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Rohtak News: दो कॉल सेंटर पर पुलिस का छापा, दो संचालक काबू

Thu, 24 Apr 2025 02:43 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 24 Apr 2025 02:43 AM IST
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Police raid on two call centers, two operators arrested
रोहतक। साइबर थाना पुलिस ने दिल्ली और नोएडा में चल रहे ठगी के दो कॉल सेंटर पर छापा डालकर दो संचालकों को मंगलवार को काबू किया है। आरोपियों को अदालत में पेश किया और तीन दिन का रिमांड लिया है। उनके कब्जे से सवा दो लाख रुपये, 4 नए आईफोन और करीब 100 लोगों का डाटा बरामद किया है। अभी तक करीब 70 से 80 लाख रुपये की ठगी कर चुके हैं।
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एक से तीन लाख रुपये क्रेडिट लिमिट के कार्ड धारक उनके निशाने पर रहते थे। अभी करीब 10 आरोपियों की पुलिस को तलाश हैं और पूछताछ के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। थाना प्रभारी कुलदीप कुमार ने बताया कि दो माह पहले रोहतक निवासी रविंद्र से क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर 1.40 लाख और विजय से क्रेडिट कार्ड के पाॅइंट को कैश कराने के नाम पर 2.40 लाख रुपये की ठगी की थी। दोनों की शिकायत दर्ज करके जांच शुरू की तो उनका लिंक दिल्ली और उत्तर प्रदेश के नोएडा में दो कॉल सेंटरों से मिला।
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पुलिस ने करीब 12 दिन तक हर पहलू पर जांच की, लेकिन संचालक अपने कॉल सेंटरों पर नहीं मिले, जबकि वहां पर कर्मचारी मिलते थे और वह भी शिफ्ट में आते थे। मंगलवार को दिल्ली और नोएडा के कॉल सेंटर पर जब संचालक पहुंचे तो पुलिस की अलग-अलग टीमों ने दोनों को काबू कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि रोज उनके पांच से 10 ग्राहकों को शिकार बनाने का लक्ष्य रहता था और एक दिन में दो से तीन लोग उनके झांसे में आ जाते थे। दिवाली से अब तक करीब 70 से 80 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दे चुके हैं। दिल्ली निवासी दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया गया और तीन दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
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एक से तीन लाख लिमिट के क्रेडिट कार्ड थे निशाने पर
साइबर ठगों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उनके निशाने पर ऐसे लोग रहते थे, जिनको क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वानी होती थी। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड पर बोनस पाॅइंट को कैश कराने के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। उनके निशाने पर मध्यम वर्ग के एक से तीन लाख रुपये की लिमिट के क्रेडिट कार्ड धारक होते थे।
ऐसे करते थे ठगी
पुलिस ने बताया कि साइबर जालसाज क्रेडिट लिमिट बढ़वाने वालों को एपीके फाइल भेजकर उनसे फाॅर्म भरवाया जाता था। उसी दौरान पीड़ित के मोबाइल को हैक कर लिया जाता है। इससे जो ओटीपी पीड़ित व्यक्ति को आता था, वह ठग को भी मिल जाता था। फाॅर्म भरवाते समय ठग कहते कि वह अपना ओटीपी किसी को शेयर न करें। उसी दौरान ओटीपी का प्रयोग करते हुए रुपये ट्रांसफर कर लेते या फिर उससे शॉपिंग कर लेते थे। एपीके फाॅर्म भरवाने के लिए उसी तरह के फॉर्मेट बाहर से लोगों से बनवाए रखते थे और उसी को भेजकर भरवा लेते थे।

बैंक कर्मचारियों से ले लेते थे क्रेडिट कार्ड धारकों का डाटा
निजी बैंकों में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों से आरोपी ठग डाटा लेते थे। हालांकि, निजी बैंक के कर्मचारी बिल आदि भेजने का काम करते थे तो उनके पास क्रेडिट कार्ड धारक की जानकारी होती थी। उसी का लाभ उठाकर ठगी करते थे।
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