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कोरोना वायरस के नाम पर हो रही है धोखाधड़ी, पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
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रोहतक। कोरोना वायरस के नाम से साइबर अपराधियों द्वारा अलग-2 तरीकों से धोखाधड़ी की जा रही है। लोगों को कोरोना वायरस का डर दिखाकर या किसी अन्य तरीके से धोखाधड़ी करके रुपये हड़पे जा रहा है। जिला पुलिस प्रशासन ने धोखाधड़ी से बचने के उपायों के साथ एडवाइजरी जारी की है।
1. टेलीफोन धोखाधड़ी:- साइबर ठग अस्पताल के अधिकारी बनकर किसी को फोन करते है और दावा करते हैं कि उनका एक रिश्तेदार कोरोना वायरस से पीड़ित हो गया है और उनके अस्पताल में भर्ती है। ठग उनके रिश्तेदार के चिकित्सा उपचार के लिए भुगतान करने का अनुरोध करते है। पीड़ित व्यक्ति सहानुभूतिवश उनके जाल में फंसकर भुगतान कर देते हैं।
2. फिशिंग:- ठग द्वारा राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अधिकारी बनकर कोरोना महामारी के संदर्भ में ई-मेल के द्वारा या अन्य साधनों से एक लिंक भेजते है। जिसे खोलने पर बैंक से संबंधित जानकारी देनी होती है। जानकारी देने पर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर धोखाधड़ी की जाती है।
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3. मालवेयर:- ठग द्वारा एक प्रख्यात विश्वविद्यालय के नाम से कोरोना महामारी के संदर्भ में नवीनतम जानकारी हासिल करने के लिए एक वेबसाइट बनाई गई। जबकि वास्तव में यह एक मालवेयर है। वेबसाइट पर जाने पर आपका सिस्टम हैक हो जाता है और आपके सिस्टम की सारी जानकारी ठग हासिल कर सकता है। जानकारी हासिल करने के बाद ठग कई तरीकों से धोखाधड़ी कर सकते हैं।
4. मेलिशियश मोबाइल एप्लिकेशन:- एक प्रख्यात विश्वविद्यालय द्वारा ‘‘कोरोना लाइव’’ के नाम से एक एंड्रॉयड एप बनाई गई है जो कोरोना महामारी के संदर्भ में जानकारी उपलब्ध कराती है। धोखेबाजों द्वारा ‘‘कोरोना लाइव 1.1’’ नाम से एक मेलिशियश एंड्रॉयड एपलीकेशन बनाई गई है। इस एप की सहायता से धोखेबाज आपके मोबाइल में उपलब्ध सारी जानकारी प्राप्त कर सकते है। निजी व बैंक संबंधी जानकारी हासिल कर धोखेबाज व्यक्ति आपको कई तरीकों से क्षति पहुंचा सकते हैं।
5. फेक एडवाइजरी:- कोरोना महामारी के संदर्भ में यूनिसेफ संस्था का मैसेज व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है। यह वायरल मैसेज नकली है। यूनिसेफ संस्थान द्वारा कोरोना महामारी के संदर्भ में इस प्रकार की कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है।
6. कोरोना रिलीफ फंड:- धोखाबाजों द्वारा कोराना महामारी के लिए एक फर्जी रिलीफ फंड भी बनाया गया है। इसके अलावा धोखाबाजों द्वारा पीएम, सीएम रिलिफ फंड के नाम पर भी धोखाधड़ी की जा रही है। धोखेबाजों से बचे और सरकारी व सत्यापित रिलीफ फंड में ही रुपये दान करें।
अपील:- रोहतक पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोरोना महामारी के संदर्भ में प्राप्त होने वाले किसी भी प्रकार के मैसेज की पहले अच्छे तरीके से जांच करे ले। किसी भी अंजान व्यक्ति द्वारा ई-मेल, मैसेज या अन्य साधनों से भेजे गए लिंक को खोलने से बचें। किसी भी अंजान एप को अपने मोबाइल में इंस्टाल न करे। किसी भी अंजान वेबसाइट को अपने सिस्टम में न खोलें। केवल सरकारी या सत्यापित मोबाइल एप, वेबसाइट, लिंक आदि का ही प्रयोग करें। धोखेबाजों से सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। किसी भी प्रकार की पुलिस सहायता के लिए अपने नजदीकी थाना, चौकी में तुरंत संपर्क करें।
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1. टेलीफोन धोखाधड़ी:- साइबर ठग अस्पताल के अधिकारी बनकर किसी को फोन करते है और दावा करते हैं कि उनका एक रिश्तेदार कोरोना वायरस से पीड़ित हो गया है और उनके अस्पताल में भर्ती है। ठग उनके रिश्तेदार के चिकित्सा उपचार के लिए भुगतान करने का अनुरोध करते है। पीड़ित व्यक्ति सहानुभूतिवश उनके जाल में फंसकर भुगतान कर देते हैं।
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2. फिशिंग:- ठग द्वारा राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अधिकारी बनकर कोरोना महामारी के संदर्भ में ई-मेल के द्वारा या अन्य साधनों से एक लिंक भेजते है। जिसे खोलने पर बैंक से संबंधित जानकारी देनी होती है। जानकारी देने पर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर धोखाधड़ी की जाती है।
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3. मालवेयर:- ठग द्वारा एक प्रख्यात विश्वविद्यालय के नाम से कोरोना महामारी के संदर्भ में नवीनतम जानकारी हासिल करने के लिए एक वेबसाइट बनाई गई। जबकि वास्तव में यह एक मालवेयर है। वेबसाइट पर जाने पर आपका सिस्टम हैक हो जाता है और आपके सिस्टम की सारी जानकारी ठग हासिल कर सकता है। जानकारी हासिल करने के बाद ठग कई तरीकों से धोखाधड़ी कर सकते हैं।
4. मेलिशियश मोबाइल एप्लिकेशन:- एक प्रख्यात विश्वविद्यालय द्वारा ‘‘कोरोना लाइव’’ के नाम से एक एंड्रॉयड एप बनाई गई है जो कोरोना महामारी के संदर्भ में जानकारी उपलब्ध कराती है। धोखेबाजों द्वारा ‘‘कोरोना लाइव 1.1’’ नाम से एक मेलिशियश एंड्रॉयड एपलीकेशन बनाई गई है। इस एप की सहायता से धोखेबाज आपके मोबाइल में उपलब्ध सारी जानकारी प्राप्त कर सकते है। निजी व बैंक संबंधी जानकारी हासिल कर धोखेबाज व्यक्ति आपको कई तरीकों से क्षति पहुंचा सकते हैं।
5. फेक एडवाइजरी:- कोरोना महामारी के संदर्भ में यूनिसेफ संस्था का मैसेज व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है। यह वायरल मैसेज नकली है। यूनिसेफ संस्थान द्वारा कोरोना महामारी के संदर्भ में इस प्रकार की कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है।
6. कोरोना रिलीफ फंड:- धोखाबाजों द्वारा कोराना महामारी के लिए एक फर्जी रिलीफ फंड भी बनाया गया है। इसके अलावा धोखाबाजों द्वारा पीएम, सीएम रिलिफ फंड के नाम पर भी धोखाधड़ी की जा रही है। धोखेबाजों से बचे और सरकारी व सत्यापित रिलीफ फंड में ही रुपये दान करें।
अपील:- रोहतक पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोरोना महामारी के संदर्भ में प्राप्त होने वाले किसी भी प्रकार के मैसेज की पहले अच्छे तरीके से जांच करे ले। किसी भी अंजान व्यक्ति द्वारा ई-मेल, मैसेज या अन्य साधनों से भेजे गए लिंक को खोलने से बचें। किसी भी अंजान एप को अपने मोबाइल में इंस्टाल न करे। किसी भी अंजान वेबसाइट को अपने सिस्टम में न खोलें। केवल सरकारी या सत्यापित मोबाइल एप, वेबसाइट, लिंक आदि का ही प्रयोग करें। धोखेबाजों से सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। किसी भी प्रकार की पुलिस सहायता के लिए अपने नजदीकी थाना, चौकी में तुरंत संपर्क करें।