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Rohtak News: विरासत में नहीं मिलता जमीन पर कब्जा... निचली अदालत का पलट दिया निर्णय
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माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। जिला अदालत ने नगर निगम की दो एकड़ जमीन को लेकर निर्णय दिया है कि कब्जा विरासत में नहीं मिल सकता। नियमों के दायरे में रहकर इसे साबित करना होता है। ऐसे में सुनारिया गांव की 16 कैनाल जमीन को लेकर तीन साल पहले दिया गया निचली अदालत का निर्णय निरस्त किया जाता है।
साथ ही, नगर निगम की अर्जी मंजूर की जाती है। निगम अब जमीन को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
निगम के वकील ने बताया कि सुनारिया की सीमा में 16 कैनाल जमीन है। 2010 में प्रदेश सरकार ने गांव को निगम में शामिल कर दिया। इसके बाद गांव की पंचायत व सरपंच के माध्यम से जमीन निगम के खाते में आ गई। इसके बावजूद जमीन पर एक परिवार का कब्जा है।
इतना ही नहीं, 2022 में जमीन को लेकर निचली अदालत ने निर्णय ग्रामीणों के पक्ष में सुनाया जोकि नियमों के तहत नहीं है। जवाब में अदालत में दूसरे पक्ष ने कहा कि उनका परिवार 30 साल से ज्यादा समय से जमीन पर काश्त कर रहा है।
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पंजाब अधिभोगी काश्तकारों (स्वामित्व निहित करना) अधिनियम, 1952 के तहत इतनी लंबी अवधि तक अगर कोई काश्त करता है तो वह जमीन के स्वामित्व का दावा कर सकता है। उनके पूर्वज का नाम भी जमीन के रिकाॅर्ड में दर्ज है।
निचली अदालत ने ग्रामीणों के पक्ष में निर्णय सुनाया। निर्णय के खिलाफ नगर निगम सेशन में अपील की। अदालत में केस की सुनवाई के दौरान पुख्ता तथ्य नहीं रख सके।
निगम की ओर से रखे सवालों पर अदालत ने दूसरे पक्ष ने जवाब मांगा तो ठोस तथ्य सामने नहीं आ सके। इसके बाद कोर्ट ने कहा दूसरे पक्ष के पास राजस्व विभाग के रिकॉर्ड मलकियत का ठोस दस्तावेज नहीं है।
इतना ही नहीं, साबित करने में भी दूसरा पक्ष विफल रहा कि वे उक्त जमीन के काश्तकार हैं या गैर-मारूसी के तौर पर हैं। निचली अदालत में दायर केस खारिज किया जाता है। साथ ही, निगम की अपील स्वीकार की जाती है।
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रोहतक। जिला अदालत ने नगर निगम की दो एकड़ जमीन को लेकर निर्णय दिया है कि कब्जा विरासत में नहीं मिल सकता। नियमों के दायरे में रहकर इसे साबित करना होता है। ऐसे में सुनारिया गांव की 16 कैनाल जमीन को लेकर तीन साल पहले दिया गया निचली अदालत का निर्णय निरस्त किया जाता है।
साथ ही, नगर निगम की अर्जी मंजूर की जाती है। निगम अब जमीन को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
निगम के वकील ने बताया कि सुनारिया की सीमा में 16 कैनाल जमीन है। 2010 में प्रदेश सरकार ने गांव को निगम में शामिल कर दिया। इसके बाद गांव की पंचायत व सरपंच के माध्यम से जमीन निगम के खाते में आ गई। इसके बावजूद जमीन पर एक परिवार का कब्जा है।
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इतना ही नहीं, 2022 में जमीन को लेकर निचली अदालत ने निर्णय ग्रामीणों के पक्ष में सुनाया जोकि नियमों के तहत नहीं है। जवाब में अदालत में दूसरे पक्ष ने कहा कि उनका परिवार 30 साल से ज्यादा समय से जमीन पर काश्त कर रहा है।
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पंजाब अधिभोगी काश्तकारों (स्वामित्व निहित करना) अधिनियम, 1952 के तहत इतनी लंबी अवधि तक अगर कोई काश्त करता है तो वह जमीन के स्वामित्व का दावा कर सकता है। उनके पूर्वज का नाम भी जमीन के रिकाॅर्ड में दर्ज है।
निचली अदालत ने ग्रामीणों के पक्ष में निर्णय सुनाया। निर्णय के खिलाफ नगर निगम सेशन में अपील की। अदालत में केस की सुनवाई के दौरान पुख्ता तथ्य नहीं रख सके।
निगम की ओर से रखे सवालों पर अदालत ने दूसरे पक्ष ने जवाब मांगा तो ठोस तथ्य सामने नहीं आ सके। इसके बाद कोर्ट ने कहा दूसरे पक्ष के पास राजस्व विभाग के रिकॉर्ड मलकियत का ठोस दस्तावेज नहीं है।
इतना ही नहीं, साबित करने में भी दूसरा पक्ष विफल रहा कि वे उक्त जमीन के काश्तकार हैं या गैर-मारूसी के तौर पर हैं। निचली अदालत में दायर केस खारिज किया जाता है। साथ ही, निगम की अपील स्वीकार की जाती है।