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पीजीआईएमएस के प्रशासनिक अधिकारी व ऑर्थो विभाग के डॉक्टरों की सवा घंटा चली बैठक

Tue, 22 Dec 2020 01:50 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 22 Dec 2020 01:50 AM IST
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Pgims administration officers Meeting with ortho doctors
पीजीआईएमएस के प्रशासनिक अधिकारी व ऑर्थो विभाग के डॉक्टरों की सोमवार को सवा घंटा चली बैठक में अंतिम निर्णय नहीं हो पाया। इसमें एक ओर ऑर्थो विभाग ने मांग रखी कि उनके खिलाफ चल रही जांच व पंजाब ऐंड हरियाणा हाईकोर्ट में दिया गया एफिडेविट वापस लिया जाए। वहीं प्रशासन ने सवाल उठाया कि उनके डॉक्टरों ने किस बात की यूनियन बना रखी है और मरीजों को प्रभावित किया जा रहा है। वह काम कैसे छोड़ सकते हैं और बगैर अनुमति अवकाश कैसे ले सकते हैं। बैठक के अंत में ऑर्थो विभाग को कहा गया कि प्रशासन जांच व एफिडेविट वापस लेने के लिए कानूनी सलाह लेगा, उसके बाद तय होगा क्या करना है। इस पर ऑर्थो विभाग ने एक सप्ताह का समय रखा है। इस दौरान अब मरीजों का काम नहीं रुकेगा और अगले सोमवार को फिर बैठक होगी।
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सूत्रों के अनुसार सोमवार को सुबह नौ बजे प्रशासन और ऑर्थो विभाग के डॉक्टरों की बैठक तय हुई थी। इसमें प्रशासन की ओर से कुलपति डॉ. ओपी कालरा, रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल, निदेशक डॉ. रोहतास कंवर यादव, एमएस डॉ. पुष्पा दहिया, डीएमएस खरीद व सेंट्रल स्टोर मौजूद रहे। वहीं ऑर्थो विभाग की ओर से डॉ. आरसी सिवाच, डॉ. राकेश गुप्ता, डॉ. आशीष देवगन, डॉ. रूप सिंह व डॉ. प्रदीप कंबोज बैठक में शामिल हुए। बैठक में प्रशासन ने कहा कि जांच चल रही है, इसमें क्या गलत है देखेंगे। इसके अलावा पंजाब ऐंड हरियाणा हाईकोर्ट में दिया गये एफिडेविट पर देखेंगे कि क्या हो सकता है। प्रशासन जो कानून संभव होगा, वहीं कर पाएगा। गौरतलब है कि ऑर्थो विभाग के अवैध इम्पलांट जब्त होने का मामला पंजाब ऐंड हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसमें संस्थान के डॉक्टर व प्रशासन भी पार्टी बने हैं। वहीं ऑर्थो इम्प्लांट को लेकर सेवानिवृत्त जज आरपी भसीन के पास भी इस मामले की जांच चल रही है। विभाग के डॉक्टर इन दोनों को लेकर प्रशासन पर आरोप लगाते रहते हैं कि उन्हें ह्रास किया जा रहा है। इसके चलते वह काम ना करने की चेतावनी भी दे चुके हैं।
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बीटी सैट को एनए करना पड़ सकता है भारी
सूत्रों के अनुसार बैठक में सवाल उठाया गया है कि विभाग बीटी सैट को एनए कैसे बता सकता है, जबकि सेंट्रल स्टोर में यह उपलब्ध है। बीटी सैट को एनए करने वाली नर्स से एमएस को जवाब तलब करने को कहा गया है कि वह ऐसा कैसे लिख सकती है। संस्थान में सामान कम हो सकता है, इसका मतलब यह नहीं है कि उसे एनए कर दिया जाए। आपात स्थिति में सामान के खरीद का विकल्प सभी अधिकारियों के पास होता है।
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2014 की पालिसी के अनुसार भरना होगा प्रफोर्मा
2014 में पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एनके मग्गू की बनाई गई पॉलिसी ही ऑर्थो विभाग में मान्य होगी। इसके तहत बनाए गए प्रफोर्मा के अनुसार ही डॉक्टर मरीज से इम्प्लांट मंगा सकते हैं। मरीज आजाद होगा वह चाहे इम्प्लांट अमृत स्टोर से ले या बाहर से। डॉक्टर मरीज को किसी निश्चित स्थान से सामान लेने को बाध्य नहीं कर सकता। गौरतलब है कि ऑर्थो विभाग प्रशासन से मांग करता है कि वह इम्प्लांट उपलब्ध करवाए। इसके लिए मरीज बाकायदा एमएस व निदेशक कार्यालय पहुंचते हैं।
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