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जेलों में अप्राकृतिक मौत पर साढ़े सात लाख मुआवजे का प्रावधान : जस्टिस एसके मित्तल

Sat, 04 Sep 2021 01:47 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 04 Sep 2021 01:47 AM IST
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Provision of seven and a half lakh compensation for unnatural death in jails: Justice SK Mittal
जेलों में अप्राकृतिक मौतों को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग का रुख बहुत सख्त है। ऐसे मामलों की पड़ताल करवाकर परिजनों को मुआवजा दिलाया जाता है। यह बात हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एसके मित्तल ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।
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उन्होंने कहा कि अगर जेलों में कोई भी मौत प्राकृतिक नहीं है तो ड्यूटी मजिस्ट्रेट उसकी जांच करता है। हर मौत की जांच रिपोर्ट आयोग को भेजी जाती है। इसके बाद परिजनों को मुआवजा देने का फैसला किया जाता है। आयोग के कहने पर हाल ही में राज्य सरकार ने इस संबंध में मुआवजा नीति ही बना दी है। इसके तहत अप्राकृतिक मौत पर परिजनों को साढ़े सात लाख रुपये मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। अगर बंदी ने जेल के अंदर आत्महत्या की है तो पांच लाख रुपये दिए जाते हैं। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि एक साल में जेलों में आत्महत्या करने के 10-15 मामले आ जाते हैं। ज्यूडीशियल जांच के बाद कार्रवाई की जाती है। जस्टिस मित्तल ने बताया कि साल में आयोग के पास ढाई-तीन हजार शिकायतें आती हैं। वर्ष 2020 से पहले की कोई भी शिकायत अब लंबित नहीं है। छह माह में शिकायत का निपटारा कर दिया जाता है।
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सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस की
उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस से संबंधित होती हैं। इनके अलावा स्कूल, वृद्धावस्था पेंशन, राशन कार्ड से संबंधित मामले भी आते हैं। पानी, सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं के मामले भी आते हैं। नगर निगम, नगर पालिका से जुड़े काफी मामले भी होते हैं।
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निगमायुक्त से मांगा जवाब
जस्टिस मित्तल ने कहा कि आयोग मीडिया रिपोर्ट पर संज्ञान लेकर भी कार्रवाई करता है। ऐसी ही एक खबर के आधार पर रोहतक के निगम कमिश्नर से जवाब मांगा गया था। मामला अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से संबंधित था। पैसे न मिलने के कारण संस्कार नहीं हो पा रहा था। निगम कमिश्नर से इस संबंध में जवाब मांगा गया। सर्किट हाउस पहुंचने पर उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार, एसपी राहुल शर्मा, निगमायुक्त नरहरी सिंह बांगड़ ने उनका स्वागत किया। इस दौरान जिला व सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार यादव, आयोग के सदस्य दीप भाटिया, विशेष सचिव गुलशन खुराना व डीएसपी गोरखपाल भी मौजूद थे।

जिला कारागार का किया निरीक्षण
जस्टिस मित्तल ने बाद में जिला कारागार का निरीक्षण किया। उन्होंने बंदियों के रहन-सहन, खान-पान और रहने की स्थिति का जायजा लिया। जेल में बंदियों को दी जा रही चिकित्सा सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। महिला वार्ड में महिला बंदियों की जीवन शैली के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बंदियों की जीवन शैली में सुधार के लिए जेल प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों, तकनीकी कोर्स व शिक्षाप्रद कार्यों की सराहना की।
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