Rohtak: MBBS में प्रवेश के लिए दस लाख रुपये सालाना बांड पॉलिसी पर हंगामा, पीजीआई के बाहर डटे विद्यार्थी
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रदेश में एमबीबीए के प्रवेश के समय ही एक वर्ष के लिए 10 लाख रुपये के बांड की अनिवार्यता लागू की गई है। इतनी बड़ी रमक अभिभावकों के लिए देना नामुमकिन है। सरकार के इस फैसले से केवल धनाढ्य वर्ग ही डॉक्टरी की पढ़ाई कर सकेगा।
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हरियाणा के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की प्रवेश प्रक्रिया शुरुआत में ही विवादों में उलझ गई है। सरकार की दस लाख रुपये सालाना बांड पॉलिसी इसकी वजह बताई जा रही है। कोर्स में प्रवेश के लिए सरकार की इस शर्त का विरोध शुरू हो गया है। इसी कड़ी में मंगलवार को पीजीआई के एमबीबीएस विद्यार्थियों व अभिभावकों ने निदेशक कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने निदेशक कार्यालय से मेडिकल मोड़ तक विरोध मार्च निकालकर पॉलिसी के प्रति विरोध प्रकट किया। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के बीच वी वांट जस्टिस का नारा गूंजता रहा।
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना है कि सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल ही नहीं करना चाहती है। इसे सुधार के बजाय व्यवस्था और गड़बड़ाने वाले कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बांड पॉलिसी लागू की गई है। इसके तहत एमबीबीएस में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को दस लाख रुपये का बांड देना होगा। ऐसा देश के किसी भी प्रांत में नहीं है। हरियाणा को छोड़कर सभी राज्यों में कम फीस पर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है।
विद्यार्थी व अभिभावक हो जाएंगे कर्जदार
प्रदेश में एमबीबीए के प्रवेश के समय ही एक वर्ष के लिए 10 लाख रुपये के बांड की अनिवार्यता लागू की गई है। इतनी बड़ी रमक अभिभावकों के लिए देना नामुमकिन है। सरकार के इस फैसले से केवल धनाढ्य वर्ग ही डॉक्टरी की पढ़ाई कर सकेगा। जबकि आम घरों व होनदार विद्यार्थी इस दायरे से बाहर हो जाएंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा जाएंगी। यही नहीं, विद्यार्थी व उनके अभिभावक कर्जदार हो जाएंगे।
बांड से खत्म हो जाएगा नीट परीक्षा का वजूद
विद्यार्थियों ने कहा कि बांड पॉलिसी के तहत रुपये देकर प्रवेश मिलेगा। इससे अमीर घरों के बच्चों को अच्छे सरकारी कॉलेजों में प्रवेश मिल जाएगा। अब तक ऐसे विद्यार्थी निजी कॉलेजों में मोटी फीस देकर प्रवेश लेते थे। जबकि होनहार विद्यार्थी नीट परीक्षा में टॉप कर अच्छे अंकों के आधार पर प्रवेश प्राप्त करते थे। इस नई व्यवस्था से नीट परीक्षा का वजूद ही नहीं रहेगा।
नई शिक्षा नीति के नाम पर धोखा
विद्यार्थियों ने कहा कि नई शिक्षा नीति के नाम पर सरकार विद्यार्थियों के साथ धोखा कर रही है। नई व्यवस्था के बहाने में बेतहाशा फीस बढ़ाई जा रही है। यह न तो विद्यार्थियों के हित में है न शिक्षा के। इससे शिक्षा की जरूरत वाला बड़ा तबका अध्ययन से वंचित हर जाएगा। आम घरों के बच्चे न पढ़ पाएंगे न नौकरी लग पाएंगे। वे केवल मजदूरी करेंगे। यही मेडिकल शिक्षा में हो रहा है। यह अन्याय है। इसका विरोध किया जाएगा।