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एमडीयू के गणित विभाग में प्रवेश प्रक्रिया की तैयारी
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रोहतक। एमडीयू के इंटीग्रेटेड कोर्सों पर छाए मुश्किलों के बादल अभी भी नहीं छंटे हैं। विधि विभाग की प्रवेश प्रक्रिया को लेकर एक और विद्यार्थी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अदालत ने विवि प्रशासन को डीएससी श्रेणी से दाखिले में अवसर देने के निर्देश जारी किए हैं। इस फैसले के बाद ऐसे दूसरे वंचित विद्यार्थियों के लिए भी रास्ता खुल गया है।
विधि विभाग में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाली काजल ने सिविल जज सीनियर डिविजन आशीष कुमार शर्मा की अदालत में न्याय की गुहार लगाई है। अदालत ने एमडीयू के खिलाफ दी गई शिकायत की गुरुवार को सुनवाई की। छात्रा की ओर से अधिवक्ता रजनीश सुंदरपुरिया व अनीश आहल्याण ने केस की पैरवी की। छात्रा का कहना है कि उसने विधि विभाग के इंटीग्रेटेड कोर्स में प्रवेश के लिए अनुसूचित जाति श्रेणी के डीएससी वर्ग में आवेदन किया था। इसके अलावा प्रमाण पत्र भी अपलोड किया था। विवि ने आवेदन पत्र को दूसरी श्रेणी में बदलते हुए दाखिले से वंचित कर दिया। विवि के सॉफ्टवेयर में आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं होने तक फीस भरने की सूचना जारी नहीं होती है। मेरा आवेदन भरे जाने के बाद फीस जमा कराने की सूचना मिली। इस पर फीस भी जमा करा दी। अब पता लगा कि मेरा आवेदन ही रद्द कर दिया गया है। छात्रा के अधिवक्ता ने बताया कि अदालत में पीड़ित का पक्ष रखते हुए एक सूची पेश की। इसमें विवि ने पहले भी डीएससी श्रेणी को माना है। इस केस में श्रेणी को मानने से इनकार किया गया है। दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने विवि को छात्रा का नाम दाखिला प्रक्रिया में शमिल करते हुए उसे मौका देने का निर्देश जारी किया है। यह छात्रा के लिए बड़ी राहत है। इससे दूसरे वंचित विद्यार्थियों का रास्ता भी खुल गया है। विवि विवि के खिलाफ केस चल रहे हैं। अब तक सभी केसों में पीड़ितों को राहत मिली है। अदालत से न्याय व राहत की आस है।
गणित विभाग की मेरिट सूची अटकी
एमडीयू गणित विभाग में इंटीग्रेटेड कोर्स की दाखिला प्रक्रिया अभी अटकी हुई है। वीरवार को भी इस कोर्स की मेरिट सूची जारी नहीं हुई। इसके लिए विद्यार्थियों को अभी और इंतजार करना होगा। कोर्ट स्टे हटने संबंधी निर्देश जारी नहीं मिलने की वजह से दाखिला प्रक्रिया की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है। इसके अलावा यूसीसी निदेशक कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। ऐसे में फिलहाल दाखिला प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित होती नजर आ रही है।
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कॉलेजों में आनलाइन दाखिला प्रक्रिया
प्रदेश के कॉलेजों में स्नातक स्तर की दाखिला प्रक्रिया जोरों पर है। विद्यार्थी आनलाइन आवेदन करने में व्यस्त हैं। डीएचई ने भी आवेदन पत्रों की जांच को रफ्तार देने का प्रयास किया है। इसके तहत सभी कॉलेजों को दिए गए आवेदन पत्रों की जांच जल्द पूरी करने को कहा गया है। ऐसे में कॉलेज स्टाफ काम में व्यस्त है। दस्तावेजों की जांच के साथ एक टीम विद्यार्थियों की हेल्प के लिए भी जुटी है।
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विधि विभाग में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाली काजल ने सिविल जज सीनियर डिविजन आशीष कुमार शर्मा की अदालत में न्याय की गुहार लगाई है। अदालत ने एमडीयू के खिलाफ दी गई शिकायत की गुरुवार को सुनवाई की। छात्रा की ओर से अधिवक्ता रजनीश सुंदरपुरिया व अनीश आहल्याण ने केस की पैरवी की। छात्रा का कहना है कि उसने विधि विभाग के इंटीग्रेटेड कोर्स में प्रवेश के लिए अनुसूचित जाति श्रेणी के डीएससी वर्ग में आवेदन किया था। इसके अलावा प्रमाण पत्र भी अपलोड किया था। विवि ने आवेदन पत्र को दूसरी श्रेणी में बदलते हुए दाखिले से वंचित कर दिया। विवि के सॉफ्टवेयर में आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं होने तक फीस भरने की सूचना जारी नहीं होती है। मेरा आवेदन भरे जाने के बाद फीस जमा कराने की सूचना मिली। इस पर फीस भी जमा करा दी। अब पता लगा कि मेरा आवेदन ही रद्द कर दिया गया है। छात्रा के अधिवक्ता ने बताया कि अदालत में पीड़ित का पक्ष रखते हुए एक सूची पेश की। इसमें विवि ने पहले भी डीएससी श्रेणी को माना है। इस केस में श्रेणी को मानने से इनकार किया गया है। दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने विवि को छात्रा का नाम दाखिला प्रक्रिया में शमिल करते हुए उसे मौका देने का निर्देश जारी किया है। यह छात्रा के लिए बड़ी राहत है। इससे दूसरे वंचित विद्यार्थियों का रास्ता भी खुल गया है। विवि विवि के खिलाफ केस चल रहे हैं। अब तक सभी केसों में पीड़ितों को राहत मिली है। अदालत से न्याय व राहत की आस है।
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गणित विभाग की मेरिट सूची अटकी
एमडीयू गणित विभाग में इंटीग्रेटेड कोर्स की दाखिला प्रक्रिया अभी अटकी हुई है। वीरवार को भी इस कोर्स की मेरिट सूची जारी नहीं हुई। इसके लिए विद्यार्थियों को अभी और इंतजार करना होगा। कोर्ट स्टे हटने संबंधी निर्देश जारी नहीं मिलने की वजह से दाखिला प्रक्रिया की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है। इसके अलावा यूसीसी निदेशक कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। ऐसे में फिलहाल दाखिला प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित होती नजर आ रही है।
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कॉलेजों में आनलाइन दाखिला प्रक्रिया
प्रदेश के कॉलेजों में स्नातक स्तर की दाखिला प्रक्रिया जोरों पर है। विद्यार्थी आनलाइन आवेदन करने में व्यस्त हैं। डीएचई ने भी आवेदन पत्रों की जांच को रफ्तार देने का प्रयास किया है। इसके तहत सभी कॉलेजों को दिए गए आवेदन पत्रों की जांच जल्द पूरी करने को कहा गया है। ऐसे में कॉलेज स्टाफ काम में व्यस्त है। दस्तावेजों की जांच के साथ एक टीम विद्यार्थियों की हेल्प के लिए भी जुटी है।