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Rohtak News: सरकारी कैंटीन में बढ़े दाम वापस लेने और कैंटीन बचाने को आवाज उठाई
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छात्र एकता मंच के नेतृत्व में एमडीयू के सरकारी कैंटीन में बढ़ाए गए रेट को वापिस करवाने व लंच की
रोहतक। छात्र एकता मंच ने मंगलवार को महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में सरकारी कैंटीन में बढ़ाए गए दाम वापस कराने व लंच की सुविधा को दोबारा चालू कराने के लिए रसोईघर लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। यहां मंच के सदस्यों ने खाना बनाकर विद्यार्थियों को खिलाया। साथ ही विवि प्रशासन से कैंटीन बचाने की गुहार लगाई।
मंच का कहना है कि विश्वविद्यालय में तीन सरकारी कैंटीन हैं। लॉकडॉउन से पहले विवि की सरकारी कैंटीन में लंच की सुविधा थी। लॉकडाउन में प्रशासन ने आपदा को अवसर में बदलते हुए सरकारी कैंटीन के दाम बढ़ा दिए। दोपहर के भोजन की सुविधा बंद कर दी। इस कारण छात्रों को मजबूरन बाहर की कैंटीन पर जाना पड़ता है। यहां मनमाने दाम पर सामान दिया जाता है। यूनिवर्सिटी की सरकारी कैंटीन में छह कर्मचारियों की नियुक्ति कुक के रूप में की गई थी। विवि प्रशासन ने सरकारी कैंटीन में लंच की सुविधा बंद कर इन कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों में नियुक्त कर दिया। इससे यूनिवर्सिटी की मंशा साफ जाहिर होती हैं कि वह सरकारी कैंटीन को खत्म करना चाहते हैं। इससे निजी कैंटीन संचालकों को मुनाफा होगा। यूनिवर्सिटी के ज्यादातर छात्र ग्रामीण इलाके से आते हैं। दोपहर का भोजन सरकारी कैंटीन में करते थे। लॉकडाउन के बाद उन्हें मजबूरन निजी कैंटीन ही विकल्प शेष रहता है। बाहर का खाना खाने के कारण छात्रों को फूड प्वाइजनिंग व पेट संबंधी अन्य बीमारियां हो रही हैं। इन समस्याओं को लेकर विवि प्रशासन से कई बार मिल चुके हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसीलिए रसोईघर लगाकर विवि के विद्यार्थियों को खाना खिलाया।
इस मैके पर मनीषा, रमन, अजय, पिंकी, सोनिया, अंकित, तरुण समेत अनेक विद्यार्थी मौजूद रहे।
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मंच का कहना है कि विश्वविद्यालय में तीन सरकारी कैंटीन हैं। लॉकडॉउन से पहले विवि की सरकारी कैंटीन में लंच की सुविधा थी। लॉकडाउन में प्रशासन ने आपदा को अवसर में बदलते हुए सरकारी कैंटीन के दाम बढ़ा दिए। दोपहर के भोजन की सुविधा बंद कर दी। इस कारण छात्रों को मजबूरन बाहर की कैंटीन पर जाना पड़ता है। यहां मनमाने दाम पर सामान दिया जाता है। यूनिवर्सिटी की सरकारी कैंटीन में छह कर्मचारियों की नियुक्ति कुक के रूप में की गई थी। विवि प्रशासन ने सरकारी कैंटीन में लंच की सुविधा बंद कर इन कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों में नियुक्त कर दिया। इससे यूनिवर्सिटी की मंशा साफ जाहिर होती हैं कि वह सरकारी कैंटीन को खत्म करना चाहते हैं। इससे निजी कैंटीन संचालकों को मुनाफा होगा। यूनिवर्सिटी के ज्यादातर छात्र ग्रामीण इलाके से आते हैं। दोपहर का भोजन सरकारी कैंटीन में करते थे। लॉकडाउन के बाद उन्हें मजबूरन निजी कैंटीन ही विकल्प शेष रहता है। बाहर का खाना खाने के कारण छात्रों को फूड प्वाइजनिंग व पेट संबंधी अन्य बीमारियां हो रही हैं। इन समस्याओं को लेकर विवि प्रशासन से कई बार मिल चुके हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसीलिए रसोईघर लगाकर विवि के विद्यार्थियों को खाना खिलाया।
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इस मैके पर मनीषा, रमन, अजय, पिंकी, सोनिया, अंकित, तरुण समेत अनेक विद्यार्थी मौजूद रहे।