। मेरे पास ऐसी कोई शिकायत भी नहीं आई है। यदि किसी को कोई समस्या है तो वह आ जाए, उसकी एक्सपर्ट से जांच करा दी जाएगी। गर्भवती महिलाओं की जांच स्त्री रोग विभाग में होती है।
- डॉ. रोहताश यादव, विभागाध्यक्ष, रेडियोलोजी विभाग, पीजीआई