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जिम्मेदारी 22 स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों की, स्वास्थ्य केंद्र में एक स्ट्रेचर तक नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 12 Jan 2017 02:33 AM IST
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खुद ही आईसीयू में है रोहतक रेलवे स्टेशन का स्वास्थ्य केंद्र
- फोटो : amar ujala
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रेलवे स्टेशन पर बना स्वास्थ्य जांच केंद्र खुद आईसीयू में है। कहने को तो इस केंद्र के कंधों पर 22 रेलवे स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों और हर घायल यात्री के स्वास्थ्य का जिम्मा है, लेकिन केंद्र में एक स्ट्रेचर तक नहीं है। ओटी में एक बेड है, लेकिन उस पर बिछाने के लिए चादर नहीं है। कुर्सियां दम तोड़ गईं हैं। दिल्ली की टीम ने जब बुधवार को स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया तो पोल खुल गई। केंद्र में रखी एक्सपायरी डेट की दवाइयों को देखकर अधिकारी भड़क गए। उन्होंने तुरंत दवाओं को हटाने और नई दवाओं का इंतजाम करने के निर्देश दिए।
रेलवे स्टेशन पर रेल कर्मचारियों के लिए एक स्वास्थ्य केंद्र है। हालांकि, केंद्र में एक भी स्ट्रेचर नहीं है। अगर कोई यात्री या रेल कर्मी घायल हो जाए तो उसे चिकित्सा सहायता के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक लाने की सुविधा नहीं है। व्हील चेयर भी नहीं मिलेगी। स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों की कार्यशैली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्टोर रूम में रखी आधे से अधिक दवाओं की रजिस्टर में एंट्री तक नहीं है। केंद्र के इकलौते वार्ड में बने शौचालय में गंदगी फैली है। इससे संक्रमण फैले तो पीड़ित खुद झेले। स्वास्थ्य केंद्र की कलई तब खुली जब बुधवार दोपहर करीब एक बजे एक जांच टीम दिल्ली से स्टेशन पहुंची। जांच दल में दिल्ली मंडल के स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और सहायक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे। जांच के दौरान मिली खामियाें पर अधिकारियों ने स्वास्थ्य कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि व्यवस्था को सुधारा जाए। जाते-जाते उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में फिर जांच करेंगे और कार्य संतोष जनक न मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि कार्यों के प्रगति की रिपोर्ट दिल्ली भी मंगवाई जा सकती है।
इसलिए अहम है स्वास्थ्य केंद्र
रोहतक रेलवे स्टेशन मॉडल स्टेशनों में शुमार है। स्टेशन पर बना एकलौता स्वास्थ्य केंद्र रोहतक से जींद वाली लाइन पर जैजैवंती तक तैनात कर्मचारियों के स्वास्थ्य का ख्याल रखता है। इसी केंद्र के कंधों पर पानीपत वाली लाइन पर गोहाना तक, रेवाड़ी वाली लाइन पर गोकलगढ़ तक और दिल्ली वाली लाइन पर आसौदा तक के कर्मचारियों के स्वास्थ्य का जिम्मा है। इस दूरी में करीब 22 रेलवे स्टेशन हैं, लंबाई भी 17,424 किलोमीटर है। इन स्टेशनों पर हजारों कर्मचारी कार्यरत हैं। सभी के लिए यही एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र है। आलम यह है कि इस स्वास्थ्य केंद्र के स्टोर रूम में छह महीने पहले ही जिस दवा की अवधि खत्म हो गई है, उसे रखा गया है। जांच के दौरान जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्र के सेनेटरी रूम को खुलवाकर देखा तो सिर्फ गंदगी नजर आई। अधिकारी ने सफाई का आदेश दिया। जांच अधिकारी जब स्टेशन के भवन में बने दुर्घटना सहायता चिकित्सा उपस्कर के स्केल दो की जांच करने पहुंचे तो पहले तो दरवाजा ही नहीं खुला। जब खुला तो अंदर के हालात देखकर अधिकारी भौचक्के रह गए। उन्होंने स्टेशन अधीक्षक से दरवाजे को ठीक कराने और स्वास्थ्य कर्मचारियों से जरूरी सामान उपलब्ध कराने निर्देश दिए। इसके बाद जांच टीम ने स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में दो पौधे भी लगाए।
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यह है दुर्घटना सहायता चिकित्सा उपस्कर
दुर्घटना सहायता चिकित्सा उपस्कर मुख्य रेलवे स्टेशनों पर ही होता है। इसमें वे जरूरी सामान रखे जाते हैं जिनकी रेल दुर्घटना में आपात स्थित में जरूरत पड़ती है। यहां पर कंबल, हाई लेवल टार्च, सामान और अन्य जरूरी उपकरण रखे रहते हैं। रोहतक स्टेशन पर बने कार्यालय में इसकी करीब 10 अटैचियां रखीं थीं।
जांच दल में ये रहे शामिल
मंडल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पद्म सिंह नेगी, डॉ. एसके नागर, एससीएचआई डॉ. जी. दत्ता, स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य चिकित्सक डॉ. डीके अरोड़ा और स्टेशन अधीक्षक भगवान सहाय मीणा।
स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात हैं ये कर्मचारी
मुख्य चिकित्सक डॉ. डीके अरोड़ा, फार्मासिस्ट बीपी बांगड़े, ओटीए सत्यनारायण, अस्पताल परिचारक साधुराम, नर्स नीलम और सफाई कर्मचारी राजबाला।
करीब 30 साल पुराना है स्वास्थ्य केंद्र
रेल मंत्री बंसीलाल के कार्यकाल में 11 दिसंबर 1985 को स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन हुआ था। तब से लेकर अब तक स्वास्थ्य केंद्र में न तो सुविधाएं बढ़ीं और न ही स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या।
मिली हैं खामियां, प्रगति रिपोर्ट मंगाकर करेंगे समीक्षा
यह रूटीन जांच है। रेलवे के इतने बड़े परिवार में ऐसी जांच चलती रहती है। जो खामियां मिली हैं, उन्हें दूर करने का निर्देश दिया है। जल्द ही बैठक में स्वास्थ्य केंद्र के प्रगति की रिपोर्ट दिल्ली मंगवाएंगे और दोबारा जांच करेंगे।
- डॉ. पद्म सिंह नेगी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग, दिल्ली मंडल, रेलवे।
उपलब्ध हैं प्राथमिक उपचार और जरूरी दवाएं
स्वास्थ्य केंद्र में रेलवे कर्मचारियों और घायल यात्रियों के प्राथमिक उपचार उपलब्ध हैं। इसके लिए इमरजेंसी किट हमेशा तैयार रहती है। सामान्य बीमारियों की दवाएं उपलब्ध हैं। जांच में जो खामियां मिली हैं, उन्हें जल्द दूर किया जाएगा।
- डॉ. डीके अरोड़ा, मुख्य चिकित्सक, स्वास्थ्य केंद्र, रेलवे स्टेशन, रोेहतक।
सही करवाएंगे दरवाजा
जल्द आवश्यकता न पड़ने के कारण दरवाजा जाम हो गया है। आईडब्ल्यू को निर्देश दे दिया है। जल्द ही दरवाजे को ठीक करवाएंगे।
- भगवान सहाय मीणा, स्टेशन अधीक्षक, रेलवे स्टेशन
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रेलवे स्टेशन पर रेल कर्मचारियों के लिए एक स्वास्थ्य केंद्र है। हालांकि, केंद्र में एक भी स्ट्रेचर नहीं है। अगर कोई यात्री या रेल कर्मी घायल हो जाए तो उसे चिकित्सा सहायता के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक लाने की सुविधा नहीं है। व्हील चेयर भी नहीं मिलेगी। स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों की कार्यशैली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्टोर रूम में रखी आधे से अधिक दवाओं की रजिस्टर में एंट्री तक नहीं है। केंद्र के इकलौते वार्ड में बने शौचालय में गंदगी फैली है। इससे संक्रमण फैले तो पीड़ित खुद झेले। स्वास्थ्य केंद्र की कलई तब खुली जब बुधवार दोपहर करीब एक बजे एक जांच टीम दिल्ली से स्टेशन पहुंची। जांच दल में दिल्ली मंडल के स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और सहायक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे। जांच के दौरान मिली खामियाें पर अधिकारियों ने स्वास्थ्य कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि व्यवस्था को सुधारा जाए। जाते-जाते उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में फिर जांच करेंगे और कार्य संतोष जनक न मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि कार्यों के प्रगति की रिपोर्ट दिल्ली भी मंगवाई जा सकती है।
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इसलिए अहम है स्वास्थ्य केंद्र
रोहतक रेलवे स्टेशन मॉडल स्टेशनों में शुमार है। स्टेशन पर बना एकलौता स्वास्थ्य केंद्र रोहतक से जींद वाली लाइन पर जैजैवंती तक तैनात कर्मचारियों के स्वास्थ्य का ख्याल रखता है। इसी केंद्र के कंधों पर पानीपत वाली लाइन पर गोहाना तक, रेवाड़ी वाली लाइन पर गोकलगढ़ तक और दिल्ली वाली लाइन पर आसौदा तक के कर्मचारियों के स्वास्थ्य का जिम्मा है। इस दूरी में करीब 22 रेलवे स्टेशन हैं, लंबाई भी 17,424 किलोमीटर है। इन स्टेशनों पर हजारों कर्मचारी कार्यरत हैं। सभी के लिए यही एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र है। आलम यह है कि इस स्वास्थ्य केंद्र के स्टोर रूम में छह महीने पहले ही जिस दवा की अवधि खत्म हो गई है, उसे रखा गया है। जांच के दौरान जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्र के सेनेटरी रूम को खुलवाकर देखा तो सिर्फ गंदगी नजर आई। अधिकारी ने सफाई का आदेश दिया। जांच अधिकारी जब स्टेशन के भवन में बने दुर्घटना सहायता चिकित्सा उपस्कर के स्केल दो की जांच करने पहुंचे तो पहले तो दरवाजा ही नहीं खुला। जब खुला तो अंदर के हालात देखकर अधिकारी भौचक्के रह गए। उन्होंने स्टेशन अधीक्षक से दरवाजे को ठीक कराने और स्वास्थ्य कर्मचारियों से जरूरी सामान उपलब्ध कराने निर्देश दिए। इसके बाद जांच टीम ने स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में दो पौधे भी लगाए।
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यह है दुर्घटना सहायता चिकित्सा उपस्कर
दुर्घटना सहायता चिकित्सा उपस्कर मुख्य रेलवे स्टेशनों पर ही होता है। इसमें वे जरूरी सामान रखे जाते हैं जिनकी रेल दुर्घटना में आपात स्थित में जरूरत पड़ती है। यहां पर कंबल, हाई लेवल टार्च, सामान और अन्य जरूरी उपकरण रखे रहते हैं। रोहतक स्टेशन पर बने कार्यालय में इसकी करीब 10 अटैचियां रखीं थीं।
जांच दल में ये रहे शामिल
मंडल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पद्म सिंह नेगी, डॉ. एसके नागर, एससीएचआई डॉ. जी. दत्ता, स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य चिकित्सक डॉ. डीके अरोड़ा और स्टेशन अधीक्षक भगवान सहाय मीणा।
स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात हैं ये कर्मचारी
मुख्य चिकित्सक डॉ. डीके अरोड़ा, फार्मासिस्ट बीपी बांगड़े, ओटीए सत्यनारायण, अस्पताल परिचारक साधुराम, नर्स नीलम और सफाई कर्मचारी राजबाला।
करीब 30 साल पुराना है स्वास्थ्य केंद्र
रेल मंत्री बंसीलाल के कार्यकाल में 11 दिसंबर 1985 को स्वास्थ्य केंद्र का उद्घाटन हुआ था। तब से लेकर अब तक स्वास्थ्य केंद्र में न तो सुविधाएं बढ़ीं और न ही स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या।
मिली हैं खामियां, प्रगति रिपोर्ट मंगाकर करेंगे समीक्षा
यह रूटीन जांच है। रेलवे के इतने बड़े परिवार में ऐसी जांच चलती रहती है। जो खामियां मिली हैं, उन्हें दूर करने का निर्देश दिया है। जल्द ही बैठक में स्वास्थ्य केंद्र के प्रगति की रिपोर्ट दिल्ली मंगवाएंगे और दोबारा जांच करेंगे।
- डॉ. पद्म सिंह नेगी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग, दिल्ली मंडल, रेलवे।
उपलब्ध हैं प्राथमिक उपचार और जरूरी दवाएं
स्वास्थ्य केंद्र में रेलवे कर्मचारियों और घायल यात्रियों के प्राथमिक उपचार उपलब्ध हैं। इसके लिए इमरजेंसी किट हमेशा तैयार रहती है। सामान्य बीमारियों की दवाएं उपलब्ध हैं। जांच में जो खामियां मिली हैं, उन्हें जल्द दूर किया जाएगा।
- डॉ. डीके अरोड़ा, मुख्य चिकित्सक, स्वास्थ्य केंद्र, रेलवे स्टेशन, रोेहतक।
सही करवाएंगे दरवाजा
जल्द आवश्यकता न पड़ने के कारण दरवाजा जाम हो गया है। आईडब्ल्यू को निर्देश दे दिया है। जल्द ही दरवाजे को ठीक करवाएंगे।
- भगवान सहाय मीणा, स्टेशन अधीक्षक, रेलवे स्टेशन