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जिंदगी से लड़ नन्हें सपनों को उड़ान दे रही पूजा

Fri, 05 May 2017 02:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 05 May 2017 02:34 AM IST
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Pooja, giving flying to the dreams of living with life, education in rohtak
प्राइमरी टीचर पूजा - फोटो : अमर उजाला
इंसान की सफलता और विफलता उसके जज्बे से तय होती है। बीच राह में जिन लोगों के कदम डगमगा जाते हैं, वे मंजिल तक नहीं पहुंचे पाते। कई बार हम सुविधा नहीं होेने के कारण भी निराश हो जाते हैं, लेकिन डोभ के गर्वनमेंट गर्ल्स प्राइमरी स्कूल की प्राइमरी टीचर पूजा की कुछ करने की चाहत ही उन्हें शिक्षकों के लिए मिसाल बना रही है।
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वह जिंदगी से लड़ नन्हें सपनों को उड़ान देने का काम कर रही है। जहां कुछ शिक्षक पढ़ाई के पुराने ढर्रों से ही बाहर नहीं निकलते हैं, वहीं पूजा ने तकनीक से जुड़कर केवल 500 रुपये में सरकारी स्कूल को स्मार्ट क्लास स्कूल का रूप दे दिया। अब इस स्कूल में रोजाना बच्चे यू-ट्यूब के जरिये ही विजुअल पढ़ाई कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि दूसरे कक्षा के बच्चे सवालों का फर्राटेदार अंग्रेजी में जवाब देते हैं। स्कूल में रोजाना म्यूजिकल प्रार्थना भी होती है। 
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 रामगोपाल कॉलोनी निवासी पूजा ने साल 2011 में टीचिंग की शुरुआत की। इनके दिल में छेद है, जिसे ठीक करने के लिए बड़े चिकित्सकों ने भी मना कर दिया है। यह छेद आपरेशन से ठीम नहीं हो सकता है, इसलिए वह दवाइयों के सहारे ही जी रही है। इसके बाद भी उनके चेहरे पर दूर-दूर तक शिकन नहीं दिखाई देती। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूल में वे गरीब बच्चे पढ़ने आते हैं, जो निजी स्कूलों की पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते हैं। वह उनके जीवन को बेहतर रूप देने के लिए यह सब कोशिशें कर रही है। ये सभी बच्चे उनकी जिम्मेदारी हैैं। इन्हें जिंदगी की दौड़ में पिछड़ते हुए नहीं देखना चाहती हूं, इसलिए अपना 100 फीसदी देकर इनके भविष्य को संवारने की कोशिश कर रही हूं। 
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बच्चों के जुबां पर नाम, यही है सपना 
31 वर्षीय पूजा का सपना है कि उनके छात्रों की जुबां पर उनका नाम रहे, बस यही सपना है। वे इन बच्चों के लिए बहुत कुछ करना चाहती हैं। अगर शुरुआती दौर में ही बच्चों ने बेसिक नहीं सीखा तो वे बाकी की जिंदगी में पिछड़ जाएंगे। वह कविता लिखने और गाना गाने का शोक रखती हैं।

शिक्षकों ने मना भी किया, नहीं रुके कदम 
वह रोजाना स्कूल में म्यूजिकल प्रार्थना कराती हैं। इसके लिए अपनी गाड़ी का इस्तेमाल करती है। इसमें फोन को जोड़कर स्पीकर का बेस बढ़ा देती हैं और सभी बच्चे भी खूब दिल लगाकर प्रार्थना करते हैं। कुछ शिक्षकों ने उन्हें मना भी किया कि वे अपनी गाड़ी क्यों खराब कर रही हैैं। उस समय मैंने कहा कि हमारी नौकरी भी इन्हीं बच्चोें की वजह से ही है। इनके भविष्य को बनाना हमारी जिम्मेदारी है और यह कोई वेस्टेज नहीं है।

डॉक्यूमेंट्री देखकर दास ने भी दी बधाई  
पूजा के जीवन पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनवाई गई है। बीईओ वीरेंद्र मलिक के कहने पर चंडीगढ़ में शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी पीके दास की बैठक में भी इसे दिखाया गया। इस पर दास ने खुद शिक्षिका पूजा के प्रयासों की सराहना की। जिला और ब्लॉक स्तर पर स्कूल प्रधानाचार्यों और हेड मास्टरों की बैठक में भी पूजा की डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई।


पिता कोआपरेटिव बैंक में हैं मैनेजर,  बहन पारुल जुलाना में लेक्चरर
तीन भाई-बहन में मंझली पूजा के पिता धर्मपाल सिंह कोआपरेटिव बैंक में मैनेजर हैं। इनकी माता गीता देवी गृहिणी हैैं। बड़ी बहन पारुल सहरावत जुलाना में राजनीतिक विज्ञान की लेक्चरर है और भाई दिग्विजय बीटेक करने के बाद दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग ले रहे हैं।
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