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Rohtak News: पीजीआई में हर हफ्ते स्ट्रोक के 40 मरीज...शुरुआती चार घंटे हैं बेशकीमती
Wed, 29 Oct 2025 02:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 29 Oct 2025 02:37 AM IST
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रोहतक। सर्दियां आते ही पीजीआई में स्ट्रोक के केस बढ़ गए हैं। यहां हर हफ्ते 40 पीड़ित आ रहे हैं। इनमें कई युवा भी हैं। डॉक्टर इसके पीछे नशा व तनाव बताते हैं। उनके मुताबिक, स्ट्रोक के बाद चार घंटे बेशकीमती हैं। तुरंत मरीज को अस्पताल ले आएं तो पैरालिसिस ठीक हो सकता है।
पीजीआई के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर बताते हैं कि स्ट्रोक की वजह मस्तिष्क की नसों में खून का प्रवाह रुकना या धमनियों का फटना है। स्ट्रोक पड़ने पर व्यक्ति का शारीरिक संतुलन बिगड़ जाता है। चेहरे के हाव-भाव बदल जाते हैं। हाथ मुड़ जाते हैं। जबान भी लड़खड़ाने लगती है।
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पैरालिसिस के कारण पीड़ित सही से खड़ा भी नहीं हो पाता। मुंह भी टेढ़ा हो जाता है। न्यूरोलॉजी के डॉक्टर नीरज बताते हैं कि शराब, धूम्रपान, पर्याप्त नींद न लेने के कारण तनाव में जी रहे युवाओं में भी स्ट्रोक बढ़े हैं। कुछ गंभीर मामलों में स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
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यह हैं मुख्य कारण : बढ़ती उम्र स्ट्रोक का एक सामान्य कारण है। इसके साथ बीपी, शुगर, धूम्रपान, शराब पीना, अधिक मोटापा होने पर इसका खतरा बढ़ जाता है। आनुवांशिक वजहें भी आशंका बढ़ाती हैं। संवाद
30 हजार का टीका...पीजीआई में मुफ्त
डॉक्टर बताते हैं कि स्ट्रोक के शिकार मरीजों को पीजीआई में टीएनके इंजेक्शन लगाना जरूरी है। यह यहां पर मुफ्त में लगाया जाता है। इसकी बाजार में कीमत लगभग 30 हजार रुपये है। यह जान जोखिम के खतरे घटाकर रिकवरी की प्रक्रिया को तेजी से बढ़ाता है।
स्ट्रोक आने पर एक लाख में से 150 लोग पैरालिसिस का शिकार हो जाते हैं। ऐसे मरीजों की रिकवरी हो सकती है, बशर्ते उन्हें स्ट्रोक पड़ने के चार घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचा दिया जाए। यह चार घंटे मरीज के लिए गोल्डन पीरियड है। -डॉ. नीरज कुमार, न्यूरोलाॅजी विभाग, पीजीआई।
बरतें सावधानियां
- दिनचर्या सुधारें। व्यायाम करें।
- पोषणयुक्त खाना खाएं।
- नशे से दूर रहें।
- बीपी, शुगर है तो विशेष सावधानी बरतें।
- स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।