फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   Police implicated them in a false FIR, family acquitted after eight years

Rohtak News: पुलिस ने झूठी एफआईआर कर फंसाया, आठ साल बाद परिवार बरी

Fri, 25 Jul 2025 02:11 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Fri, 25 Jul 2025 02:11 AM IST
विज्ञापन
Police implicated them in a false FIR, family acquitted after eight years
रोहतक। काहनौर के दलित परिवार को आठ साल बाद अदालत से न्याय मिला है। पुलिस ने खुद के बचाव में झूठी एफआईआर दर्ज की थी। यह पुलिस के अत्याचार व मनमानी का एक स्पष्ट उदाहरण है। आरोपी बनाए गए परिवार के चारों सदस्यों को बरी करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मोहम्मद सागीर की अदालत ने यह टिप्पणी की है। साथ ही अदालत ने एसपी को पत्र भेजकर कहा है कि दो माह में पांचों पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाए।
विज्ञापन

पीड़ित परिवार के वकील ने बताया कि अक्तूबर 2016 में कलानौर थाने में कांस्टेबल सुरेंद्र मोहन ने केस दर्ज कराया कि वह एसपीओ अनिल के साथ रात करीब साढ़े 10 बजे आरोपी रवि को पकड़ने जा रहे थे। नशे में चार लोग आए और कहा कि रवि का कुछ नहीं बिगाड़ सकते। पहले हमसे निपटो।
विज्ञापन

पुलिस ने काहनौर गांव निवासी सुरेंद्र, कर्मबीर, सन्नी व सोनू के खिलाफ सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने, मारपीट व धमकी देने का केस दर्ज कर लिया था। काहनौर पुलिस चौकी के तत्कालीन प्रभारी एएसआई हरिराम को जांच अधिकारी बनाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि केस में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि सीधे अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। कहा गया कि अगर गिरफ्तार करते तो कानून व्यवस्था भंग हो सकती थी।

अदालत में उलझे पुलिसकर्मी, खुद के बचाव में बनाई झूठी कहानी
वकील ने बताया कि हकीकत में एक महिला ने उसी रात को पुलिस को शिकायत दी थी कि दो पुलिसकर्मी एक मकान में घुसे और अभद्रता की। परिवार ने पुलिस कंट्रोल रूम में सूचना दी। खुद को फंसता देखकर दो पुलिसकर्मियों कांस्टेबल सुरेंद्र मोहन व एसपीओ अनिल ने फर्जी कहानी बनाई। बकौल वकील सवालों के जवाब में एसपीओ अनिल ने स्वीकार किया कि उनका किसी प्रकार का कोई झगड़ा नहीं हुआ था। वे शराब के नशे में घर में घुसे थे और गाली दी थी। अदालत ने चारों आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही झूठी एफआईआर दर्ज करने पर कांस्टेबल सुरेंद्र मोहन, एसपीओ अनिल, जांच अधिकारी हरिराम, कांस्टेबल मनोज कुमार और हेड कांस्टेबल प्रदीप के खिलाफ अनुशासनात्मक विभागीय कार्रवाई के लिए एसपी को पत्र लिखा है। इस सभी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक विभागीय कार्रवाई की अनुपालना रिपोर्ट 2 माह में भेजनी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed