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Rohtak News: हादसे में क्षतिग्रस्त स्कूटी का क्लेम देने से इन्कार, बीमा कंपनी को देना होगा हर्जाना
Sun, 28 Jan 2024 12:39 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 28 Jan 2024 12:39 AM IST
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रोहतक। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फैसला सुनाया है कि बीमा कंपनी दोपहिया वाहन को पुराना क्षतिग्रस्त और जंग लगा होने का कारण बताकर मुआवजा देने से इन्कार नहीं कर सकती। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिए हैं कि क्लेम के तौर पर स्कूटी मालिक को 24 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज, 5 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न और 5 हजार रुपये कानूनी खर्च के तौर पर दे।
आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, लाढ़ोत रोड स्थित शास्त्री नगर निवासी रितू ने 2019 में स्कूटी खरीदी थी, जिसका जीरो डेफ्ट पर एक साल का बीमा करवाया था। कुछ दिन बाद स्कूटी को एक वाहन ने टक्कर मार दी। उसने बीमा कंपनी को मुआवजे के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने सर्वेयर भेजा, जिसने रिपोर्ट दी कि स्कूटी पर जंग लगा हुआ है और पुरानी व क्षतिग्रस्त है। कंपनी ने इस बात पर क्लेम देने से इन्कार कर दिया। रितू ने 13 फरवरी 2020 को आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने कंपनी से जवाब मांगा। कंपनी ने कहा कि समय पर वाहन क्षतिग्रस्त होने की सूचना नहीं दी गई। इसलिए क्लेम की अर्जी खारिज की कर दी गई।
आयोग ने कहा कि एक सर्वेयर के सुझाव को आधार मानकर क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। इसके बाद वाहन की कीमत को ध्यान में रखकर आयोग ने फैसला सुनाया है कि बीमा कंपनी वाहन मालिक को 24 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित दे, साथ ही 10 हजार रुपये मुआवजा व कानूनी खर्च के तौर पर दिए जाए।
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आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, लाढ़ोत रोड स्थित शास्त्री नगर निवासी रितू ने 2019 में स्कूटी खरीदी थी, जिसका जीरो डेफ्ट पर एक साल का बीमा करवाया था। कुछ दिन बाद स्कूटी को एक वाहन ने टक्कर मार दी। उसने बीमा कंपनी को मुआवजे के लिए आवेदन किया। बीमा कंपनी ने सर्वेयर भेजा, जिसने रिपोर्ट दी कि स्कूटी पर जंग लगा हुआ है और पुरानी व क्षतिग्रस्त है। कंपनी ने इस बात पर क्लेम देने से इन्कार कर दिया। रितू ने 13 फरवरी 2020 को आयोग में याचिका दायर की। आयोग ने कंपनी से जवाब मांगा। कंपनी ने कहा कि समय पर वाहन क्षतिग्रस्त होने की सूचना नहीं दी गई। इसलिए क्लेम की अर्जी खारिज की कर दी गई।
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आयोग ने कहा कि एक सर्वेयर के सुझाव को आधार मानकर क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता। इसके बाद वाहन की कीमत को ध्यान में रखकर आयोग ने फैसला सुनाया है कि बीमा कंपनी वाहन मालिक को 24 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित दे, साथ ही 10 हजार रुपये मुआवजा व कानूनी खर्च के तौर पर दिए जाए।
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