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Rohtak News: फेफड़ों की उम्र बताएगी पीएफटी मशीन, सांस के मरीजों को मिलेगी सही रिपोर्ट

Mon, 11 Nov 2024 11:57 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 11 Nov 2024 11:57 PM IST
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PFT machine will tell the age of lungs, respiratory patients will get correct report
रोहतक। अब सांस के मरीजों के फेफड़ों की जांच एकदम सटीक मिलेगी। लंबे इलाज के दौरान दवा का लाभ और फेफड़े के स्वास्थ्य पर असर की सही जानकारी भी पता चलेगी। यह सब पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) मशीन बताएगी। लंबे समय से इलाज करा रहे सांस के मरीजों के लिए यह अत्यंत लाभकारी साबित होगी। चिकित्सक के लिए भी इलाज करना आसान होगा। निजी केंद्रों पर यह जांच करने वाले पेशेवर नहीं हैं। इस कारण पीजीआई में यह सुविधा मरीजों के लिए बड़ी राहत देगी।
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पीएफटी मशीन की स्थापना से अब फेफड़ों की हर समस्या की सटीक जानकारी के साथ फेफड़े की उम्र के बारे में भी जान सकेंगे, फेफड़ा कितना खराब हो चुका है या खराब होगा या नहीं। यह मशीन करीब 15 लाख रुपये की है।
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पीजीआई में स्पायरोमीटर से होता है टेस्ट
अभी पीजीआई में डायग्नोसिस स्पायरोमीटर से होता रहा है। यह मशीन काफी पुरानी हो चुकी है। इसकी रिपोर्ट कितनी सटीक है यह कह पाना भी मुश्किल है। ऐसे में सांस के मरीज की सही डायग्नोसिस न होने कारण उसका सही इलाज कर पाना भी संभव नहीं होता है। इसके कारण मरीज के फेफड़े अंदर ही अंदर खराब हो सकते हैं।
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रोजाना हो सकेंगे 50 टेस्ट
सांस की समस्या के रोजाना 150 से 200 मरीज आते हैं। ज्यादातर को डायग्नोसिस की आवश्यकता होती है, जो इस मशीन के आने के बाद सटीक हो सकेगी। रोजाना 50 मरीजों की जांच की जा सकेगी। इस मशीन से मरीजों को रिपोर्ट जल्दी मिल जाएगी। निजी केंद्र डीएलसी जांच के नाम पर रुपये बना रहे हैं। निजी केंद्रों पर इसके पेशेवर हैं नहीं। यही कारण है निजी केंद्रों से मिले रिपोर्ट पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसमें मरीज परेशान होता है।

10 मिनट में हो जाता है टेस्ट

सात फीट लंबी और चार फीट चौड़ाई वाली इस पीएफटी मशीन से एक बार में एक मरीज की जांच हो सकती है।
एक मरीज का पीएफटी करने में 10 मिनट का समय लगता है। मशीन इसमें एकदम सटीक जानकारी देती है।



सीओपीडी और आईएलडी मरीजों को होती है ज्यादा परेशानी

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (आईएलडी) के मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जांच न होने से कैंसर के मरीजों को सबसे ज्यादा समस्या आती थी। अब इससे मरीजों को फायदा होगा।







मशीन से मरीज को मुख्य रूप से यह फायदे होंगे

-इस मशीन के आने से सबसे बड़ा फायदा बीमारी की सही जानकारी मिलना है।
-99 प्रतिशत सटीक होगी डायग्नोसिस।
-सही रिपोर्ट मिलने पर सही दवा दी जा सकेगी।
- दवा काम कर रही है या नहीं, इसका पता लगेगा
- फेफड़े कब तक खराब हो जाएंगे या होने वाले हैं, इसकी जानकारी मिलेगी
-लंबे समय से जिन मरीजों का इलाज चल रहा है, उनके लिए इसकी रिपोर्ट रामबाण होगी।
- कम उम्र के युवाओं के फेफड़ों का भविष्य मशीन बताने में सक्षम है।










सांस के मरीजों के लिए पीएफटी मशीन रामबाण साबित होगी। इसकी रिपोर्ट बिल्कुल सटीक आती है। लंबे समय से जिन मरीजों का उपचार चल रहा है, उनके फेफड़ों की सही जानकारी यह मशीन बता सकेगी। सांस के हर मरीज को एक दवा और एक उपचार से ठीक नहीं किया जा सकता है। ऐसे में सही डायग्नोसिस और सही रिपोर्ट से ही मरीज का सही उपचार किया जा सकता है।

डॉ. पवन, पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर, पीजीआईएमएस।
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